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भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र संधि | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संधि पर भारत समेत 118 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं. इस बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की बात हुई है. दुनिया में भ्रष्टाचार ख़त्म करने के उद्देश्य से, इस संधि के तहत अवैध तरीके से अर्जित धन-संपत्ति जिस देश की हो, उसे उसी देश को वापस करने का प्रावधान भी है. समाचार एजेंसियों के अनुसार शुक्रवार को भारत के राजदूत निरुपम सेन ने संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में इस संधि पर हस्ताक्षर किए. इस संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अमरीका, रूस, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, मालडीव, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ़्रांस शामिल हैं. इसके तहत विभिन्न देश भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और क़ानूनी जाँच में मदद करेंगे. इसका एक पहलू ये है कि इन देशों की ज़िम्मेदारी होगी कि वे एक दूसरी की ज़रूरत के अनुसार सबूतों को एक देश से दूसरे देश भेजें और दोषियों का प्रत्यर्पण करें. भारत में केंद्रीय जाँच ब्यूरो के पूर्व अध्यक्ष जोगिंदर सिंह का कहना था ऐसी संधियाँ उन मामलों में अमल में आती हैं जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसे का लेन-देन हुआ हो. लेकिन फिर भी इस संधि का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि कम से कम अब भारत के संदर्भ में ये तो पता लगाया जा सकेगा कि यदि किसी भारतीय ने ऐसे लेन-देन में भाग लिया है तो वह कौन है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'बिकाऊ हैं कीनिया के जज'05 अक्तूबर, 2003 को | पहला पन्ना स्विस बैंक वाला खेल खत्म? | भारत और पड़ोस लोकतंत्र को ख़तरा बढ़ा: संयुक्त राष्ट्र24 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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