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इराक़ के मीडिया ने बिजली मंत्रालय के हवाले से कहा है कि ईरान से गैस आयात बंद हो गया है. यह रोक ईरान की गैस सुविधाओं पर हमलों के बाद लगी है.
चंदन कुमार जजवाड़े, रौनक भैड़ा
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इराक़ के मीडिया ने बिजली मंत्रालय के हवाले से कहा है कि ईरान से गैस आयात बंद हो गया है. यह रोक ईरान की गैस सुविधाओं पर हमलों के बाद लगी है.
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार, इराक़ अपनी गैस और बिजली की ज़रूरतों का एक तिहाई से ज़्यादा हिस्सा ईरान से लेता है.
बिजली मंत्रालय के प्रवक्ता अहमद मूसा ने इराक़ी न्यूज़ एजेंसी को बताया, "क्षेत्र में हालात के असर की वजह से ईरान से इराक़ आने वाली गैस पूरी तरह रुक गई है."
ईरानी मीडिया ने हाल ही में दावा किया था कि दुनिया के सबसे बड़ी नेचुरल गैस फ़ील्ड पर हवाई हमला हुआ है. दावा किया गया है कि गैस फ़ील्ड के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ.
ईरानी तेल मंत्रालय ने बताया कि आग पर क़ाबू पाने की कोशिशें अभी जारी हैं. यह जानकारी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने दी है, जो ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी है.
तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने यह बताया कि हमला बुधवार को हुआ और इसके लिए 'इसराइल और अमेरिका' को ज़िम्मेदार ठहराया. एजेंसी ने कहा कि जवाब में 'अमेरिका से जुड़ीं सभी तेल और गैस रिफ़ाइनरी को निशाना बनाया जाएगा.'

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ईरानी मीडिया ने हाल ही में दावा किया था कि दुनिया की सबसे बड़ी नेचुरल गैस फ़ील्ड पर हवाई हमला हुआ. इसके बाद तेल की क़ीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं.
ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 108.60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. मंगलवार की क़ीमतों के मुक़ाबले ये 5% ज़्यादा है. यूके गैस का बेंचमार्क भाव भी तेज़ी से बढ़ा, क़रीब 6% उछलकर 139 पेंस प्रति थर्म तक पहुंच गया.
ग़ौरतलब है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी न्यूज़ एजेंसी 'तस्नीम' ने जानकारी दी थी कि ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर बने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हवाई हमला हुआ है.
साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फ़ील्ड है, जिस पर ईरान और क़तर अपने प्लांट चलाते हैं.

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पाकिस्तान ने अफ़ग़ान तालिबान के ख़िलाफ़ चल रहे "ऑपरेशन ग़ज़ब-लिल-हक़" को कुछ समय के लिए रोकने का फ़ैसला किया है.
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़ ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान ने 'ईद-उल-फ़ितर' और 'भाईचारे वाले इस्लामी देशों' की गुज़ारिश पर अफ़ग़ान तालिबान के ख़िलाफ़ चल रहे ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोका है.
अताउल्लाह तारड़ ने एक्स पर लिखा, "ईद-उल-फ़ितर को देखते हुए, अपनी इच्छा से और भाईचारे वाले इस्लामी देशों सऊदी अरब, क़तर और तुर्की की गुज़ारिश पर, पाकिस्तान सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान में आतंकियों के ख़िलाफ़ चल रहे 'ऑपरेशन ग़ज़ब-लिल-हक़' को अस्थायी तौर पर रोकने का एलान किया है."
उन्होंने आगे लिखा, "यह रोक 18/19 मार्च 2026 की आधी रात से 23/24 मार्च 2026 की आधी रात तक लागू रहेगी. पाकिस्तान यह क़दम अच्छे इरादे और इस्लामी परंपराओं के मुताबिक़ उठा रहा है. लेकिन अगर इस दौरान कोई सीमा पार हमला, ड्रोन हमला या पाकिस्तान के अंदर कोई आतंकी वारदात होती है, तो 'ऑपरेशन ग़ज़ब-लिल-हक़' तुरंत और ज़्यादा सख़्ती के साथ फिर शुरू कर दिया जाएगा."
एक अन्य पोस्ट में अताउल्लाह तारड़ ने बताया, "सीज़फ़ायर का एलान होने तक अफ़ग़ानिस्तान में 707 आतंकी मारे गए और 938 घायल हुए."
अताउल्लाह तारड़ ने दावा किया, "अफ़ग़ानिस्तान में 81 जगहों पर हवाई हमले किए गए, जहां आतंकियों और उनके नेटवर्क को निशाना बनाया गया."

