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अब मित्र देशों के लिए भी फिंगरप्रिंट्स | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में जिन देशों के नागरिकों को बिना वीज़ा दाख़िल होने की अनुमति है उन्हें भी अब अमरीका में दाख़िल होते वक़्त फिंगरप्रिंट्स यानी अपनी उंगलियों की छाप देनी होगी. साथ ही इन लोगों की डिजिटल तस्वीरें भी ली जाएँगी. 27 देशों के नागरिकों के लिए यह नई व्यवस्था तीस सितंबर 2004 से लागू की जा रही है जिनमें कई यूरोपीय देश, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और जापान भी शामिल हैं. अमरीका का कहना है कि बेहतर सुरक्षा के लिए लंबी क़तारें तो लगानी ही पड़ेंगी और उसके लिए यह एक मामूली क़ीमत है. मगर नागरिक अधिकारों के लिए काम कर रहे संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. हर वर्ष अमरीका में बिना वीज़ा के दाख़िल होने वालों की संख्या क़रीब एक करोड़ 30 लाख है. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि आतंकवादी हमलों के ख़तरों को कम करने के लिए ये क़दम उठाना ज़रूरी है. 'बायोमेट्रिक पासपोर्ट' इसके अलावा अगले वर्ष अक्तूबर से इन सभी 27 देशों के नागरिकों के पास 'बायोमेट्रिक डाटा' वाले पासपोर्ट होने चाहिए जिसमें डिजिटल फ़ोटो के साथ-साथ उंगलियों की छाप भी होती है. इस नई व्यवस्था को दूसरे देशों के लिए तो इस वर्ष जनवरी से ही लागू कर दिया गया था. अधिकारियों का कहना है कि तब से 280 संदिग्ध अपराधियों और फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इस तरह की व्यवस्था अमरीका के 115 प्रमुख हवाईअड्डों और 14 बंदरगाहों पर लागू है और अगले वर्ष के अंत तक अमरीका की सीमा चौकियों पर भी इसे लागू किया जाएगा. इस नई व्यवस्था में शामिल किए गए देश हैं- अंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्रुनेई, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, आइसलैंड, आयरलैंड, इटली, जापान, लिचेंस्टाइन, लग़्ज़म्बर्ग, मोनाको, नीदरलैंड्स, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, सैन मैरिनो, सिंगापुर, स्लोवीनिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड और स्विट्ज़रलैंड. |
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