BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 09 जनवरी, 2004 को 21:23 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बाम में एक अरब डॉलर के ख़र्च का अनुमान
राहत संस्थाओं के प्रतिनिधि
40 से भी अधिक देशों की तरफ़ से राहत कार्य में सहायता दी जा रही है

ईरान में भूकंप से बुरी तरह तबाह होनेवाले शहर बाम को फिर से बनाने में एक अरब डॉलर का ख़र्च बैठ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में दानकर्ता देशों से ये कहा है.

ये रिपोर्ट जेनेवा में लगभग 50 देशों के प्रतिनिधियों को जारी की गई.

इस बीच शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी ने भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को फ़ोन कर राहत कार्य में भारत योगदान के लिए आभार प्रकट किया.

भारत बाम में भूकंप के बाद राहत कार्य में योगदान देनेवाले पहले देशों में से एक था.

 बाम के पुनर्निर्माण में कम-से-कम दो साल लगेंगे

एलिज़बेथ बायर्स, संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी

इसके पहले संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस ने कहा था कि अगले तीन महीनों में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए सात करोड़ तीस लाख डॉलर की ज़रूरत होगी.

ईरान में 25 दिसंबर को आए भूकंप से लगभग 30हज़ार लोग मारे गए थे और क़रीब एक लाख लोग बेघर हो गए थे.

अनुमान

भूकंप से लगभग एक लाख लोग बेघर हो चुके हैं
भूकंप से लगभग एक लाख लोग बेघर हो चुके हैं

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है शुरूआती अनुमानों से लगता है कि बाम को दोबारा बनाने की योजना में 70 करोड़ से एक अरब डॉलर के बीच का ख़र्च आएगा.

संयुक्त राष्ट्र में मानवीय सहायता के कार्यालय की प्रवक्ता एलिज़बेथ बायर्स ने कहा," बाम के पुनर्निर्माण में कम-से-कम दो साल लगेंगे."

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अकेले शहर की चिकित्सा व्यवस्था को दुरूस्त करने में तीन करोड़ डॉलर लगेंगे.

बाम में आधे से ज़्यादा स्वास्थ्य कर्मचारी भूकंप में मारे गए थे.

राहत कार्य

 लोग तंबूओं में लंबे समय तक नहीं रह सकते. बाम के लोगों की मुश्किल तो अभी शुरू ही हुई है.

जान एगलैंड

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उसने अभी तक भूकंप पीड़ितों के लिए सात करोड़ चालीस लाख डॉलर जुटा लिए हैं मगर उन्हें अभी और पैसा चाहिए.

बाम में संयुक्त राष्ट्र के एक कर्मचारी ने बीबीसी को बताया,”मैं आज तक ऐसे लोगों से नहीं मिला हूँ जिन्होंने अपने परिवार के इतने सारे लोगों को एक साथ खो दिया है.

कर्मचारी जान एगलैंड ने ने कहा,”लोग तंबूओं में लंबे समय तक नहीं रह सकते. हमें पानी चाहिए, निकासी व्यवस्था को दुरूस्त करना चाहिए और लोगों को कमाई का रास्ता बताना चाहिए. बाम के लोगों की मुश्किल तो अभी शुरू ही हुई है.

बाम में भूकंप के बाद से 40 से भी ज़्यादा देश वहाँ मदद भेज रहे हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>