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गुरुवार, 17 मार्च, 2005 को 04:41 GMT तक के समाचार
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'कनिष्क पर हमले की खुली जाँच हो'
विमान का मलबा
कनाडा के क़ानूनी इतिहास के सबसे पेचीदा मामलों में से एक था यह मामला
कनाडा की एक अदालत ने 1985 में हुए एयर इंडिया विमान-कनिष्क कांड के दोनों अभियुक्तों रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी को बुधवार 16 मार्च को बरी कर दिया.

उस घटना में मारे गए लोगों के परिजनों ने इस पूरे मामले की खुली जाँच की माँग की है.

23 जून 1985 को हुए उस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी.

11 सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए हमलों से पहले तक कनिष्क विमान हादसा विमानन इतिहास में सबसे भयंकर चरमपंथी हमला था.

कनाडा के वेंकूवर की एक अदालत ने बुधवार को हालाँकि यह फ़ैसला सुनाने से पहले कहा कि बीस साल पहले इस विमान को बम से उड़ाने की साज़िश वेंकूवर में ही रची गई और 'वह एक आतंकवादी कार्रवाई' थी.

उधर अजायब सिंह बागड़ी की बेटी ने अपने पिता का बयान पत्रकारों के सामने पढ़ा जिसमें कहा गया, "मैं आज सार्वजनिक रूप से दोहराना चाहता हूँ, और मैंने अधिकारियों को 1985 के बाद बहुत बार पहले भी बताया है कि मैं इनमें से किसी भी आपराधिक गतिविधि में क़तई भी शामिल नहीं हूँ."

'निराशा'

वेंकूवर में एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उस घटना में मारे गए लोगों के बहुत से परिजनों और रिश्तेदारों को ऐसे फ़ैसले की उम्मीद नहीं थी और जैसे ही जज ने फ़ैसला सुनाया बहुत से संबंधी रो पड़े.

कनाडा के एक फ़िल्म निर्माता श्रीनिवास कृष्णा का कहना था, "बीस साल पहले हुए उस बम काँड में मैंने अपने बहुत से दोस्तों को खो दिया था. यह फ़ैसला मेरे लिए और उन सभी परिवारों के लिए निराशाजनक है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया था."

श्रीनिवास कृष्णा कनिष्क विमान पर हुए हमले की जाँच से संतुष्ट नहीं नज़र आते और कहते हैं, "अब लोग चाहते हैं कि इसकी एक सार्वजनिक जाँच हो जिसमें बिल्कुल शुरू से ही मामले की विस्तार से जाँच पड़ताल की जाए."

एक अन्य प्रभावित परिवार के सदस्य डेविड हेयर कहते हैं कि प्रभावित परिवार किसी राहत की उम्मीद कर रहे थे.

डेविड हेयर कहते हैं, "इस फ़ैसले से कनाडा में अन्य आतंकवादियों संदेश जाता है कि वे इकट्ठा होकर विमानों को बमों से उड़ा सकते हैं, निर्दोष लोगों की जान ले सकते हैं और उन्हें कुछ नहीं होने वाला है."

एक अन्य प्रभावित परिवार के वकील श्रवण सिंह रवन कहते हैं, "कनाडा के हर नागरिक का यह अधिकार है कि वह सरकार से सार्वजनिक जाँच की माँग करे. वह किसने किया था? उस भयंकर अपराध के पीछे आख़िर कौन था? अगर वे अपराधी नहीं है तो फिर यह किसने किया? हम बस यही जानना चाहते हैं."

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