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संकट सुलझाने इराक़ पहुँचे ईरानी मध्यस्थ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने इराक़ में जारी संकट को सुलझाने के लिए अपना एक शिष्टमंडल भेजा है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ईरना का कहना है कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इराक़ में गहराते संकट पर विचार-विमर्श करने के लिए वरिष्ठ इराक़ी हस्तियों से मुलाक़ात करेंगे. ईरान इराक़ की घटनाओं पर पैनी नज़र रखे हुए है और उसने अमरीकी सैनिक कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और मौजूदा संकट के लिए अमरीकी गठबंधन की सेनाओं को दोषी ठहराया है. उम्मीद है कि ईरानी विदेश मंत्रालय का शिष्टमंडल इराक़ में अमरीकी गठबंधन के अधिकारियों वरिष्ठ धार्मिक अधिकारियों और इराक़ी राजनेताओं से मुलाक़ात करेगा. खाड़ी मामलों के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय के निदेशक हुसैन सादेग़ी की अध्यक्षता में ईरानी शिष्टमंडल के इराक़ दौरे का मक़सद इराक़ में मौजूदा स्थिति का आकलन करना और तनाव कम करने की कोशिश करना है. अनुरोध ऐसी रिपोर्टें भी हैं कि अमरीका ने ईरान से कहा है कि वो इराक़ की स्थिति में अपनी मध्यस्थता करे.
ईरान का शिया मुस्लिमों पर अच्छा-ख़ासा प्रभाव माना जाता है. मंत्रिमंडल की साप्ताहिक बैठक में विदेश मंत्री कमाल ख़र्राज़ी ने इस बात की पुष्टि की है कि अमरीका और ईरान के बीच स्विस दूतावास के ज़रिए इराक़ के बारे में बातचीत हुई है. ख़र्राज़ी ने साथ ही ये भी कहा कि बल प्रयोग करने की अमरीकी नीति ग़लत है और यह सफल नहीं होगी. उन्होंने कहा है कि इसकी बजाय अमरीका को संबद्ध इराक़ी अधिकारियों और इराक़ के पड़ोसी देशों से विचार-विमर्श करना चाहिए. इराक़ में अनेक गुटों के साथ ईरान के नज़दीकी संबंध हैं, जिनमें से ज़्यादातर अंतरिम शासकीय परिषद में शामिल पार्टियाँ हैं. |
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