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पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि "भारत अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है."
दरअसल, भारत ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान के काबुल में "पाकिस्तान की ओर से अस्पताल में हुए हमले" की निंदा की थी. इसे "कायरतापूर्ण" और "जनसंहार" बताया है.
अब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया दी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, "पाकिस्तान भारत के विदेश मंत्रालय का वह बयान पूरी तरह ख़ारिज करता है, जिसमें अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवादी ढांचे के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की कार्रवाई पर ग़लत और बेबुनियाद बातें कही गई हैं."
उन्होंने कहा, "भारत लंबे समय से अफ़ग़ान ज़मीन से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और अतीत में भी नुक़सान पहुंचाने वाला रहा है. ऐसे में यह बयान भारत की दोहरी नीति और साफ़ झूठ को दिखाता है."
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "यह याद रखना चाहिए कि यह बयान उस देश से आया है, जिसका नेतृत्व ऐसे लोग कर रहे हैं जो इस्लाम विरोधी सोच को चुनावी फ़ायदा लेने के लिए इस्तेमाल करते हैं. अपने ही मुस्लिम नागरिकों पर हिंसा करते रहे हैं."

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ताहिर अंद्राबी ने कहा, "यह बहुत अजीब है कि एक ऐसा देश, जिसने हमेशा पड़ोसी देशों की आज़ादी और सीमा का उल्लंघन किया है, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया है, वह अब इन सिद्धांतों पर बयान दे रहा है."
गौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान ने आरोप लगाया था कि सोमवार को पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमले किए हैं जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई है.
बीबीसी पश्तो की रिपोर्ट के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर हुए हवाई हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की आशंका है. तालिबान शासन ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया था.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से चल रही जंग के बीच कहा है कि 'स्ट्रेट' की ज़िम्मेदारी उन देशों को सौंप दी जाए, जो इसका इस्तेमाल करते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मैं सोच रहा हूं कि अगर हम 'आतंकी ईरानी राज्य' के बचे-ख़ुचे हिस्से को 'समाप्त' कर दें और उस तथाकथित 'स्ट्रेट' की ज़िम्मेदारी उन देशों को सौंप दें जो इसका इस्तेमाल करते हैं (हम नहीं करते) तो क्या होगा? इससे हमारे कुछ सुस्त 'सहयोगियों' को जल्दी ही काम पर लगना पड़ेगा."
इस पोस्ट से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में लिखा था, "ईरान को हर कोई दुनिया का नंबर वन आतंक का मददगार देश मानता है. हम बहुत तेज़ी से उनका धंधा बंद कर रहे हैं."
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर शाम को नेटो देशों की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था, "अधिकतर नेटो सहयोगी ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहते. हमें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है."

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ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर बने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हवाई हमला हुआ है. यह जानकारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी न्यूज़ एजेंसी 'तस्नीम' ने दी है.
साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फ़ील्ड है, जिस पर ईरान और क़तर दोनों अपने-अपने प्लांट चलाते हैं. तस्नीम के मुताबिक यह हमला बुधवार को हुआ.
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने रिपोर्ट दी कि तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे चरण में कुछ गैस रिजर्वायर और फ़ैसिलिटीज़ को निशाना बनाया गया.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, असालूयेह के गवर्नर इस्कंदर पासालार ने कहा कि "दुश्मन के हमलों से साउथ पार्स के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं."
रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों को अब सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है. बचाव और दमकल दल आग बुझाने का काम कर रहे हैं.

