रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की ऐसी वैक्सीन तैयार कर ली है जो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ कारगर है. इस टीके का इंसानों पर दो महीने तक परीक्षण किया गया और ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है.
इस वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी मंज़ूरी दे दी है. माना जा रहा है कि रूस में अब बड़े पैमाने पर लोगों को यह वैक्सीन देनी की शुरुआत होगी.
हालांकि रूस ने जिस तेज़ी से कोरोना वैक्सीन को हासिल करने का दावा किया है उसको देखते हुए वैज्ञानिक जगत में इसको लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं.
लेकिन रूस अकेला देश नहीं है जो वैक्सीन बनाने में लगा है.
100 से भी ज़्यादा वैक्सीन शुरुआती स्टेज में हैं और 20 से ज़्यादा वैक्सीन का मानव पर परीक्षण हो रहा है.
अमरीका में छह तरह की वैक्सीन पर काम हो रहा है और अमरीका के जाने माने कोरोना वायरस विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने कहा है कि साल के अंत तक अमरीका के पास एक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन हो जाएगी.
ब्रिटेन ने भी कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर चार समझौते किए हैं.
एस्ट्राज़ेनेका कोरोना वैक्सीन का 10 करोड़ ख़ुराक तैयार कर रही है और दवा की कंपनी जीएसके और सनोफ़ी भी इसका इलाज ढूंढ रही हैं.
मंगलवार को इंडोनेशिया और मैक्सिको दोनों ने घोषणा की कि उनके यहां भी कोरोना वैक्सीन का आख़िरी दौर का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है.