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शेरॉन आ सकते हैं भ्रष्टाचार के घेरे में
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन और उनकी सरकार में उपप्रधानमंत्री पर रिश्वत के एक मामले में मुकदमा चलाने पर विचार हो रहा है. न्याय मंत्रालय का कहना है कि इस बारे में कुछ ही महीनों के अंदर फ़ैसला कर लिया जाएगा. ये मामला तब सामने आया है जब एक इसराइली व्यापारी पर शेरॉन, उनके उपप्रधानमंत्री और शेरॉन के एक पुत्र को लाखों डॉलर बतौर रिश्वत देने का आरोप लगा है. इसराइली नेता से पिछले साल पूछताछ हुई है मगर वह लगातार इस मामले से इनकार करते रहे हैं. यरूशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड चज़ान का कहना है कि इस व्यापारी डेविड ऐपेल के विरुद्ध लग रहे आरोप शेरॉन के लिए गंभीर मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं. अब इसराइली मीडिया में इस बात को लेकर अटकलें लग रही हैं कि क्या शेरॉन पर कोई मुकदमा चलाया जाएगा. बीबीसी संवाददाता के अनुसार चर्चा इस बात की भी है कि अगर मुकदमा चला तो क्या इसकी वजह से शेरॉन को पद भी छोड़ना होगा. ऐपेल पर आरोप हैं कि उन्होंने शेरॉन, उनके पुत्र गिलाड और उपप्रधानमंत्री एहुद ऑल्मार्ट को 1990 के दशक में यूनान की किसी संपत्ति के सौदे के एवज में रिश्वत देने की कोशिश की. बताया जा रहा है कि ऐपेल ने शेरॉन को दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी के नेतृत्व के लिए अभियान के दौरान भी मदद दी. इस्तीफ़े की माँग अभी तक इस मामले में शामिल होने को लेकर शेरॉन या ऑल्मार्ट की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. मगर विपक्षी सांसदों ने शेरॉन के इस्तीफ़े की माँग तेज़ कर दी है. पूर्व वित्त मंत्री और लेबर पार्टी के सदस्य अब्राहम शोचैट ने कहा, "प्रधानमंत्री को पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. बल्कि उन्हें तो अब तक इस्तीफ़ा दे भी देना चाहिए था. वह माहौल को गंदा कर रहे हैं." इससे पहले गिलाड और उनके भाई ओमरी पर दक्षिण अफ़्रीका के एक व्यापारी साइरिल कर्न से लगभग पंद्रह लाख डॉलर लिए. कर्न प्रधानमंत्री शेरॉन के मित्र भी हैं. विश्लेषकों का कहना है कि कर्न के मामले से यूँ तो सत्ता पर शेरॉन की पकड़ पर कोई असर नहीं पड़ेगा मगर इस नए मामले ने शेरॉन के लिए मुश्किलें ज़रूर खड़ी कर दी हैं. |
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