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मंगलवार, 21 अक्तूबर, 2003 को 13:21 GMT तक के समाचार
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क्या है उत्तरी आयरलैंड की समस्या?
यूनियनिस्ट नेता डेविड ट्रिंबल और शिन फ़ेन नेता जैरी एडम्ज़
शिन फ़ेन ने यूनियनिस्ट नेता डेविड ट्रिंबल समते अन्य नेताओं से अपील की है

उत्तरी आयरलैंड की समस्या की जड़ें इतिहास के गर्भ में छिपी हैं. मौजूदा समस्या का अस्तित्व 1920-21 में आया जब कई शताब्दियों तक ब्रिटेन के शासन में रहने के बाद आयरलैंड का बँटवारा किया गया.

यह बँटवारा इस तरह किया गया कि ब्रिटेन के साथ रहने वाले आयरलैंड में, यानी उत्तरी आयरलैंड में इसाइयों के प्रोटेस्टेंट समुदाय के लोगों का बहुमत रहे. अलग देश बने आयरलैंड गणराज्य में कैथोलिक समुदाय का बहुमत रहा.

मौजूदा समस्या यह है कि उत्तरी आयरलैंड में रहने वाले अल्पसंख्यक कैथोलिक समुदाय के लोग उत्तरी आयरलैंड को आयरलैंड गणराज्य में मिलाना चाहते हैं, इन लोगों को नेशनलिस्ट कहा जाता है.

जबकि बहुसंख्यक प्रोटेस्टेंट समुदाय के लोग उत्तरी आयरलैंड का ब्रिटेन में ही बनाए रखना चाहते हैं जिन्हें यूनियनिस्ट कहा जाता है.

समस्या की शुरुआत

कई शताब्दियों तक ब्रिटेन के शासन में रहने के बाद आयरलैंड में 1916 में विद्रोह हुआ. इसके बाद 1920-21 में आयरलैंड का बंटवारा किया गया.

आयरलैंड की 32 में 26 काउंटियों को स्वतंत्रता मिली और इस तरह आयरलैंड गणराज्य बना. बाकी छह काउंटी अब भी बतौर उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन का हिस्सा हैं.

वैसे यूनाइटेड किंगडम संसद ने 1920 में बेलफ़ास्ट में स्टॉरमांट में बनाई गई संसद और सरकार को ज़्यादातर मामलों में अधिकार दे दिए.

1921 से 1972 तक उत्तरी आयरलैंड से वेस्टमिनस्टर संसद में सदस्य चुने जाते रहे. लेकिन स्टॉरमांट स्थित सरकार स्वशासी सरकार के रुप में काम करती रही.

उत्तरी आयरलैंड में अधिकार यूनियनिस्ट पार्टी के हाथों में रहे. यह पार्टी उन लोगों की है जो ब्रिटेन का हिस्सा बने रहने चाहते हैं.

दूसरी तरफ़ हैं नेशनलिस्ट समुदाय जिसकी तादाद क़रीब एक तिहाई है. यह समुदाय आयरिश एकता की वक़ालत करता है और चाहता है कि समूचे आयरलैंड को एक अलग देश का दर्जा मिले.

लेकिन आयरलैंड समस्या की शुरुआत क़रीब 800 साल पहले हुई थी. तब ब्रिटेन ने अपने पड़ोसी द्वीप को कब्ज़े में लेने का फ़ैसला किया था. पिछले 800 साल में ब्रिटेन को आयरलैंड से हटाने की और आयरलैंड को ब्रिटिश बनाने की यानी दोनों तरह की कोशिशें हुईं.

हिंसा का दौर

1969 में उत्तरी आयरलैंड में नागरिक अधिकारों के लिए अभियान शुरु हुआ. यह आरोप लगाए गए कि वहाँ अल्पसंख्यक कैथोलिक समुदाय दोयम दर्जे की ज़िंदगी जीने पर मजबूर है.

लेकिन जल्दी ही इस अभियान को दबा दिया गया. इसके बाद शुरुआत हुई राजनीतिक हिंसा की और इस तरह प्रोविजनल आयरिश रिपब्लिकन आर्मी का अस्तित्व सामने आया.

आईआरए ने ब्रिटेन की मौजूदगी के ख़िलाफ़ हिंसक अभियान शुरु किया. यह अभियान 1994 में आईआरए के युद्वविराम के एलान तक चला.

उत्तरी आयरलैंड में 1970 से शुरु हुए हिंसा के दौर के बाद उत्तरी आयरलैंड संसद स्थगित कर दी गई और ब्रिटेन सरकार ने उत्तर आयरलैंड सरकार के सारे काम और अधिकार अपने हाथ में ले लिए.

इसके बाद से ही उत्तरी आयरलैंड का सारा कामकाज उत्तरी आयरलैंड मामलों का एक मंत्री करता है जो ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य है.

ब्रिटेन सरकार का यह नियंत्रण 1998 तक चला जब उत्तरी आयरलैंड के भविष्य के लिए एक समझौता किया गया. इस समझौते को गुड फ़्राइडे या बेलफ़ास्ट समझौते का नाम दिया गया.

गुड फ़्राइडे समझौता

बातचीत के आरंभिक दौर के बाद 10 अप्रैल 1998 शुक्रवार को एक राजनीतिक समझौते पर आयरलैंड और ब्रिटेन की सरकारों ने दस्तख़त किए.

इसे गुड फ़्राइडे या बेलफ़ास्ट समझौते का नाम दिया गया. इस समझौते में संवैधानिक बदलाव और नए संस्थानों की स्थापना पर सहमति हुई.

इस समझौते के तीन प्रमुख हिस्से हैं. पहले हिस्से में उत्तरी आयरलैंड की आंतरिक संरचना पर ज़ोर दिया गया.

दूसरे हिस्से में उत्तरी आयरलैंड के रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड से रिश्तों और तीसरे में उत्तरी आयरलैंड के ब्रिटेन से रिश्तों पर प्रकाश डाला गया है.

इसमें संवैधानिक मुद्दों, अधिकारों, हथियारों पर रोक, सुरक्षा, नीतियों और क़ैदियों के बारे में विस्तार से बताया गया है.

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