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सद्दाम की गिरफ़्तारी पर मीडिया की राय
दुनिया भर के अख़बारों के पहले पन्ने की सोमवार की सुर्ख़ियाँ सद्दाम हुसैन की गिरफ़्तारी की ख़बरें ही थीं. लंदन से प्रकाशित होने वाले इंडिपेंडेंट का शीर्षक है-तानाशाह बंदी बना. गार्डियन लिखता है-विजयी अमरीका ने घोषणा की, 'हम ने उसे पकड़ लिया'. टाइम्स ने सद्दाम के बड़े से चित्र के साथ बस इतनी ही लिखा है-सद्दाम पकड़े गए. भारत के भी सभी अख़बारों ने इसी ख़बर को अपनी पहली ख़बर बनाया है. हिंदू लिखता है-सद्दाम के पकड़े जाने के बाद अब ध्यान ओसामा बिन लादेन पर. टाइम्स ऑफ़ इंडिया का कहना है-परिवार के सदस्य ने सद्दाम को धोखा दिया. हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है-सद्दाम इंदिरा के प्रशंसक थे और भारत का आदर करते थे. यरुशलम से बीबीसी की बार्बरा प्लैट लिखती हैं कि इसराइली अख़बारों ने इस ख़बर को काफ़ी प्रमुखता दी है. कई अख़बारों ने सद्दाम की बड़ी-बड़ी तस्वीरें छापी थीं और शीर्षक दिए थे-हम ने उसे पकड़ ही लिया. फ़लस्तीनी मीडिया काफ़ी तटस्थ रहा. उसने गिरफ़्तारी की ख़बर दी लेकिन टिप्पणियाँ करने से गुरेज़ किया. अरब टेलीविज़न मीडिया की भी अलग-अलग प्रतिक्रियाँ रहीं. अलजज़ीरा का कहना था इराक़ियों ने सद्दाम के पकड़े जाने पर जश्न मनाए...बुश का कहना है सद्दाम का पकड़ा जाना हिंसा का अंत नहीं है... अल अरबिया टीवी ने रम्सफ़ेल्ड के इस बयान को प्रमुखता से लिया कि सद्दाम को युद्धबंदी का दर्जा दिया जाएगा. अल-आलम टेलीविज़न ने इराक़ी शासकीय परिषद के अध्यक्ष अल-हाकिम को यह कहते बताया कि सद्दाम पर मुक़दमा इराक़ में चलना चाहिए. |
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