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हर तीसरे व्यक्ति को और विटामिन चाहिए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया में हर तीसरे व्यक्ति को पर्याप्त विटामिन और अन्य पौष्टिक तत्व उपलब्ध नहीं है. यूनीसेफ़ और माइक्रोन्यूट्रिएंट इनीसिएटिव की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. इसके अनुसार विटामिन और पौष्टिक खनिज तत्वों की कमी न सिर्फ़ शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सबको पर्याप्त विटामिन और मिनरल्स उपलब्ध कराए बिना ग़रीबी हटाने और बेहतर स्वास्थ्य संबंधी योजनाएँ सफल नहीं हो सकती. विशेषज्ञों के अनुसार भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी से बौद्धिक विकास धीमा हो जाता है और शरीर की प्रतिक्षण प्रणाली भी कमज़ोर पड़ जाती है. विभिन्न पौष्टिक तत्वों की कमी का अलग-अलग असर पड़ता है. जैसे माना जाता है कि माताओं में आयोडिन की कमी के कारण बच्चे मानसिक गड़बड़ियों के साथ पैदा होते हैं. इसी तरह हर साल हर साल 10 लाख बच्चों की मौत शरीर की कमज़ोर प्रतिरक्षण व्यवस्था के कारण होती है, जो कि विटामिन ए की कमी से होता है. सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में हर पाँचवें व्यक्ति के भोजन में पर्याप्त ज़िंक नहीं होता, और इस कारण उनमें डायरिया और निमोनिया का ख़तरा बढ़ जाता है. कई मामलों में पौष्टिक तत्वों की कमी को एनीमिया और आँखों की ज्योति जाने का कारण माना गया है. रिपोर्ट में खाने-पीने के उत्पाद से जुड़ी कंपनियों को भोजन सामग्री में प्रमुख विटामिन डालने की व्यवस्था करने को कहा गया है. |
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