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'ग्राउंड ज़ीरो' पर निर्माण शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
न्यूयॉर्क में जहाँ कभी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की गगनचुंबी इमारतें हुआ करती थीं, वहाँ अब नई इमारत का निर्माण शुरू हो गया है. ये जगह अब 'ग्राउंड ज़ीरो' कहलाती है. ये इमारत दुनिया की सबसे ऊँची इमारत होगी और इसका नाम होगा, 'फ़्रीडम टावर'. इसकी ऊँचाई 1776 फ़ुट यानी लगभग 541 मीटर होगी और इसे 2009 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है. इस इमारत की ऊँचाई अमरीका की स्वतंत्रता के वर्ष को दिखाती है और इसका काम भी रविवार, चार जुलाई यानी अमरीका के स्वतंत्रता दिवस के दिन ही हो रहा है. इसका डिज़ाइन अमरीका के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट डेनियल लिबेस्काइंड ने किया है मगर इसे लेकर कुछ विवाद भी खड़े हुए हैं. ग्राउंड ज़ीरो पर शुरुआती तौर पर जिस इमारत का प्रस्ताव रखा गया था, उससे लोग ख़ुश नहीं थे. लोगों के ग़ुस्से को देखते हुए मास्टर प्लान बनाने के लिए दूसरी बार एक प्रतियोगिता रखी गई. मगर बीबीसी के कला संवाददाता लॉरेंस पोलार्ड का कहना है कि कुछ और अच्छे प्रस्ताव भी थे जिन्हें वाणिज्यिक, व्यावहारिकता को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया. संवाददाताओं के अनुसार बड़ी इमारतों की परियोजनाओं में इस तरह के विवाद साधारण बात हैं. फ़्रीडम टावर के लिए कोई पारंपरिक समारोह नहीं हो रहा है. नई इमारत के लिए 20 टन का ग्रेनाइट उत्तरी न्यूयॉर्क से लाया गया है और उसी के अनावरण के साथ निर्माण शुरू हुआ. |
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