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'ज़िम्बाब्वे मसले पर अभी तक समझौता नहीं'
ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के एक प्रवक्ता ने कहा है कि राष्ट्रमंडल से ज़िम्बाब्वे के निलंबन के मसले पर विचार कर रहा छह देशों का दल अभी तक किसी समझौते पर नहीं पहुँचा है. उन्होने कहा कि छह देशों में से एक दक्षिण अफ़्रीका इस बात पर अड़ा हुआ है कि ज़िम्बाब्वे पर लगा प्रतिबंध उठा लेना चाहिए. प्रवक्ता के अनुसार ब्रितानी प्रधानमंत्री इस बात से काफ़ी निराश हैं कि सम्मेलन में ज़िम्बाब्वे का मसला ही छाया रहा. लेकिन उनका अब भी यही मानना है कि जिन वजहों से उसका निलंबन हुआ था वे कारण अभी बरक़रार हैं. उन्होंने कहा कि वह इस मसले पर बातचीत के लिए अभी नाइजीरिया में ही रहेंगे. उम्मीद की जा रही है कि अभी दल की बैठक एक बार फिर होगी. राष्ट्रमंडल देशों की बैठक में सभी को इन छह देशों के दल की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतज़ार है. छह देशों की उस समिति में भारत भी शामिल है. इस समिति में भारत के अलावा अन्य सदस्य हैं- ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका, जमैका, मोज़ांबिक और कनाडा. ज़िम्बाब्वे को लेकर आस्ट्रेलिया और कनाडा का रुख़ पहले से ही स्पष्ट रहा है.
इन देशों का कहना है कि जब तक वहाँ लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार नज़र नहीं आता तब तक निलंबन वापस नहीं लिया जाना चाहिए. दक्षिण अफ़्रीका और मोज़ांबिक का कहना है कि इससे ज़िम्बाब्वे के राजनीतिक सुधार कार्यक्रम में बाधा पड़ रही है. ज़िम्बाब्वे के निलंबन के बारे में भारत के विदेश सचिव शशांक ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सभी बातों को ध्यान में रखना होगा और ख़ासकर जिम्बाब्वे के पड़ोसी देशों के विचारों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती है. वाजपेयी के कार्यक्रम इधर,अपनी नाइजीरिया यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ब्लेयर से भी मुलाक़ात की. इस बातचीत का कोई पूर्व निर्धारित एजेंडा नहीं था लेकिन बातचीत के दौरान इराक़ और मध्यपूर्व की स्थिति पर चर्चा हुई. टोनी ब्लेयर ने भारत और पाकिस्तान के मामले में भारत की पहल की प्रशंसा की और वाजपेयी को बधाई दी. इसके अलावा प्रधानमंत्री वाजपेयी ने थोड़ा समय अबुजा में रह रहे भारतीयों के लिए भी निकाला. उन्होंने राजधानी अबुजा में नए भारतीय उच्चायोग का शिलान्यास किया जहाँ अनेक भारतीय उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. पिछले चालीस वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ये पहली नाइजीरिया यात्रा है. भारत से कोसों दूर नाइजीरिया में रह रहे भारतीय स्वयं को कटा सा महसूस करते है. ऐसे में ज़ाहिर हैं लोगों को प्रधानमंत्री वाजपेयी से शिकायत भी थी कि आख़िर उनकी याद इतनी देर से क्यों आई. इस मौक़े पर भारत-नाइजीरिया सीधी विमान सेवा को शुरु करने की भी घोषणा की गई. अफ़्रीकी महाद्वीप में नाइजीरिया भारत का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है. |
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