म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के बाद से जारी विरोध-प्रदर्शनों में
20 वर्षीय लड़की म्या त्वे त्वे काइंग की मौत हो गई
है. पिछले कुछ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों में पहली बार किसी प्रदर्शनकारी की
मौत हुई है.
म्या त्वे त्वे काइंग पिछले हफ़्ते एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए तब घायल हो गई थीं, जब पुलिस ने पानी की बौछारों, रबर बुलेट्स और असली गोलियां चलाकर
प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की थी.
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि उनके शरीर पर जो जख़्म था वो असली
गोली से हुए घाव जैसा था.
म्यांमार में सेना द्वारा सत्ता हथियाए जाने के बाद से लगातार
विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है. सेना ने म्यांमार की नेता आंग सान सू ची की चुनी
हुई सरकार का तख़्तापलट कर दिया है.
म्या त्वे त्वे काइंग की मौत नेपीडाव के अस्पताल में हुई है. उनके
परिवार ने कहा है कि उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने एक डॉक्टर के हवाले से बताया है कि “हम
न्याय की मांग करेंगे.” डॉक्टर ने कहा कि जब से म्या त्वे त्वे काइंग को अस्पताल
की इंटेंसिव केयर यूनिट में लाया गया था तब से ही यहां का स्टाफ भारी दबाव में था.
अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की जांच करेंगे. म्या त्वे त्वे काइंग 9 फरवरी को अस्पताल में ले जाए जाने के बाद से ही लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर थीं.
उन्होंने देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. प्रदर्शनकारियों के पीछे हटने से इनकार करने पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया था.
बीबीसी बर्मीज़ सेवा का कहना है कि उन्हें अस्पताल पहुंचाने के बाद ही बीबीसी ने एक मेडिकल अफसर से बात की थी. उनका कहना था कि म्या त्वे त्वे के सिर पर गंभीर चोट है.
म्या त्वे त्वे और उनका परिवार आंग सान सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) का समर्थक है. उनके भाई ने कहा कि उन्होंने पिछले साल नवंबर में हुए आम चुनावों में पहली बार वोट भी दिया था. इस चुनाव में एनएलडी को भारी जीत मिली थी.
म्या त्वे त्वे की बहन म्या ता तो वे ने कहा, “मैं सभी नागरिकों को उत्साहित करना चाहती हूं कि वे प्रदर्शनों में शामिल हों ताकि हम इस सिस्टम से मुक्ति पा सकें.”
म्यांमार के लोग क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
म्यांमार में सेना के सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद से आपातकाल जैसे हालात हैं.
तख़्तापलट से पहले सेना ने दावा किया था कि नवंबर में हुए चुनावों के नतीजे फर्ज़ी हैं, लेकिन उन्होंने इसका कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है.
सेना ने सत्ता कमांडर इन चीफ़ मिन ऑन्ग लाइंग को सौंप दी है और सू ची को उनके घर में नजरबंद कर दिया है.
सू ची पर अवैध वॉकी-टॉकी रखने और देश के नेचुरल डिज़ास्टर क़ानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है.
प्रदर्शनकारी उनकी और एनएलडी के अन्य सदस्यों की रिहाई की मांग कर रहे हैं.
2007 के सेफ्रन रेवॉल्यूशन के बाद से पहली बार देश में इतने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. उस वक्त सैन्य सत्ता के ख़िलाफ़ देश के बौद्ध भिक्षु उठ खड़े हुए थे.
देश में सुरक्षा अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की ख़बर है. सेना ने विरोध की आवाजों को दबाने के लिए इंटरनेट भी बंद कर दिया है.