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शनिवार, 08 जनवरी, 2005 को 13:19 GMT तक के समाचार
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फ़लस्तीनी चुनाव में इसराइल की चेतावनी
महमूद अब्बास
जीत के प्रबल दावेदार हैं महमूद अब्बास उर्फ अबू माज़ेन
फलस्तीन में रविवार को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से पहले इसराइल ने चेतावनी दी है कि वो मतदान के लिए सुरक्षा प्रतिबंधों में पूर्व निर्धारित ढिलाई नहीं देगा.

शुक्रवार को पश्चिमी तट पर एस इसराइली सैनिक के मारे जाने और तीन अन्य के घायल होने की घटना के बाद इसराइल ने अपना रुख कड़ा कर लिया है.

इसराइली सेना के अनुसार शुक्रवार को दो फ़लस्तीनी बंदूकधारियों ने इसराइली वाहनों पर हमला कर के एक सैनिक को मार डाला था.

इसराइल रेडियो ने कहा कि ये चेतावनी चुनावों की निगरानी करने के लिए आए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों तक पहुंचा दी गई है.

रविवार को क़रीब 20 लाख फलस्तीनी अपना नेता चुनने वाले हैं.

फ़लस्तीन के मुख्य राजनीतिक दल फतह के अध्यक्ष महमूद अब्बास को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है.

चुनावों के लिए आधिकारिक चुनाव प्रचार बंद हो चुका है और जनमत सर्वेक्षणों में अब्बास को स्पष्ट जीत दिखाई जा रही है.

इसराइली सेना शुक्रवार की घटना के बाद पश्चिमी तट पर सुरक्षा अभियान चला रही है. कहा जा रहा है कि यह हमला अल अक्सा मारटर्स ब्रिगेड ने किया था.

इस बीच एक फ़लस्तीन व्यक्ति इसराइली गोलीबारी में मारा गया है. सेना का कहना है कि यह व्यक्ति चरमपंथी था.

पूर्व में इसराइली सेना ने वादा किया था कि मतदान के लिए वो सुरक्षा प्रतिबंधों में थोड़ी ढील देंगे लेकिन शुक्रवार के हमलों के बाद स्थिति बदल गई प्रतीत होती है.

अब्बास का वादा

मुख्य पर्यवेक्षक के रुप में पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री माइकल रोकार्ड फलस्तीन में हैं.

दोनों ने कुछ चेकनाकों का दौरा कर के देखने की कोशिश की है कि इसराइल ने पूर्व में किए वादे के अनुसार ढिलाइ दी है या नहीं.

दूसरी ओर फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब इराकात ने संवाद समिति एएफपी से कहा है कि शनिवार की सुबह तक चेकनाकों पर कोई ढिलाई नहीं दी गई थी.

शुक्रवार की देर रात महमूद अब्बास ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनके पास इसराइली प्रधानमंत्री एरियल शेरॉन के साथ मिलकर काम करने के अलावा कोई और चारा नहीं है.

उन्होंने कहा " शेरॉन को लोगों ने ही चुना है.हमें कोई हक नहीं कि उन्हें बदलने की मांग करें. हमारे पास कोई और विकल्प नहीं. हम उनके साथ मिलकर काम करेंगे."

अब्बास के ख़िलाफ मैदान में आए मुस्तफा बरगूती को चुनाव प्रचार के दौरान पूर्वी यरुशलम में प्रवेश नहीं करने दिया गया.

अब्बास और बरगूती दोनों ही उदारवादी नेता माने जाते हैं और इन दोनों नेताओं ने चार साल से चल रहे इंतिफादा के कई पहलूओं की आलोचना की है.

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