भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने गुरुवार को ताशकंद
में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी से मुलाक़ात कर युद्धग्रस्त देश से अमेरिकी
सैनिकों की वापसी के बाद वहाँ तेज़ी से बिगड़ रही स्थिति पर बात की.
ग़नी से मुलाक़ात के बाद जयशंकर ने कहा कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान
में शांति, स्थिरता और विकास के प्रति भारत का पूरा समर्थन होने की बात को दोहराया.
बताया गया है कि ये मुलाक़ात एक बहुपक्षीय सम्मेलन से अलग हुई.
विदेश मंत्री ने इस मुलाक़ात के बाद ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्रपति
अशरफ़ ग़नी से मुलाक़ात कर प्रसन्न हूँ. अफ़ग़ानिस्तान के भीतर और आसपास की मौजूदा स्थिति
पर उनसे चर्चा की.अफ़ग़ानिस्तान में शांति, स्थिरता और विकास के प्रति हमने अपना समर्थन दोहराया.’’
इस मुलाक़ात के बाद, अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिन्दू’ ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा कि “ग़नी सरकार अफ़ग़ानिस्तान नेशनल डिफ़ेंस एंड सिक्योरिटी फ़ोर्सेज़ (एएनडीएसएफ़) की सैन्य रणनीति की समीक्षा कर रही है, जिसमें तालिबान से डील करने को लेकर आने वाले समय में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि मौजूदा रणनीति के तहत तालिबान ने पिछले कुछ हफ़्तों में लगातार बढ़त बनाई है.”
भारत द्वारा अपने कर्मचारियों को अफ़ग़ानिस्तान से वापस बुलाये जाने के बाद, दोनों देशों के बीच ये पहली उच्चस्तरीय बैठक थी.
कुछ दिन पहले ही कंधार के अपने वाणिज्यिक दूतावास से भारत ने सभी कर्मचारियों को वापस बुला लिया था.
हालांकि, ये कहा जाता रहा है कि प्रमुख शहरों पर अभी भी तालिबान कब्ज़ा नहीं कर पाया है, लेकिन कंधार जैसे शहरों पर, जहाँ पहले उसका आधिकारिक बेस रह चुका है, वहाँ वो लगातार कब्ज़े की कोशिशें कर रहा है.
अफ़ग़ान अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ग़नी कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को तालिबान से वापस छीन लेना चाहते हैं और वे इसके लिए सभी प्रयास करने को तैयार हैं.
ग़नी के कार्यालय ने कहा कि जयशंकर ने उन्हें बताया कि भारत अफ़ग़ानिस्तान को मानवीय मदद जारी रखेगा और उसे 1,50,000 टन गेहूँ भेजेगा.
विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान का समर्थन करने के लिए क्षेत्रीय सहमति को मज़बूत बनाने के लिए काम करता रहेगा.
गुरुवार को जयशंकर ने अमेरिकी उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एलिज़ाबेथ शेरवुड-रैंडल और अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया के लिए विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि जलमय खलीलज़ाद से भी बातचीत की.
अमेरिकी अधिकारियों के साथ अपनी बैठक के बारे में जयशंकर ने ट्वीट कर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया.
बांग्लादेश के विदेश मंत्री से मुलाक़ात
ताशकंद में जयशंकर ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष ए के अब्दुल मोमेन से भी बात की.
जयशंकर ने इस मुलाक़ात के बाद ट्वीट किया कि ‘‘ताशकंद कनेक्टिविटी सम्मेलन से इतर बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर ए के अब्दुल मोमेन से मिलकर ख़ुश हूँ. कनेक्टिविटी पहलुओं सहित हमारे संबंधों में प्रगति की समीक्षा करने का एक अच्छा अवसर रहा.’’
ताशकंद में कनेक्टिविटी पर बहुपक्षीय सम्मेलन में गनी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान समेत क्षेत्र के कई देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया.
हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि इस दौरे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान या पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के साथ विदेश मंत्री की कोई बैठक संभव नहीं है. वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी से ये पूछे जाने पर कि भारत से बातचीत की क्या संभावना है? उन्होंने कहा, “भारत से बातचीत का रास्ता श्रीनगर से होकर जाता है. जब तक जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत अपना रुख़ नहीं बदलता, तब तक बातचीत नहीं.”
बताया गया है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान शुक्रवार को राष्ट्रपति अशरफ़ गनी के साथ ‘सेंट्रल एंड साउथ एशिया 2021’ कॉन्फ़्रेंस के उद्घाटन सत्र में शामिल होने वाले हैं.
भारत इस साल की शुरुआत में अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को पूरी तरह वापस बुला लेने के अमेरिका के फ़ैसले को लेकर सावधान रहा है, क्योंकि अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में सीज़फ़ायर या किसी राजनीतिक समझौते की प्रतीक्षा किये बिना ही ये निर्णय ले लिया था.
जयशंकर ताज़िकिस्तान की राजधानी दुशान्बे की दो दिवसीय यात्रा के बाद ताशकंद पहुँचे थे. दुशान्बे में जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए थे.
एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का प्रभाव बढ़ने से बिगड़ रही स्थिति पर गंभीर चर्चा की थी.
अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान से अपने अधिकतर सैनिकों को वापस बुला लिया है और वो युद्धग्रस्त देश में लगभग दो दशक तक अपनी मौजूदगी के बाद, अगस्त के अंत तक अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया पूरी करना चाहता है.