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हॉंगकॉंग चुनाव में जीते चीन समर्थक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हॉंगकॉंग में हुए चुनाव के नतीजे दिखाते हैं कि लोकतंत्र समर्थक गुट बेहतर प्रदर्शन की अपनी उम्मीदें पूरी नहीं कर पाए हैं जबकि चीन समर्थक पार्टियों को बहुमत मिला है. इस तरह इन नतीजों से लोकतंत्र का समर्थन करने वाली पार्टियों को झटका लगा है और चीन की सरकार को बल मिला है. लोकतंत्र समर्थक डेमोक्रैट्स को 60 में से 25 सीटें मिली हैं जो कि पिछली बार मिली सीटों से सिर्फ़ तीन ही ज़्यादा हैं और उम्मीदों से कहीं कम हैं. चीन का समर्थन करने वाली पार्टियों ने सदन में 60 में से 34 सीटें जीती हैं. इस तरह विश्लेषकों को इन नतीजों से आश्चर्य ज़रूर हुआ है. विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव को लोकतंत्र की माँग पर जनमत संग्रह बताया था और उन्हें काफ़ी निराशा हुई है. उम्मीद तो थी कि उन्हें फ़ायदा होगा मगर यौन शोषण से जुड़े कुछ मामलों और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी कुछ ख़बरों के सामने आने के बाद शायद उन्हें नुक़सान हुआ है. चीन समर्थक पार्टियाँ सोच रही थीं कि केंद्रीय सरकार की अलोकप्रियता और चीन से नज़दीक़ी रिश्ते उनके लिए महँगे पड़ सकते हैं और उनका मत प्रतिशत गिर सकता है. मगर ऐसा नहीं हुआ. चीन की सरकार का समर्थन करने वाले एक राजनीतिक नेता त्सांग योक सिंग ने कहा कि हॉंगकॉंग की जनता ने स्थिरता के लिए वोट दिया है. इस मतदान में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने मतदान किया था और लोकतंत्र का समर्थन करने वाली पार्टियों के आपत्ति जताने पर मतों की गिनती दोबारा कराई गई थी. |
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