तस्वीरों में उज्जैन का 'किन्नर अखाड़ा'

उज्जैन महाकुंभ में पहली बार किन्नर अखाड़े की पेशवाई निकाली गई.

किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, सिंहस्थ महाकुंभ आरंभ होने के एक दिन पहले उज्जैन के दशहरा मैदान से किन्नर अखाड़े की पेशवाई निकाली गई. इसकी अगवानी किन्नर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और सनातन गुरु अजय दास ने की. लक्ष्मी टीवी कलाकार, भरतनाट्यम नृत्यांगना व सामाजिक कार्यकर्ता हैं और किन्नरों के अधिकार के लिए काम करती हैं. (सभी तस्वीरें: प्रीति मान)
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, इस पेशवाई को देखने के लिए उम्मीद से ज़्यादा भीड़ जुट गई. लोग किन्नरों का आशीर्वाद लेने के लिए घंटों कड़ी धूप में खड़े रहकर इंतजार करते रहे.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, पेशवाई के पहले तैयार होता हुआ किन्नर. 'किन्नर' पेशवाई को लेकर किन्नरों में ख़ासा उत्साह था. यह पहला किन्नर अखाड़ा है, जिसने महाकुंभ में शिरक़त की है.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, उज्जैन कुंभ में पहली बार शामिल होने वाले किन्नर अखाड़े के लिए यह बहुत गर्व की बात है और इसका श्रेय वे सनातन गुरु अजय दास को देते हैं.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, इस पेशवाई में कोई भव्य आयोजन या शक्ति प्रदर्शन नहीं किया गया. ई-रिक्शा पर तिरंगे झंडे के साथ अखाड़े के पीठेश्वर और उपपीठेश्वर सहित देश के कई किन्नरों ने इस पेशवाई में शिरकत की.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, 13 प्रमुख अखाड़ों की संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने पहले किन्नर अखाड़े को मान्यता देने से इनकार कर दिया था. विरोध के बावजूद किन्नर अखाड़े ने यह कहते हुए इस महाकुंभ में शिरकत की कि उन्हें शिव की नगरी में किसी मान्यता की ज़रूरत नहीं है.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, इस किन्नर अखाड़े का हिस्सा बनने के लिए देश के हर इलाके से किन्नर आए.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, किन्नर पवित्रा निम्बोलकर, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की चेली हैं और वो मुस्तैदी से अखाड़े की सुरक्षा के में लगी रहीं.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, लक्ष्मी बताती हैं किन्नरों के अस्तित्व को समाज ने लंबे समय से अनदेखा किया है, अपना खोया वजूद पाने और समाज में किन्नरों के सम्मानजनक जगह दिलाने के लिए उन्होंने इस अखाड़े की स्थापना की है.
किन्नरों के अखाड़े की पेशवाई
इमेज कैप्शन, उनका कहना है कि किन्नरों की शिक्षा और रोज़गार के लिए भी पहल की ज़रूरत है, जिससे वो भी सम्मान के साथ जी सकें.