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'सरके चुनर' गाने के लिरिक्स को लेकर चल रहे विवाद पर नोरा फ़तेही की प्रतिक्रिया आई है. नोरा ने दावा किया है कि इस गाने को हिन्दी में डब करने पर उनकी अनुमति नहीं ली गई.
नोरा फ़तेही ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा, "मैंने यह गाना तीन साल पहले कन्नड़ भाषा में शूट किया था. मुझे लगा कि ये संजय दत्त के आइकॉनिक सॉन्ग 'नायक नहीं खलनायक हूं मैं' का रीमेक वर्ज़न होगा. मुझे इस गाने को समझाने के लिए ट्रांसलेट किया गया, लेकिन ट्रांसलेशन में इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं था. मैं कन्नड़ नहीं समझती, इसलिए उन्होंने (मेकर्स) मुझे जो बताया मैंने भरोसा किया."
"अब इस गाने को हिन्दी में डब किया गया, लेकिन इसके लिए मुझसे कोई अनुमति नहीं ली गई. उन्होंने (मेकर्स) एआई से मेरी फ़ोटो बनाई जिसमें मैं और संजय दत्त दिखाई दे रहे हैं, जबकि मैं एआई के ख़िलाफ़ हूं."
नोरा फ़तेही ने कहा, "मैंने जब गाने के हिन्दी वर्ज़न के लिरिक्स सुने तो मुझे लग गया था कि इस पर विवाद होगा, क्योंकि मैं हिन्दी समझती हूं. डायरेक्टर को भी कहा था कि ये गाना ठीक नहीं है और इसे लेकर विरोध होगा, फिर मैं इस प्रोजेक्ट से अलग हो गई."
नोरा फ़तेही ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, "मैं नहीं चाहूंगी कि कोई ये सोचे कि मैं इसको (गाना) सपोर्ट करती हूं. विरोध की वजह से फ़िल्म मेकर्स ने गाने को हटा दिया है. मैं सब से ये भी कहना चाहूंगी कि इस गाने को शेयर करना बंद करें, क्योंकि ऐसा करने से आप इसे बेवजह प्लेटफ़ॉर्म दे रहे हैं. साथ ही मैंने देखा कि कुछ लोग इस मौके का इस्तेमाल मेरे चरित्र पर हमला करने के लिए कर रहे हैं, ये दुखद है."
उन्होंने लिखा. "ख़ैर, मैं और मेरी टीम आगे से ऐसी स्थितियों में और सावधानी बरतेंगे. लेकिन मैं फिर से साफ़ करना चाहती हूं कि मुझे इस हिन्दी गाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, मैंने इस पर परफ़ॉर्म नहीं किया और मेरी तस्वीर के साथ इसे इस्तेमाल करने की कोई इजाज़त नहीं ली गई थी."
इससे पहले सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को संसद में कहा, "गाने पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है. अभिव्यक्ति की आज़ादी में संविधान निर्माताओं ने जो तर्कसंगत पाबंदियां लगाई हैं, हमें उनके हिसाब से ही चलना चाहिए. समाज और संस्कृति के संदर्भ में अभिव्यक्ति की आज़ादी का ध्यान रखना चाहिए."


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ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसराइली हमले में मारे गए सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी पर बयान जारी किया है.
विदेश मंत्रालय ने बताया, "अली लारिजानी के साथ उनके बेटे मोर्तेज़ा लारिजानी, आंतरिक सुरक्षा के उप सचिव अलीरेज़ा बयात और गार्ड्स भी 'आतंकी हमले में शहीद' हो गए."
आगे कहा गया, "यह साफ़ है कि ऐसे 'आतंकी हमले' ईरानी जनता की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की मज़बूत इच्छा को कमज़ोर नहीं कर सकते. बल्कि यह जनता और अधिकारियों की एकता, संकल्प और दृढ़ता को और बढ़ाएंगे. इस 'महान शहीद' का 'पवित्र ख़ून' राष्ट्र की ताक़त और निरंतरता की गारंटी बनेगा."
विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम संयुक्त राष्ट्र, उसकी सुरक्षा परिषद और महासचिव को याद दिलाते हैं कि अमेरिका और ज़ायोनिस्ट शासन की सैन्य आक्रामकता और ईरानी जनता के ख़िलाफ़ किए गए अपराधों पर ठोस प्रतिक्रिया देना उनकी ज़िम्मेदारी है."
इससे पहले मंगलवार को इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने अली लारिजानी के मारे जाने का दावा किया था.
अली लारिजानी को अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने काउंसिल का सचिव और ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया था.

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इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने दावा किया है कि ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल ख़ातिब मारे गए.
कात्ज़ ने बयान में कहा, "पिछली रात ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर ख़ातिब को भी ख़त्म कर दिया गया."
ईरान ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
हालांकि, इसराइली मीडिया ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से पहले ही बता दिया था कि इस्माईल ख़ातिब को निशाना बनाया गया था.
ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल ख़ातिब को पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने 2021 में नियुक्त किया था.
ख़ातिब ने कई बड़े धर्मगुरुओं से इस्लामी क़ानून की पढ़ाई की थी, जिनमें ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई भी शामिल थे.
2022 में अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने ख़ातिब को 'अमेरिका और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ साइबर गतिविधियों में शामिल होने' के कारण प्रतिबंधित किया था.

