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यूरोपीय संघ में रक्षा पर सहमति के संकेत
ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के बीच यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अनौपचारिक सहमति हो गई हैं. फ्रांसीसी और ब्रितानी कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि तीनों देश अपने अन्य यूरोपीय सहयोगियों के सामने इस संबंध में प्रस्ताव रखने वाले हैं. इसमें रक्षा सहयोग और यूरोपीय सेना के मुख्यालय का प्रस्ताव भी शामिल है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका इसमें बाधा खड़ी कर सकता है. माना जा रहा है कि अमरीका ऐसे किसी भी क़दम से नाख़ुश हो सकता है जो नैटो के असर को कम करता हो. यूरोपीय संघ की बैठक के दौरान फ़्रांस के विदेश मंत्री डोमिनिक विलेपां ने कहा कि संयुक्त रक्षा योजना यूरोप के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने फ़्रांसीसी रेडियो से बातचीत में कहा," ये प्रमुख मुद्दा है. इसके बिना यूरोप नहीं रह सकता है." ब्रितानी अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में एक सहमति हुई है लेकिन ये कोई "औपचौरिक हल" नहीं है. उनका कहना था कि ये आधिकारिक एजेंडे में तो शामिल नहीं है लेकिन इसे अन्य प्रतिनिधियों के सामने रखा जाएगा. मार्च में यूरोपीय संघ ने मैसीडोनिया में पहला शांति अभियान चलाया था. इसके अलावा कांगो गणराज्य में फ़्रांस के नेतृत्व में सेनाएँ भेजी गईं थीं. ऐसी ख़बरें हैं कि अमरीका यूरोपीय सेना मुख्यालय बनाए जाने की बात से नाख़ुश है. यूरोपीय संविधान यूरोपीय संघ के देश यूरोपीय संविधान पर भी चर्चा कर रहे हैं.
लेकिन कई सदस्य देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले में कोई हड़बड़ी नहीं चाहते हैं. उनका कहना है कि यूरोपीय संघ का पहला संविधान अपने आपमें महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामला है. मतभेद का एक प्रमुख मुद्दा है- यूरोपीय संघ में किसके पास कितनी शक्ति होगी और कौन सबसे प्रभावशाली देश होगा. छोटे देशों को डर है कि उनकी आवाज़ बड़े और प्रभावशाली देशों के बीच दब न जाए. |
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