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बीबीसी चेयरमैन का इस्तीफ़ा
हटन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पर विचार के लिए बीबीसी गवर्नरों की गुरूवार को आपात बैठक हो रही है. लॉर्ड हटन की रिपोर्ट में बीबीसी की जमकर आलोचना की गई जिसके सार्वजिनक किए जाने के थोड़ी ही देर बाद बीबीसी के चेयरमैन गेविन डेविस ने त्यागपत्र दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफ़ा देते हुए कहा कि बीबीसी के शीर्ष पद पर होने के नाते वे अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं. मगर उन्होंने कहा कि बीबीसी ने जान-बूझकर जनता को गुमराह नहीं किया.
गेविन डेविस ने साथ ही हटन आयोग के निष्कर्षों को लेकर कुछ सवाल भी उठाए. रिपोर्ट पर बीबीसी के महानिदेशक ग्रेग डाइक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ये कहा कि बीबीसी यह स्वीकार करती है कि सरकार पर लगाए गए कुछ आरोप ग़लत थे. मगर उन्होंने कहा कि बीबीसी ने कभी भी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर पर झूठ बोलने का आरोप नहीं लगाया. सवाल गेविन डेविस ने रिपोर्ट जारी होने के एक घंटे के भीतर ही निदेशक मंडल की बैठक में अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी. अपने बयान में डेविस ने कहा है कि पिछले वर्षों में बीबीसी की तरफ़ से किसी ने भी जान-बूझकर जनता को गुमराह नहीं और किसी ने भी किसी को बदनाम करने के इरादे से कोई हरकत नहीं की. उन्होंने कहा,"मुझे ये सिखाया गया है कि आप अपना रेफ़री ख़ुद नहीं चुन सकते और रेफ़री जो भी फ़ैसला करता है वो अंतिम होता है". गेविन डेविस ने अपना इस्तीफ़ा देते हुए लॉर्ड हटन के निष्कर्ष पर सवाल भी उठाए और पूछा कि क्या सभी गवाहों पर ध्यान दिया गया है. साथ ही उन्होंने हटन आयोग में लिखित कुछ बातों का उल्लेख करते हुए ये भी पूछा कि कहीं उनसे ब्रिटेन में प्रेस की आज़ादी पर ख़तरा तो नहीं है. स्थिति प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के पूर्व सूचना सलाहकार एलेस्टर केम्पबेल ने कहा कि हटन रिपोर्ट दर्शाती है कि उन्होंने जो कुछ कहा सच कहा, प्रधानमंत्री ने भी सच बोला लेकिन बीबीसी में चेयरमैन से लेकर नीचे तक किसी ने सच नही बोला. बीबीसी के मीडिया मामलों के संवाददाता टोरिन डगलस का कहना है कि बीबीसी पहले ही यह मान चुकी थी कि उसकी आलोचना की जाएगी इसलिए कुछ नाकामियों के लिए वह पहले ही माफ़ी माँग चुकी थी. लेकिन हटन रिपोर्ट में बीबीसी के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स, प्रबंधन और संपादकीय मानकों की अपेक्षा से कुछ ज़्यादा ही तीखी आलोचना हुई है. बीबीसी टेलीविज़न के पूर्व प्रबंध निदेशक सर पॉल फॉक्स का कहना था कि बीबीसी पर लगाए गए ये आरोप पिछले 50 साल में सबसे ज़्यादा गंभीर हैं. त्रासदी बीबीसी महानिदेशक ग्रेग डाइक ने कहा कि डॉक्टर डेविड केली की मौत एक त्रासदी थी. महानिदेशक ने कहा कि पिछले आठ महीने के दौरान बीबीसी ने कभी भी प्रधानमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप नहीं लगाया है.
ग्रेग डाइक ने कहा कि डॉक्टर केली एक भरोसेमंद सूत्र थे बशर्ते कि उनके आरोपों को सही तरीक़े से रिपोर्ट किया जाता क्योंकि आधुनिक लोकतंत्र में आम लोगों को ऐसे विषयों के बारे में जानने का अधिकार है. ग्रेग डाइक ने कहा कि सरकारी दस्तावेज़ (डॉसियर) के बारे में बीबीसी की कवरेज का मुख्य उद्देश्य यही था कि आम लोगों को जानकारी दी जाए. उन्होंने कहा कि बीबीसी ने अपनी ख़ामियाँ दूर करने के लिए पहले ही कुछ क़दम उठाए हैं. बीबीसी और बदलावों के बारे में विचार कर रही है. |
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