दिल्ली के बीचोंबीच शाहपुर जाट गांव की हर दीवार कुछ कहती है.
इमेज कैप्शन, दिल्ली में शाहपुर जाट गांव अपने ग्रैफ़िटी आर्ट के लिए पहचान रखता है. गांव के कई लोगों का मानना है कि इन रंग-बिरंगी पेंटिंग्स ने उनके गांव को एक नई पहचान दिलाई है.
इमेज कैप्शन, गांव की लगभग हर गली की दीवारों पर ग्रैफ़िटी देखी जा सकती है. बाहर के लोग इन्हें देखने यहां आते हैं.
इमेज कैप्शन, चाहे जितना पुराना घर हो उस पर बनी ग्रैफ़िटी उसे ख़ास बना देती है.
इमेज कैप्शन, माना जाता है कि ग्रैफ़िटी की शुरुआत 1960 में अमरीका के न्यूयॉर्क शहर से हुई थी जिसका मुख्य उद्देश्य हिप-हॉप कल्चर को लोगों के बीच पहुंचाना था.
इमेज कैप्शन, तस्वीर में दिख रही ग्रैफ़िटी में एक फ़ोटोग्राफ़र को दिखाया गया है. ग्रैफ़िटी के ज़रिए अक्सर सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार किया जाता है.
इमेज कैप्शन, ग्रैफ़िटी गांव वालों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है. हालांकि ज़्यादातर गांववाले इन्हें दीवारों पर चित्रकारी ही समझते हैं.
इमेज कैप्शन, गांव में ग्रैफ़िटी को ख़ास बनाया एक स्ट्रीट आर्ट फ़ेस्टिवल ने. इस साल जनवरी में दुनिया भर से स्ट्रीट आर्टिस्ट यहां जुटे थे.
इमेज कैप्शन, यहां चित्रों में हर किस्म की कल्पना को ग्रैफ़िटी के माध्यम से दिखाया गया है. इसमें काफ़ी महंगे रंगों का इस्तेमाल होता है.
इमेज कैप्शन, यूरोप के कई शहरों में भी ग्रैफ़िटी प्रचलित है. विश्व के कई प्रचलित ग्रैफ़िटी आर्टिस्ट इसका प्रयोग विरोध की कला के रूप में करते हैं.
इमेज कैप्शन, कई बार ग्रैफ़िटी आर्टिस्ट गुमनाम रहकर ही काम करते हैं. भारत में पिछले कुछ सालों में इस कला का काफ़ी प्रचार-प्रसार हुआ है. (सभी तस्वीरें और कैप्शन - अंकित पाण्डेय)