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अमेरिका की ओर से ईरान पर 5,000 पाउंड (2270 किलो) के बंकर बस्टर इस्तेमाल की खबर है. यह इस बात का सबूत है कि अमेरिका को लगता है कि ईरान ने अपने कई हथियार ज़मीन के अंदर गहराई में छिपा रखे हैं.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया है कि ईरान के तट पर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के पास बने मिसाइल ठिकानों पर बंकर बस्टर का इस्तेमाल हुआ. हालांकि, यह नहीं बताया कि कौन-सी बम तकनीक इस्तेमाल की है.
इस तरह के काम के लिए बम के लिए दो बम इस्तेमाल किए जाते हैं. जीबीयू-28 लेज़र-गाइडेड बम और जीबीयू-72 एडवांस्ड 5K पेनिट्रेटर (यह नया है और ज़्यादा संभावना है कि यही इस्तेमाल हुआ हो).
जीबीयू-72 को पहली बार 2021 में टेस्ट किया गया था. यह बड़ा बम है जो जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन तकनीक से चलता है. इसे सैटेलाइट और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम से लक्ष्य तक पहुंचाया जाता है.
टेस्टिंग के समय अमेरिकी वायुसेना ने कहा था कि जीबीयू-72 को ख़ास तौर पर गहराई में बने मज़बूत ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है. यह लड़ाकू और बमवर्षक दोनों तरह के विमानों से चलाया जा सकता है.

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि ईरान 'सीज़फ़ायर' नहीं चाहता, बल्कि 'जंग का हमेशा के लिए अंत' चाहता है.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, अराग़ची ने अरब के टेलीविज़न नेटवर्क अल जज़ीरा से तेहरान में कहा, "हम सीज़फ़ायर नहीं चाह रहे क्योंकि हम नहीं चाहते कि यह हालात कुछ समय बाद फिर से दोहराए जाएं. हम जंग का पूरा और हमेशा के लिए अंत चाहते हैं."
अराग़ची ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई की सेहत पर कहा, "जहां तक मुझे पता है, सुप्रीम लीडर को सिर्फ़ हल्की चोटें आई हैं. वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और हालात पर पूरा नियंत्रण है."
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस जंग में 'इसराइल के कहने पर' और 'ग़लत अंदाज़े' के कारण आया.
अराग़ची ने कहा, "जो लोग हमसे बिना शर्त हार मानने की मांग कर रहे थे, अब वही लोग अपने दुश्मनों से भी मदद मांगने पर मजबूर हैं ताकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ खोला जा सके."
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों समेत अन्यों से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को खोलने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी. हालांकि, मंगलवार को उन्होंने यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा कि 'हमें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं' है.

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इसराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ़) ने दक्षिणी लेबनान के उन निवासियों के लिए फिर से इलाक़े को ख़ाली करने का एक बार फिर से आदेश जारी किया है, जो ज़हरानी नदी के दक्षिण में रहते हैं.
यह इलाक़ा इसराइली सीमा से क़रीब 40 किलोमीटर दूर है.
इसराइल की सेना ने पिछले हफ़्ते दक्षिणी लेबनान के लिए अपने आदेश का दायरा बढ़ाया था और नागरिकों से कहा था कि वे तुरंत नदी के उत्तर की ओर चले जाएं.
एक्स पर जारी एक बयान में आईडीएफ़ के प्रवक्ता ने स्थानीय लोगों से कहा, "हिज़्बुल्लाह की आतंकवादी गतिविधियां आईडीएफ़ को उस इलाक़े में सख़्ती से कार्रवाई करने पर मजबूर कर रही हैं, और उनका आपको नुक़सान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है…”
"आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप तुरंत ज़हरानी नदी के उत्तर में स्थित इलाक़े में चले जाएं. ज़हरानी नदी के दक्षिण में रहना आपके और आपके परिवार के सदस्यों के जीवन के लिए ख़तरा बन सकता है."
यह आदेश लेबनान पर पिछली रात और आज सुबह तक हुए इसराइल के कई हमलों के बाद आया है.
नमस्कार!
अब तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
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असम में नगांव लोकसभा सीट से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई कांग्रेस पार्टी और अपने सभी पदों से इस्तीफ़ा देकर बीजेपी में शामिल हो गए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ वो थोड़ी देर पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के आवास पर पहुंचे थे.
बोरदोलोई के बीजेपी में शामिल होने के बाद सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, "कांग्रेस के उपाध्यक्ष (असम प्रदेश) समेत कई लोग गुवाहटी में बीजेपी में शामिल होंगे. बोरदोलोई इसलिए आज बीजेपी में शामिल हुए हैं क्योंकि हम आज शाम को बीजेपी उम्मीदवारों की सूची तैयार करने वाले हैं."
कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा,, "मेरे लिए, टिकट मिलना जीने-मरने का सवाल नहीं था. मेरे लिए कई मुद्दे थे. मैं घुटन महसूस कर रहा था और सबसे ज़रूरी था अपना सिर ऊँचा रखना. कांग्रेस पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है…”
“मैं यह बिल्कुल साफ़ कर देना चाहता हूँ कि मैं लोकसभा में अपने दूसरे कार्यकाल में हूँ, और अभी तीन साल और बाक़ी हैं. अगर मैं सांसद बने रहना चाहता, तो मैं अपमान सह सकता था. लेकिन मैंने इसे छोड़ने और काम करने का फ़ैसला किया..."

