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हज के दौरान भगदड़, 244 की मौत
सऊदी अरब के अधिकारियों का कहना है कि मक्का के निकट मिना में हजयात्रियों में भगदड़ मचने से 244 हजयात्री मारे गए हैं. लगभग इतने ही लोगों के घायल होने की भी ख़बरें हैं. सऊदी अरब सरकार ने मक्का और मदीना में इंतज़ाम पुख़्ता करने के और तरीक़े सुझाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि शाह फ़हद ने इस समिति के गठन की सोमवार को घोषणा की जिसमें वरिष्ठ मंत्री और शहज़ादे शामिल होंगे. ज़्यादातर मृतक इंडोनेशिया, पाकिस्तान और अन्य एशियाई देशों से हैं. इस बीच कुछ ताज़ा ख़बरों के अनुसार इस भगदड़ में 11 भारतीयों की भी जानें गई है. ये भगदड़ मिना के निकट 'शैतान' को पत्थर मारने की रस्म के दौरान हुई. रिवायत के अनुसार हजयात्री वहाँ शैतान के प्रतीक खंबों पर पत्थर फेंकते हैं और अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं. अरब न्यूज़ के संपादक सिराज वहाब ने बीबीसी को बताया कई एंबुलेंस गाड़ियों को लोगों को अस्पताल ले जाते दिखा गया. सऊदी अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान कई हज यात्री कुचल कर मारे गए. इससे पहले भी मिना में भगदड़ के कारण हज यात्रियों की मौत हो चुकी है. पिछले साल 14 हज यात्री मारे गए थे. कुछ भारतीय भी बीबीसी हिंदी के साथ हुई बातचीत में जद्दाह में भारत के मुख्य वाणिज्यदूत सैयद अकबरुद्दीन ने बताया कि जिन भारतीयों की मौत हुई है उनमें जम्मू कश्मीर के ग़ुलाम मोहम्मद मीर, केरल के मोहम्मद अली और कोलकाता के मोहम्मद मोइनुद्दीन हैं. मृतकों में से दो के रिश्तेदारों को सूचना दी जा रही है. उन्होंने कहा कि हज यात्रा पर आए भारतीयों के लिए पूरे इंतज़ाम किए गए हैं. एक सौ डॉक्टर और नर्सें भारत से आईं हैं और साढ़े तीन सौ लोगों को स्थानीय स्तर पर भर्ती किया गया. हज यात्रियों के बारे में अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट http://cgijeddah.com पर जानकारी ली जा सकती है या 00966-2-6510514 बात की जा सकती है. मान्यता हज इस्लाम के पाँच बुनियादी उसूलों में से एक है और हर साल बड़ी संख्या में दुनिया भर से मुसलमान मक्का पहुँचते हैं. अन्य चार कर्तव्य हैं कलमा, रोज़ा, नमाज़ और ज़कात. इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार हर सक्षम और स्वस्थ शरीर वाले मुसलमान को अपने जीवन में एक बार हज ज़रूर करना चाहिए. हज यात्री को पवित्र काबा की परिक्रमा करनी होती है और उसके बाद वे अराफ़ात की पहाड़ी पर जाकर नमाज़ पढ़ते हैं. मुसलमानों का मानना है कि चौदह सौ साल पहले इसी जगह पैगंबर मोहम्मद साहब ने अपना आख़िरी पैग़ाम दिया था. हज यात्री इस मौक़े पर सफ़ेद कपड़े पहनते हैं जो पवित्रता की निशानी है. मुसलमानों का मानना है कि हज के मौक़े पर पढ़ी गई एक नमाज़ से एक लाख नमाज़ों के बराबर सवाब मिलता है. अनुमान है कि इस साल हज के लिए बीस लाख से भी अधिक मुसलमान सऊदी अरब पहुँचे. |
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