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'मानवाधिकार हनन कर रही है अमरीकी सेना' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में अमरीका की कड़ी आलोचना की है. संगठन का कहना है कि अमरीकी सेना की ख़ुफ़िया मामलो से संबंधित टुकड़ियाँ अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं. अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के लगभग 9000 सैनिक हैं. अमरीका का कहना है कि तालिबान और अल क़ायदा के सदस्यों पर नियंत्रण रखने के लिए सेना का वहाँ रखा जाना ज़रूरी है. लेकिन इसके ठीक उलट 'ह्यूमन राइट्स वॉच' का कहना है कि अमरीका के अफ़ग़ानिस्तान में कई सैन्य ठिकाने हैं जिनमें वर्ष 2002 से अब तक करीब एक हज़ार लोगों को ग़ैर क़ानूनी तरीके से रखा गया है. रिपोर्ट में लिखा गया है कि ये लोग न केवल ग़ैर- क़ानूनी तरीके से रखे जाते हैं बल्कि इन पर तरह-तरह के अत्याचार किए जाते हैं. बताया गया है कि लोगों को सोने नहीं दिया जाता, बहुत गर्मी और बेहद ठंड में रखा जाता है और कई बार तो इस हद तक यातनाएँ दी जाती हैं कि लोगों की मौत भी हो जाती है. रिपोर्ट के अनुसार इस तरह मारे गए लोगों में कई निर्दोष लोग भी शामिल हैं. अमरीकी सेना के प्रवक्ता का कहना है कि वो इन आरोपों को गंभीरता से ले रहे हैं. लेकिन साथ ही प्रवक्ता का कहना है कि रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि इसे बनाने वालों को अफ़ग़ानिस्तान की परिस्थितियों का अंदाज़ा नहीं है. सेना के प्रवक्ता का ये भी कहना है कि 'ह्यूमन राइट्स वॉच' चाहता है कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में पुलिस के मान्य तरीकों के हिसाब से काम करे. उनका कहना है कि दरअसल अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति किसी युद्धक्षेत्र जैसी है जिसके लिए सेना को ज़्यादा कड़े क़दम उठाने की ज़रूरत पड़ रही है. |
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