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बरग़ूती चुनाव से पीछे हटे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल की एक जेल में आजीवन जेल की सज़ा काट रहे फ़लस्तीनी नेता मरवान बरग़ूती ने कहा है कि वे राष्ट्रपति पद के लिए हो रहे चुनाव में नहीं लड़ेंगे. ये घोषणा उनके चुनाव प्रचार के प्रबंधक ने पश्चिमी तट में की. उन्होंने बरग़ूती का एक पत्र पढ़ कर सुनाया. इस पत्र में उन्होंने आहवान किया कि जो भी राष्ट्रपति पद के चुनाव में सफल हो वह इसराइल के साथ सशस्त्र लड़ाई का विकल्प खुला रखे. उधर मिस्र और ग़ज़ा पट्टी की सीमा पर रफ़ाह शहर के पास एक इसराइली सैनिक चौकी पर बड़ा हमला हुआ है. फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने चौकी के नीचे सुरंग खोदकर विस्फोट किए और फिर चौकी पर गोलियों की बरसाईं जिससे कम से कम चार इसराइली मारे गए और दस घायल हो गए. धमाका इतना ज़ोरदार था कि कई इमारतें ध्वस्त हो गईं. एक नकाबपोश ने एक अरबी टीवी चैनल पर कहा कि 'फ़ताह हॉक्स' और हमास ने संयुक्त तौर पर ये कार्रवाई की. 'मकसद चुनौती नहीं' दो सप्ताह पहले बरग़ूती ने कहा था कि वे फ़तह के नरमपंथी माने जाने वाले नेता महमूद अब्बास के मुक़ाबले चुनाव में खड़े होंगे. इसके लिए उनकी कड़ी आलोचना भी हुई थी. बरग़ूती के चुनाव न लड़ने के फ़ैसले की घोषणा जिस पत्र के ज़रिए की गई उसमें कहा गया है कि उनका इरादा राजनैतिक अधिकार के लिये लड़ना था, महमूद अब्बास को चुनौती देना नहीं. उन्होंने कहा कि वे फ़तह संगठन के अंदर किसी तरह की समस्या पैदा करना नहीं चाहते. बरग़ूती ने अपने पत्र में कहा है कि इस्राइल शांति का सच्चा भगीदार नहीं है इसलिए उसके ख़िलाफ़ विद्रोह जारी रहना चाहिए. बरग़ूती के नाम वापस ले लेने के बाद महमूद अब्बास की जीत का रास्ता आसान हो गया है. इस्लामिक चरमपंथी संगठन हमास ने चुनावों के बहिष्कार की घोषणा की है इसलिए अब महमूद अब्बास को वास्तविक चुनौती देने वाला कोई और नज़र नहीं आता. |
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