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ताइवान में जनमत संग्रह को मंज़ूरी
ताइवान की संसद ने एक विधेयक पारित किया है जिसके आधार पर संविधान और चीन के साथ उसके रिश्तों पर जनमत संग्रह हो सकेगा. चीन को डर है कि इसके बाद एक दिन ऐसा भी आएगा जब ताइवान औपचारिक स्वतंत्रता की घोषणा भी कर सकता है. माना जा रहा है कि इस विधेयक के पारित होने के बाद विभिन्न विवादास्पद मुद्दों पर जनता के मत से फ़ैसला हो सकेगा. उल्लेनीय है कि चीन तो ताइवान को अपना हिस्सा मानता है लेकिन ताइवान इससे इंकार करता है और वहाँ लंबे समय से आज़ादी की मांग हो रही है. इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद चीन ने ताइवान के राष्ट्रपति चेन शुई बियान को 'समस्या पैदा करने वाला' कहा है और चेतावनी दी है कि चेन ताइवान के लिए त्रासदी को आमंत्रण दे रहे हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब चीन के प्रधानमंत्री वेन जिबाओ अगले महीने अपनी वॉशिंगटन यात्रा के दौरान संयुक्त राष्ट्र से अपील कर सकते हैं कि वह ताइवान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे. चीन का डर और धमकी चीन की धमकी है कि अगर ताइवान ने स्वतंत्रता की घोषणा की तो वह हमला भी कर सकता है. पिछले ही सप्ताह चीन ने चेतावनी दी थी कि ताइवान के 'अलगाववादी' युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं. चीन ताइवान को अपना ही एक अलग हुआ हिस्सा मानता है. चीन के नेतृत्व को डर है कि अगर जनमत संग्रह का प्रणाली स्थापित हो गई तो इसके बाद स्वतंत्रता के मसले पर भी मतदान हो सकता है. ताइवान के राष्ट्रपति चेन शुइ-बियान ने अगले साल मार्च में होने वाले चुनाव में फिर से जीत हासिल करने के लिए जनमत संग्रह को अभियान में सबसे ऊपर जगह दी है. उन्होंने वायदा किया है कि तीन साल के भीतर ही नए संविधान पर जनमत संग्रह करवाया जाएगा. मुख्य विपक्षी पार्टी केएमटी ने जनमत संग्रह के विरोध का फ़ैसला बुधवार को छोड़ दिया. बीबीसी के क्रिस हॉग का कहना है कि पार्टी को ये लगा कि उसकी इन नीतियों की वजह से मतदाता उससे दूर हो सकते हैं. इसी के बाद विधेयक आसानी से पारित हो सका है. |
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