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सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने 9 अप्रैल को होने वाले असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा दिया है.
उन्होंने साल 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी के सुरेश बोरा को दो लाख से ज़्यादा वोट से हराया था.
प्रद्युत बोरदोलोईके इस्तीफ़े पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा,"यह दुर्भाग्यपूर्ण है. मुझे लगता है कि वह टिकट के बँटवारे को लेकर नाराज़ थे. काश हमें इस बारे में बातचीत करने का मौक़ा मिलता. यह दुर्भाग्यपूर्ण है."
प्रियंका गांधी को असम विधानसभा चुनाव के लिए संभावित कांग्रेस उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने वाले एक पैनल का चेयरपर्सन बनाया गया है.
वहीं असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नबज्योति तालुकदार ने भी कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है.
तालुकदार का कहना है, "कांग्रेस ने एक ऐसे व्यक्ति से हाथ मिला लिया है जो 'वंदे मातरम' नहीं गाते. इमरान मसूद ने भगत सिंह की तुलना फ़लस्तीन के संगठन हमास से की. वे (इमरान मसूद) असम आए और यहाँ की राजनीति को नियंत्रित करने लगे. हम असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के संपर्क में हैं. वे दोबारा सत्ता में आएँगे."

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संयुक्त अरब अमीरात में ऑस्ट्रेलिया के मिलिट्री बेस के पास ईरान का एक प्रोजेक्टाइल गिरा है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कुछ देर पहले इस बात की पुष्टि की है.
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने बताया कि यह प्रोजेक्टाइल "आज सुबह 9:15 बजे अल मिन्हाद बेस पर गिरा, जो यूएई में ऑस्ट्रेलिया का बेस है."
उन्होंने कहा, "मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूँ कि ऑस्ट्रेलिया का कोई भी जवान घायल नहीं हुआ है, और सभी पूरी तरह से सुरक्षित हैं."
"उस प्रोजेक्टाइल के बेस तक जाने वाली सड़क पर गिरने से लगी आग के कारण, एक रिहायश और एक मेडिकल सेंटर को थोड़ा-बहुत नुक़सान पहुँचा है."

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दिल्ली के पालम में एक मकान में आग लगने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई है. मरने वालों में तीन बच्चे भी शामिल हैं.
पीटीआई ने बताया है कि आग लगने की यह घटना सुबह क़रीब सात बजे की है
पीटीआई के मुताबिक़ इस हादसे में एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई है. जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं.
वहीं समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि आग की सूचना मिलने के बाद फ़ायर ब्रिगेड की 30 गाड़ियां मौक़े पर भेजी गईं.
घटनास्थल के क़रीब रहने वाले एक शख़्स ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि जिस इमारत में आग लगी, उसमें नीचे कॉस्मेटिक्स की दुकान थी और ऊपर के मंज़िलों पर लोग रहते थे.
हालाँकि घटना के वक़्त कितने लोग घर में मौजूद थे, इसकी पूरी जानकारी फ़िलहाल नहीं मिल पाई है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना पर शोक जताया है. वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सुरक्षा इंतजामों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है.

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लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि सेंट्रल बेरूत पर हुए दो इसराइली हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए हैं और चौबीस अन्य घायल हुए हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि “ये शुरुआती आंकड़े हैं और डीएनए टेस्ट के बाद मृतकों की पहचान की जाएगी."

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इससे पहले, स्थानीय मीडिया ने बताया कि एक हमला मध्य ज़ुकाक अल-ब्लाट इलाक़े में एक रिहायशी इमारत पर हुआ, जो सरकारी मुख्यालय और कई दूतावासों के क़रीब है.

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एएफ़पी के मुताबिक़, दूसरा हमला मध्य बास्ता ज़िले में हुआ, जहाँ चश्मदीदों ने कई धमाकों की आवाज़ें सुनीं.