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'इज़्ज़त के नाम पर हत्याओं' की जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंग्लैंड और वेल्स में पुलिस 100 ऐसी हत्याओं की फिर से जाँच कर रही है जिनके बारे में उन्हें शक है कि ये ख़ानदानी इज़्ज़त बचाने के नाम पर की गई हैं. इनमें से कुछ मामले तो 10 साल तक पुराने हैं. इन हत्याओं में से 52 लंदन में हुई हैं. मारी गई अधिकतर महिलाएँ या लड़कियाँ दक्षिण एशियाई मूल की थीं. इस बारे में हो रही जाँच की पूरी जानकारी इसी विषय पर हेग में हो रहे एक सम्मेलन में दी जाएगी. 'ख़ानदानी इज़्ज़त बचाने के नाम पर होने वाली हत्या' रोकने के लिए पूरे यूरोप में जागरूकता फैलाने के मक़सद से हेग में सुरक्षा अधिकारियों की बैठक हो रही है. इसमें 25 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. दक्षिण एशियाई समुदायों के अलावा कुछ पीड़ित अरब और कुछ पूर्वी यूरोपीय देशों के रहे हैं. आमतौर पर हत्या की वजह ऐसे संबंध थे जिन्हें परिवार ने अपने लिए शर्मनाक माना और ख़ानदान की इज़्ज़त पर धब्बा. पुलिस का कहना है कि कुछ मामलों में तो परिजनों ने हत्या के लिए दूसरों को पैसे भी दिए. कैसे निपटा जाए यूरोपीय पुलिस एजेंसी 'यूरोपोल' के मुख्यालय पर हो रही इस बैठक में इस पर विचार होगा कि आख़िर इस तरह की हत्याओं से निपटा कैसे जाए. पिछले साल सितंबर में ब्रिटेन की पुलिस ने इस तरह की हत्याओं के पीछे विकसित हो रही संस्कृति के बारे में नए शोध की घोषणा की थी. हेग में हो रही बैठक में स्वीडन के प्रतिनिधि 26 वर्षीया कुर्द महिला फ़ादिमे के मामले का उल्लेख करेंगे जिसकी दो साल पहले स्टॉकहोम में कथित तौर पर उसके पिता ने हत्या कर दी थी. इस हत्या की वजह स्वीडन के एक नागरिक से बने उसके संबंध थे. विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में इस तरह की हत्याएँ बढ़ रही हैं मगर परिवारों में इसे पूरी तरह गुप्त रखा जाता है इसलिए असली संख्या का पता नहीं चल पाता. |
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