BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 08 दिसंबर, 2005 को 13:17 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
यातना से जुटाए सबूत मान्य नहीं
ब्रिटेन की बेलमार्श जेल
यातना के ज़रिए सबूत हासिल करने के मुद्दे पर विवाद चला हुआ है
ब्रिटेन की सर्वोच्च न्यायिक संस्था ने फ़ैसला सुनाया है कि यातना देकर हासिल किए गए सबूतों को ब्रितानी क़ानूनी व्यवस्था में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

न्यायालय के इस फ़ैसले से आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के उन आठ संदिग्ध अभियुक्तों के मामले को बल मिला है साथ ही नागरिक अधिकारों के लिए अभियान चलाने वालों का पक्ष भी मज़बूत हुआ है.

सात क़ानूनी लॉर्ड्स के एक पैनल ने ब्रिटेन की अपील अदालत के 2004 में दिए गए उस फ़ैसले को निरस्त कर दिया जिसमें कहा गया था कि आतंकवादी गतिविधियों के संदिग्ध अभियुक्तों के मामले की सुनवाई करने वाले ट्राईब्यूनल उन सबूतों पर भी विचार कर सकते हैं जो ब्रिटेन की किसी आपराधिक अदालत की सुनवाई में स्वीकार्य नहीं हों.

आठ ऐसे लोगों पर ब्रिटेन से बाहर निकाले जाने का मुक़दमा चल रहा है जिन पर ब्रिटेन सरकार का आरोप है कि वे आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने में शामिल रहे हैं.

इन आठ लोगों ने दावा किया है कि उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ सबूत ऐसे लोगों से हासिल किए गए जिन्हें किन्ही अन्य देशों में बंदी रखा गया और उन्हें यातना दी गई इसलिए इन सबूतों को ब्रिटेन की न्याय प्रणाली में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

'नैतिक दूषण'

ब्रिटेन में क़ानूनी लॉर्ड व्यवहार में सर्वोच्च न्यायिक संस्था है और एक तरह से सुप्रीम कोर्ट की हैसियत से काम करता है.

ग्वांतानामो बे शिविर में रखा गया एक बंदी
ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदियों के साथ यातना के आरोप लगाए गए हैं

इस न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि इस तरह के सबूत स्वीकार्य नहीं हैं. न्यायालय के इस फ़ैसले की भाषा काफ़ी सख़्त है.

क़ानूनी लॉर्ड पैनल के एक सदस्य का कहना था कि यातना के ज़रिए हासिल किए गए सबूतों को अदालत में स्वीकार्य बनाने का मतलब है, "देश को नैतिक दूषण में शामिल करना."

एक अन्य जज लॉर्ड निकोलस ने कहा कि यह सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि अदालत में पेश किया जाने वाला कोई सबूत यातना के ज़रिए हासिल नहीं किया गया है.

ब्रिटेन सरकार पर ऐसे आरोप लगाए गए हैं कि उसने विदेशों में सबूत हासिल करने के लिए अपनाए जाने वाले साधनों पर सावधानी से विचार नहीं किया.

गुरूवार को यह फ़ैसला आने के बाद ब्रिटेन सरकार ने कहा कि उसने यातना की कभी भी अनदेखी नहीं की है.

ब्रिटेन सरकार की तरफ़ से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सरकार निर्विवाद तरीके से हासिल किए गए सबूतों के आधार पर बंदियों को देश से बाहर भेजने के विकल्प पर ज़ोर देती रहेगी.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>