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रोनल्ड रीगन:फ़िल्मों से राजनीति तक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन का 93 साल की अवस्था में शनिवार, पाँच जून, 2004 को लॉस एंजल्स में अपने घर में ही आख़री साँस ली. फ़िल्मों की दुनिया से राजनीति में आए रोनल्ड रीगन 1981 से 1989 तक दो दो बार अमरीका के राष्ट्रपति रहे. रोनल्ड रीगन जब 1980 में 69 साल की उम्र में 40वें राष्ट्रपति के लिए निर्वाचित हुए तो इस पद पर चुने जाने वाले वह सबसे ज़्यादा उम्र के राष्ट्रपति थे. और रोनल्ड रीगन किसी भी पूर्व राष्ट्रपति से ज़्यादा उम्र तक जिए. अपने दो कार्यकाल के दौरान रोनल्ड रीगन ने न सिर्फ़ अमरीका के लोगों पर बल्कि दुनिया पर ऐसी छाप छोड़ी कि उनके कार्यकाल को उनके नाम पर ही 'रीगन युग' कहा जाने लगा. जूतों के एक व्यापारी के बेटे रोनल्ड रीगन ने अपनी युवावस्था में खेल कमेंटेटर के रूप में अपना करियर शुरू किया. उसी दौरान उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में जाने का फ़ैसला कर लिया और वार्नर ब्रॉदर्स के साथ 1937 में एक समझौता करके उनके साथ पचास फ़िल्में बनाईं लेकिन वह कुछ ख़ास ऊँचाई पर नहीं पहुँच सके. लेकिन हॉलीवुड की पहचान राजनीति में काम आई और उन्होंने वह स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड के अध्यक्ष बन गए. रोनल्ड रीगन 1966 से 1974 तक कैलीफ़ोर्निया के गवर्नर रहे और उन्होंने एक परंपरागत लेकिन सक्षम प्रशासन दिया.
उनकी नज़रें राष्ट्रपति पद पर टिक गईं और 1968 में उन्होंने पहली बार रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने की कोशिश की. एक बार फिर 1976 में उन्होंने यह कोशिश की लेकिन उस बार भी राष्ट्रपति फ़ोर्ड उनसे ज़्यादा बेहतर साबित हुए. आख़िरकार चार साल बाद वह कामयाब हो गए जब उन्होंने जिमी कार्टर को हराकर उम्मीदवारी हासिल कर ली. लेकिन 1981 में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही रोनल्ड रीगन को उन 52 अमरीकियों की रिहाई के लिए निर्णायक बातचीत करनी पड़ी जिन्हें ईरान ने बंधक बना लिया था. जान पर हमला रोनल्ड रीगन पर कार्यभार संभालने के दो महीने के भीतर ही एक बंदूकधारी ने हमला किया और गोली रीगन के सीने में लगी. रोनल्ड रीगन के हँसमुख अंदाज़ ने बहुत से लोगों का दिल जीता, यहाँ तक कि गोली लगने के बाद ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों से रीगन ने चुटकी ली, "मुझे उम्मीद है कि आप भी रिपब्लिकन होंगे." गोली लगने के एक महीने के भीतर ही वह काम पर वापस आ गए. रोनल्ड रीगन के कार्यकाल में अमरीका को हर क्षेत्र में नए सिरे से नए हथियारों से लैस किया गया और सोवियत संघ के ख़तरे से देश को सुरक्षित रखने के लिए बजट में 13 प्रतिशत बढ़ोत्तरी को असाधारण माना गया. विदेश नीति रोनल्ड रीगन ने मज़बूत राजनीतिक दोस्त बनाए जिनमें ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थैचर भी थीं जिन्होंने अर्जेंटीना के साथ फाकलैंड संकट में रीगन का साथ दिया. लेकिन विदेश नीति के मामले में रीगन को ख़ासी आलोचना का सामना करना पड़ा लेकिन उनके आलोचक भी मानते हैं कि रीगन की ग़लतियों से कभी उनका मनोबल कम नहीं हुआ.
1984 में दोबारा चुने जाने के बाद रीगन ने सोवियत संघ पर अपना ध्यान लगाया जिससे एक इतिहास का रास्ता निकला. 1985 में रीगन ने नए सोवियत नेता मिख़ाइल गोर्बाच्योफ़ से जेनेवा मुलाक़ात की. मुलाक़ात को दोस्ताना और बेबाक बताया गया और दोनों नेताओं ने दुनिया को और सुरक्षित बनाने का संकल्प व्यक्त किया. लेकिन स्टार वार्स के नाम से जानी जाने वाली रणनीति 'सामरिक सुरक्षा पहल' (एसडीआई) का रीगन के सपने में काफ़ी रोड़े आए. अक्तूबर 1986 में तब महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया जब दोनों महाशक्तियाँ परमाणु हथियार कम करने पर राज़ी हुए. रोनल्ड रीगन का कार्यकाल सफलताओं और संकटों का मिलाजुला रहा. जब उन्होंने दफ़्तर छोड़ा तो बजट घाटा इतना बड़ा था जितना उनसे पहले रहे 39 राष्ट्रपतियों का कुल बजट घाटा भी नहीं था. रोनल्ड रीगन एक तेज़ तर्रार नेता होने से ज़्यादा एक ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने बातचीत करने के बेहतरीन अंदाज़ से अमरीकियों को ख़ुद के बारे में अच्छा महसूस कराया. रिटायर होने के एक साल बाद रोनल्ड रीगन ने देशवासियों के नाम एक खुला पत्र लिखा जिसमें कहा, "मुझे हाल ही में बताया गया है कि मैं उन लाखों अमरीकियों में से एक हूँ जो अल्ज़ाइमर बीमारी की चपेट में आ चुके हैं. मैं अब एक ऐसा सफ़र शुरू कर रहा हूँ जो मुझे मेरी ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव पर ले जाएगा." अल्ज़ाइमर एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें दिमाग़ की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और याद्दाश्त भी खो जाती है. नेंसी रीगन ने पिछले महीने जानकारी दी थी कि उनके पति की बीमारी बहुत गंभीर हो गई है. "रोनी की लंबी यात्रा उन्हें एक ऐसी जगह ले गई है जहाँ में नहीं पहुँच सकती." |
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