जिनकी कूची पर 'फ़िदा' थी दुनिया

भारत के पिकासो कहलाये जाने वाले पेंटर एमएफ़ हुसैन की आज 100वीं वर्षगांठ है. उनके पासपोर्ट के मुताबिक़ उनका जन्म 17 सितम्बर 1913 को हुआ था. हुसैन ने 30000 से भी ज़्यादा पेंटिंग बनाईं. चलते हैं हुसैन की आर्ट गैलरी में.

एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, साल 1913 में जन्मे मक़बूल फ़िदा हुसैन भारत के सबसे मशहूर पेंटरों में से एक थे. भारत के पिकासो के नाम से भी मशहूर हुसैन ने 1929 में पेंट ब्रश को अपना दोस्त बना लिया था . ब्रिटिश राज में भारत के ग़ुलामी के दिनों की ये तस्वीर हुसैन की 'राज सीरीज़' का हिस्सा थी. सभी तस्वीरें साभार इंस्टीट्यूट ऑफ़ कंटेम्प्ररी आर्ट्स, मुंबई.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, यूं तो हुसैन ने अलग-अलग विषयों पर पेंटिंग बनाईं लेकिन घोड़ों को कैनवास पर उतारना उनका ट्रेडमार्क माना जाता है. सन 2000 के दौर में हुसैन साहब ने कई तरह के घोड़े पेंट किए. हुसैन ने इन चित्रों के लिए ऐक्रेलिक पेंट छोड़ आयल पेंट्स का प्रयोग किया. उनकी कला के देश-विदेश में क़द्रदान थे और नीलामियों में उनकी पेंटिंग्स लाखों रुपयों में बिकती थी.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, हुसैन की जन्म शताब्दी के मौक़े पर मुंबई की इंस्टीट्यूट ऑफ़ कंटेम्प्ररी आर्ट्स, आसीआईए, में 26 सितंबर से नौ अक्तूबर तक उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लग रही है. वॉटरकलर से बनाई इस पेंटिंग को हुसैन ने 'वुमन' का नाम दिया.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, साल 1986 में हुसैन को राज्य सभा के लिए मनोनीत किया गया. सदन में भी उनका पेंट ब्रश और चारकोल उनका साथी रहा. इसकी बानगी मिलती है इस तस्वीर में जो भारत पाकिस्तान के बीच होने वाली श्रृंखला पर बनाई गई.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, हुसैन ने कभी किसी आर्ट स्कूल में दाख़िला नहीं लिया. उनके पेंटिंग बनाने का ढंग, ब्रश पकड़ने का स्टाइल और ब्रश को कैनवस पर फेरने का तरीक़ा- ये सब उन्होंने ख़ुद इजाद किए.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, सन 2009 के आज़ादी दिवस पर हुसैन की इस पेंटिंग में उन्होंने भारत की आज़ाद महिला का विवरण किया है.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, हिंदू देवी-देवताओं और 'भारतमाता' की अपनी पेंटिंग्स के लिए हुसैन को कई बार कट्टरपंथियों का निशाना भी बने.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, पचास के दौर में बनी ये पेंटिंग है 'सवारी'. एमएफ़ हुसैन को इस पेंटिंग की प्रेरणा उनकी पहली बेटी के जन्म से मिली. इस पेंटिंग को हुसैन ने फोक थीम दी है जिसमे काफ़ी रंगों का इस्तेमाल किया गया है.
पेंटर एमएफ़ हुसैन
इमेज कैप्शन, अपने शुरुआती दिनों में एमएफ़ हुसैन जब मुंबई पहुंचे तो वहां वे फ़िल्मों के पोस्टर पेंट किया करते थे. हुसैन चाहते थे की हर आर्ट प्रेमी के पास उनकी एक न एक तस्वीर ज़रूर हो .
पेंटर एमएफ़ हुसैन
इमेज कैप्शन, हुसैन को नंगे पैर घूमने में बड़ा मज़ा आता था और एक समय ऐसा आया कि उन्होंने जूते पहनना ही छोड़ दिया. कहा जाता है कि ऐसे ही नंगे पैर एक बार जब वे एक बड़े होटल पहुंचे तो वहां के दरबान ने होटल में घुसने से मना कर दिया था.
एमएफ़ हुसैन की पेंटिंग
इमेज कैप्शन, कुछ-कुछ रोदें के द थिंकर की तर्ज़ पर बनी ये पेंटिंग हुसैन का सेल्फ़ पोट्रेट है जिसे उन्होंने 90 के दशक में पेंट किया था.
पेंटर एमएफ़ हुसैन
इमेज कैप्शन, विवादों के चलते एमएफ़ हुसैन साल 2006 में भारत छोड़ कर क़तर चले गए जहां 2010 में उन्हें क़तरी नागरिकता मिली. स्वनिर्वासन का समय हुसैन ने क़तर और लंदन में बिताया. उनकी मृत्यु 9 जून 2011 में लंदन में हुई.