|
ब्लेयर की इराक़ नीति पर फिर संदेह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ पर अमरीका की अगुआई में हुए हमले को समर्थन देने के लिए ब्रिटेन सरकार की भूमिका पर एक बार फिर उंगलियाँ उठी हैं. ब्रिटेन के दो पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारियों ने इराक़ से ख़तरे के बारे में पेश किए गए उन प्रमाणों पर संदेह व्यक्त किया है जिनका इस्तेमाल प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इराक़ पर हमले के लिए किया. ये दोनों सेवानिवृत्त अधिकारी हैं ब्रायन जोन्स और जॉन मॉरिसन. दोनों अधिकारियों ने कहा कि उन्हें ऐसी ढेर सारी सूचनाओं की कोई जानकारी नहीं थी जिनसे ये प्रमाण मिलता हो कि इराक़ के पास भारी तबाही वाले हथियार हैं और वह बहुत कम समय में उनका इस्तेमाल करने की क्षमता रखता है. दोनों ने बीबीसी टेलीविज़न के पैनोरमा कार्यक्रम में ऐसे बयान दिया जिनका प्रसारण रविवार को हो रहा है. ये बयान ऐसे वक़्त आए हैं जब सरकार बटलर आयोग की रिपोर्ट का सामना करने के लिए तैयार हो रही है. इराक़ के बारे में ख़ुफ़िया जानकारियों का किस तरह इस्तेमाल हुआ, इस बारे में जाँच करनेवाली बटलर आयोग की रिपोर्ट बुधवार को आएगी. अविश्वास
ब्रिटेन के सेवानिवृत्त वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारी डॉक्टर ब्रायन जोन्स ने पैनोरमा कार्यक्रम में कहा है कि वे हटन जाँच के समय टोनी ब्लेयर की गवाही से 'चकित' रह गए थे. हथियार विशेष डॉक्टर डेविड केली की मौत के कारणों की जाँच करनेवाले हटन आयोग के समक्ष टोनी ब्लेयर ने कहा था कि उनके सामने ऐसी कई जानकारियाँ और प्रमाण आए थे जिनसे सद्दाम हुसैन के हथियार कार्यक्रमों का पता चलता था. एक और पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जॉन मॉरिसन ने कहा कि इराक़ के संबंध में टोनी ब्लेयर के दावों पर सरकारी हलकों में अविश्वास था. वैसे टोनी ब्लेयर ने इराक़ पर हमला करने के लिए अपने पक्ष को मज़बूत करने के उद्देश्य से ख़ुफ़िया जानकारियों से छेड़छाड़ की ख़बरों का लगातार खंडन किया है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||