इन्हें पीने का पानी चाहिए!

लातूर के सूखाग्रस्त मंजारा नदी से पानी निकालने के लिए दिन-रात खुदाई चल रही है.

बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, दिन-रात एक कर सूखे मंजारा नदी को खोदकर पानी निकालने का काम जारी है. फिलहाल इसमें से थोड़ा सा ही पानी निकला है. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, 50 दिनों के लिए मंजारा नदी की खुदाई करने के लिए स्थानीय लोगों ने 3 करोड़ रुपये दिए हैं. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, लातूर में पानी की तलाश में अकेले भटक रहे हैं लोग. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, अपने घर के सामने बड़े-बड़े ड्रमों के सामने दो लड़कियां पानी के टैंकरों का इंतज़ार कर रही हैं. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, सूखाग्रस्त लातूर में घरों के बाहर ड्रम रखे गए हैं जिनको पानी के टैंकरों के आने के बाद भरा जाता है. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, 90 साल पहले बनाए गए इन कुओं में मंजारा नदी से पानी भरा जाता था. अब ये सभी कुएं सूखे पड़े हैं. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, पानी से भरी ट्रेन से 22 हज़ार लीटर टैंकर में भरा जा रहा है जिसे लातूर के ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाया जाएगा. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, एक हफ्ते के लंबे इंतज़ार के बाद लातूर के एक परिवार को 200 लीटर पीने का पानी मिला. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, चार महीने पहले लातूर के इस स्वीमिंग पूल को प्रशासन ने पानी की किल्लत के कारण बंद कर दिया. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)
बूंद-बूंद को तरसती ज़िन्दगी
इमेज कैप्शन, साइकिल में 20 कंटेनर्स के साथ पीने का पानी लेने पहुंचा एक आदमी. (तस्वीरें: सौतिक बिश्वास)