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हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र के लिए प्रदर्शन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हॉन्गकॉन्ग में पूर्ण लोकतंत्र लागू करने की माँग करते हुए हज़ारों लोगों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया है. इस प्रदर्शन में मज़दूर संगठनों, मानवाधिकार गुटों के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने हिस्सा लिया, इनमें से कुछ लोगों ने चीन विरोधी नारों वाली तख़्तियाँ थाम रखी थीं. हॉन्गकॉन्ग चीन के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, अब इन प्रदर्शनकारियों की माँग है कि देश के अगले शासक का फ़ैसला आम चुनाव के ज़रिए हो. हॉन्गकॉन्ग में एक चुनाव समिति होती है जिसे चीनी सरकार गठित करती है और यही समिति तय करती है कि देश का नेतृत्व कौन करेगा. वर्ष 2003-2004 में भी वहाँ ऐसे ही प्रदर्शन हुए थे जिनके बाद चीनी सरकार चुनाव समिति के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 800 कर दी थी. लेकिन प्रदर्शनकारियों की माँग है कि हॉन्गकॉन्ग के शीर्ष नेता का चयन पूरी तरह से जनता करे न कि चीन के चुने हुए 800 लोग. बड़ा प्रदर्शन हॉन्गकॉन्ग स्थित बीबीसी संवाददाता क्रिस हॉग का कहना है कि प्रदर्शन में बहुत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जितनी उम्मीद की जा रही थी उससे कहीं अधिक. इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे एन्सन चान ने कहा, "आपके जीवन में कभी-कभी ऐसे मौक़े आते हैं जब आपको किसी मुद्दे के समर्थन या विरोध में खड़ा होना ही पड़ता है." अपनी चार वर्ष की बेटी के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले पालू चान्ग ने कहा, "मैं चाहता हूँ मेरी बेटी देखे और याद रखे कि लोकतंत्र के लिए, आने वाली पीढ़ी के लिए हमने संघर्ष किया." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रदर्शन का आयोजन करने वाले चीनी नेताओं को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि वहाँ जनमत पूर्ण लोकतंत्र से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें हांगकांग में लोकतंत्र के लिए बड़ा प्रदर्शन01 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना हाँगकाँग में बड़ा प्रदर्शन01 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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