काम की तलाश में शहरों की ओर रुख कर गए लोगों के गांव की तस्वीरें.
इमेज कैप्शन, दक्षिणी जापान के नागोरो गांव से काम काज की तलाश में लोगों ने शहरों का रुख कर लिया. आज यहां बहुत कम लोग रह गए हैं, उनमें से ज्यादातर पेंशनभोगी हैं.
इमेज कैप्शन, अगर इस गांव में कोई पहली बार आएगा तो पल भर के लिए चौंक जीएगा. उसे लग सकता है कि इस गांव में कितनी चहल पहल है. चमकीले कपड़े पहने चेहरे दुकानों के बाहर या फिर बस स्टॉप पर बस का इंतजार करते दिख जाएंगे. उस बस का जो कभी नहीं आएगी.
इमेज कैप्शन, लेकिन ये चेहरे लोगों के नहीं हैं, ये काक भगोड़े हैं. सुकीमी एयानो ने अपना पहला काक भगोड़ा 13 साल पहले अपने बगीचे में चिड़ियों को डराने के लिए बनाया था कि वे बीज न चुग लें. आदमकद आकार वाले इस काक भगोड़े का चेहरा सुकीमी एयानो के पिता से मिलता जुलता था और इसी ने उन्हें और भी काक भगोड़े बनाने के लिए प्रेरित किया.
इमेज कैप्शन, आज सुकीमी के गांव में उनके बनाए लगभग 150 काक भगोड़े रहते हैं. ये काक भगोड़े उन्होंने हाथों से सिलकर बनाए हैं. नागोरो की तरह जापान के ग्रामीण इलाकों में ऐसे कई गांव हैं जिन्हें पलायन के सवाल से बड़े पैमाने पर जूझना पड़ रहा है.
इमेज कैप्शन, इन गांवों के नौजवान शहरों की ओर रुख कर गए हैं और बड़े बुजुर्ग यहां पीछे छूट गए हैं. इन गांवों के बूढ़े हो रहे लोगों का समुदाय पूरे देश की एक छोटी सी तस्वीर पेश करता है. इस देश की आबादी गिर रही है. एक अनुमान के मुताबिक 2060 तक जापान की मौजूदा आबादी 12 करोड़ 70 लाख से गिरकर आठ करोड़ 70 लाख रह जाएगी.
इमेज कैप्शन, 65 साल की एयानो नागोरो गांव की सबसे युवा निवासी हैं. इस गांव का स्कूल 2012 में बंद कर दिया गया था, इसके बाद यहां के केवल दो ही छात्रों ने ग्रैजुएशन किया है. काक भगोड़ा छात्र अब इन क्लास रूम में बैठते हैं और स्कूल के गलियारों में खामोशी के साथ मटरगश्ती करते हैं.