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इंडोनेशिया में धमाके, 19 लोगों की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया के टेन्टेना शहर में हुए धमाके में दो धमाकों में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं और 40 से अधिक लोग घायल हैं. धमाका ऐसे समय में हुआ जब सड़कों पर काफ़ी भीड़ भाड़ थी 15 मिनट के अंदर एक के बाद एक हुए धमाके में दो पुलिसवाले भी घायल हुए हैं. सुलावेसी द्वीप में स्थित टेन्टेना शहर के बाज़ार में यह धमाका हुआ. पोसो क्षेत्र में बसा टेन्टेना शहर 1998 के बाद से ही ईसाइयों और मुस्लिमों के बीच हिंसक घटनाएं होती रहीं हैं जिसमें अब तक सैकड़ों लोग मारे गए हैं. 2001 में एक शांति समझौता हुआ था लेकिन हिंसा की छिटपुट घटनाएँ होती रहती हैं. 1998 में चुनावों में गड़बड़ी के बाद हिंसा शुरु हुई थी और कुछ जानकार कह रहे हैं कि अगले महीने होने वाले स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों को इस विस्फोट से जोड़कर देखा जा सकता है. इंडोनेशिया के उप राष्ट्रपति जोसेफ कल्ला ने बीबीसी से कहा है कि यह घटना सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं से मेल नहीं खाती है और संभवत: यह काम किसी आतंकवादी गुट का है जो दोनों समुदायों में वैमनस्य फैलाना चाहता है. हिंसक पृष्ठभूमि बाली में बीबीसी संवाददाता टिम जॉन्सटन का कहना है कि टेन्टेना ईसाई बहुल शहर है और यह हमेशा से मुस्लिमों के लिए खतरनाक इलाक़ा माना जाता रहा है. संवाददाता के अनुसार पिछले कुछ महीनों में दोनों समुदायों के बीच सौहार्द फैलान के लिए कई उपाय किए गए थे. हालांकि अभी इस बात के प्रमाण नहीं मिले हैं कि शनिवार के विस्फोट का कारण धार्मिक तनाव था. पास के ही पोसो इलाक़े में पिछले महीने दो बम विस्फोट हुए थे लेकिन इसमें कोई घायल नहीं हुआ था. साल की शुरुआत में सुरक्षा बलों ने टेन्टेना के खाली पड़े कुछ घरों से 60 हथगोले बरामद किए थे. गुरुवार को अमरीका ने सुरक्षा कारणों से इंडोनेशिया में अपने चारों कूटनीतिक कार्यालय बंद कर दिए थे. इंडोनेशिया की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिम है लेकिन सुलावेसी जैसे इलाक़ों में ईसाईयों की संख्या मुसलमानों के बराबर है. |
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