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बॉबी जिंदल प्रतिनिधि सभा में पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार पियूष बॉबी जिंदल ने कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में जगह पा ली है. बॉबी जिंदल क़रीब पाँच दशक में प्रतिनिधि सभा में पहुँचने वाले भारतीय मूल के पहले व्यक्ति हैं. लुइज़ियाना राज्य के फ़र्स्ट कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट चुनावी क्षेत्र से इसी तरह के नतीजे की उम्मीद की जा रही थी क्योंकि यहाँ रिपबलिकन पार्टी के समर्थक भारी संख्या में रहते हैं. जीत की ख़बर मिलने के बाद बॉबी पियूश जिंदल ने अपने समर्थकों को धन्यवाद दिया. वह अपने दो बच्चों, पत्नी सुप्रिया और अपने माता-पिता के साथ जीत का जश्न मनाने एक पंडाल में जमा हुए जहाँ उनके हज़ारों समर्थक पहले से ही मौजूद थे. पिछले साल उन्होंने लुइज़ियाना राज्य के गवर्नर का चुनाव लड़ा था लेकिन कामयाब नहीं हुए थे. 33 वर्षीय जिंदल को 78 प्रतिशत मत मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के रॉय आर्मस्ट्राँग को क़रीब सात प्रतिशत वोट मिले. जिंदल से पहले 1956 में दिलीप सिंह सौंद अमरीकी कांग्रेस में चुने गए थे. बाबी पियूश जिंदल ने 24 साल की उम्र में ही लुइज़ियाना राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष के पद पर काम किया और उसे लाखों डालर के घाटे से निकालकर फायदे में पहुँचा दिया था. उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उन्हें अपना स्वास्थ्य सलाहकार नियुक्त कर लिया था लेकिन पिछले साल लुइज़ियाना राज्य के गवर्नर का चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने वह पद छोड़ दिया था. जिंदल के माता-पिता भारत के हरियाणा राज्य से क़रीब 35 साल पहले अमरीका आकर बस गए थे पीयूष बॉबी जिंदल का जन्म अमरीका में ही हुआ. जिंदल के पिता अमरीका में इंजीनियर रहे हैं और उनकी माता सरकारी नौकरी में.
जिंदल की परवरिश तो हिंदू धर्म में ही हुई लेकिन किशोरावस्था में उन्होंने ईसाई धर्म का अनुसरण कर लिया जिस पर स्थानीय हिंदू समुदाय उनसे ख़ासा नाराज़ भी था. समाचार एजेंसी एएफ़पी का कहना है कि जिंदल को दक्षिणपंथी अमरीकियों के वोट काफ़ी संख्या में मिले क्योंकि उन्होंने कैथोलिक आस्था और सामाजिक परंपरागत एजेंडे पर ख़ास ध्यान दिया. जिंदल ने ब्राउन विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की और ब्रिटेन के ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय में एक साल तक स्कॉलर भी रह चुके हैं. अमरीका में भारतीय मूल के क़रीब 17 लाख लोग रहते हैं और उममें से 8200 लुइज़ियाना में और बॉबी जिंदल के प्रतिनिधि सभा में चुने जाने पर भारतीय समुदाय में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है. कुछ और जीते जिंदल के अलावा कुछ और भारतीय मूल के लोगों ने भी इस बार के चुनाव में हिस्सा लिया था. एक भारतीय मूल की महिला डेमोक्रेटिक पार्टी की स्वाती डांडेकर ने भी आयोवा राज्य की एसेंबली की सदस्यता दोबारा हासिल कर ली है. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी रिपब्लिकन पार्टी के कोरी क्रावली को दस प्रतिशत वोटों के अंतर से मात दी. स्वाती डांडेकर कहती हैं, "मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, इस बार मुक़ाबला इसलिए काँटे का हो गया था क्योंकि मेरे प्रतिद्वंदी ने पानी की तरह पैसा बहाया था लेकिन लोगों को मेरे पिछले कार्यकाल में मेरे काम से कोई शिकायत नहीं थी और इन्होंने मुझे फिर चुन लिया." स्वाती डांडेकर ने 2002 में एसेंबली की सीट पहली बार जीती थी और वह पहली भारतीय महिला थीं जो किसी अमरीकी राज्य की असेंबली की सदस्य बनी थीं. भारत में पैदा हुईं स्वाती डांडेकर भारत से क़रीब तीस साल पहले अमरीका के आयोवा राज्य में आकर बसी थीं और शिक्षा और बच्चों के हित के लिए सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी काम करती रही हैं. उनकी लोकप्रियता को देखते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन केरी ने उन्हें अपनी चुनावी मुहिम में आयोवा राज्य में चुनाव की देख-रेख के लिए सह-अध्यक्ष भी बना दिया था. स्वाती डांडेकर के अलावा भारतीय मूल के तीन अन्य लोग अमरीकी राज्यों मेरीलेंड, न्यू जर्सी और मिनेसोटा में एसेंबली और सीनेट के सदस्य हैं. |
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