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भविष्य में ईरान से बातचीत संभव: पॉवेल
अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि मौजूदा हालात में वे ईरान के साथ बेहतर संबंध की अपेक्षा रखते हैं और भविष्य में दोनों देशों के बीच बातचीत भी हो सकती है. अमरीका और ईरान के बीच राजनयिक संबंध 1979 में टूट गए थे. तब आंदोलनकारी ईरानी छात्रों ने तेहरान स्थिति अमरीकी दूतावास में अमरीकी नागरिकों को एक साल से भी ज़्यादा समय तक बंधक बनाए रखा. दो साल पहले तो अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ईरान का ज़िक्र उन देशों के साथ किया था जिन्हें वे 'दुष्टता की धुरी' कहते हैं. वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार को दिए इंटरव्यू में पॉवेल ने कहा कि ईरान के रुख़ में बदलाव देखा जा सकता है. ईरान ने न सिर्फ़ अपने परमाणु कार्यक्रमों के किसी भी समय निरीक्षण पर सहमति जताई है बल्कि अरब सरकारों के प्रति भी उसके रवैए में परिवर्तन आया है. हाल के भूकंप के बाद तो उसने अमरीका से राजनयिक संबंध न होने के बावजूद उसकी सीधी सहायता स्वीकार की. लेकिन पॉवेल ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के रुख़ में अभी पूरी तरह बदलाव नहीं आया है. उन्होंने ईरान में चरमपंथी गतिविधियों पर चिंता जताई. रुख़ में परिवर्तन अमरीका का आरोप है कि ईरान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का मकसद परमाणु हथियार विकसित करना है.
वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में पॉवेल ने कहा, " हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिनसे भविष्य में बातचीत की संभावना हो सकती है." उन्होंने ये भी कहा, "इन घटनाओं को मिलाकर देखा जाए तो पता चलता है कि ऐसे मामलों से निपटने में ईरान के रुख़ में बदलाव देखा जा सकता है. ईरान यह समझ गया है कि पूरी दुनिया की नज़र उस पर है और उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हो सकती है." ईरान के ऐतिहासिक बाम शहर में शुक्रवार को आए भूकंप में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और शहर पूरी तरह तबाह हो गया. इसके बाद अमरीकी विदेश मंत्रालय ने सहायता की पेशकश की जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मारे गए लोगों के रिश्तेदारों के प्रति सहानुभूति जताई. बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता बार्नबी मेसन का कहना है कि अमरीकी विदेश मंत्री ने इस मौक़े का लाभ उठाते हुए भविष्य में दोनों देशों के बीच बातचीत की उम्मीद व्यक्त की है. मेसन के अनुसार हाल के दिनों में ईरान के रुख़ में एक बड़ा बदलाव उस समय देखा गया जब ईरान ने अपने परमाणु ऊर्जा ठिकानों की संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों से जाँच को मंज़ूरी दे दी. चिंता लेकिन अमरीका अभी भी ईरान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है.
पॉवेल ने कहा, "हमें वहाँ चरमपंथी गतिविधियों पर चिंता है. हमें वहाँ अल क़ायदा को लेकर भी चिंता है." अमरीका चाहता है कि ईरान उसे बंदी बनाए गए अल क़ायदा संदिग्धों को सौंप दे और लेबनॉन और फ़लस्तीनी चरमपंथी गुटों की सहायता बंद करे. वैसे हाल के दिनों में लीबिया की घटनाओं से उत्साहित अमरीकी प्रशासन में एक गुट अब ईरान से संबंधों को लेकर भी कूटनीतिक कोशिशों की पहल को महत्व देने लगा है. मेसन का कहना है कि ईरान को लेकर अमरीकी प्रशासन बँटा हुआ है. उनका कहना है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के संबंधों में गर्माहट के संकेतों को इस बात की गारंटी नहीं माननी चाहिए कि मामला फिर पटरी से नहीं उतर सकता. |
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