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ताइवान के विधेयक से चीन सशंकित
ताइवान में जनमत संग्रह से जुड़ा विधेयक संसद में पारित होने के बाद चीन ने आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे 'मुश्किलों से भरा' बताया है. शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने कहा कि विधेयक उन लोगों के फ़ायदे में हो सकता है जो चीन से स्वतंत्रता चाहते हैं. नए विधेयक के बाद राष्ट्रपति को अधिकार मिल गया है कि अगर कोई बाहरी आक्रमण होता है तो वह स्वतंत्रता के बारे में मतदान कराने का फ़ैसला ले लें. मगर जो विधेयक पारित हुआ है वह मूल विधेयक से काफ़ी अलग है और अब किसी दूसरे हालात में स्वतंत्रता के बारे में विधेयक पारित नहीं किया जा सकेगा. चीन ने धमकी दी थी कि अगर ताइवान ने स्वतंत्रता की ओर बढ़ने की कोशिश की तो वह कार्रवाई कर सकता है. चीन को डर है कि अगर जनमत संग्रह की प्रणाली ताइवान में स्थापित हो गई तो इसके बाद स्वतंत्रता के बारे में मतदान कराने के लिए इसका इस्तेमाल हो सकता है. 'अलगाववाद की संभावना बाक़ी' मगर ताइवान के प्रमुख विपक्षी गठबंधन ने एक ऐसा अंश विधेयक में जोड़ा जिसकी वजह से संवेदनशील मुद्दों पर जनमत संग्रह नहीं कराया जा सकता. वैसे चीन में सरकार के समर्थन प्राप्त अख़बार चाइना डेली ने चेतावनी दी है कि इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद कुछ चरमपंथी संगठनों को एक तरह टाइम बम मिल गया है. शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक़ विधेयक के कुछ अनुच्छेदों में अभी भी ऐसी संभावना है जिससे ताइवान में स्वतंत्रता समर्थक बलों को अलगाववादी गतिविधियाँ चलाने में मदद मिले. विपक्ष एक ऐसा अनुच्छेद भी इस विधेयक में जुड़वाने में क़ामयाब हुआ है जिसके बाद जनमत संग्रह करवाने का अधिकार सिर्फ़ जनता और संसद को होगा. राष्ट्रपति चेन शुई बियान चाहते थे कि ये अधिकार सरकार को भी मिल जाएँ. |
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