क्वेटा रेलवे स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए हैं. यहां लोग अपने रिश्तेदारों के बारे में जानकारी लेने आए हैं.
इस भीड़ में एक पति-पत्नी अपने दो बच्चों के साथ मौजूद थे, जिन्होंने बीबीसी उर्दू से बात की.
पत्नी ने बीबीसी उर्दू को बताया कि उनका देवर भी जाफर एक्सप्रेस में था, लेकिन अभी तक उन्हें उनकी कोई जानकारी नहीं मिली है.
क्वेटा रेलवे स्टेशन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और किसी को भी रेलवे स्टेशन में घुसने की इजाजत नहीं दी जा रही है और ना ही किसी को सरकारी ऑफिस में जाने दिया जा रहा है. रेलवे स्टेशन में कर्फ्यू जैसा माहौल है.
क्वेटा रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार पर सूचना डेस्क का चार्ट लगा है, लेकिन आम जनता को वहां जाने की पूरी तरह मनाही है. रेलवे पुलिस और एफसी (फ्रंटियर कॉर्प्स) के जवान वहां तैनात हैं और कभी पत्रकारों को एक कोने में तो कभी दूसरे कोने में हटा रहे हैं.
स्टेशन पर एक रेलगाड़ी खड़ी है. एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां से ले जाने के लिए बहुत सारे ताबूत लाए गए हैं.
कुछ ताबूत धार्मिक संगठनों ने भी भेजे हैं, जिन्हें स्टेशन पर खड़ी एक यात्री रेलगाड़ी के पांच डिब्बों में रखा जा रहा है.
यह रेलवे स्टेशन भले ही छोटा है, लेकिन आमतौर पर यहां काफी चहल-पहल रहती है. क्वेटा शहर के लोगों के लिए यह मनोरंजन का भी एक केंद्र है. लेकिन अब यहां की स्थिति बिल्कुल अलग है, सामान्य जनता को स्टेशन से दूर रखा जा रहा है.
स्टेशन के पास रेलवे कॉलोनी है, जहां मैं रेलवे पुलिसकर्मी के घर गया. एक छोटे से कमरे में 20-25 लोग इकट्ठा होकर हादसे की जानकारी साझा कर रहे थे.
स्टेशन पर भी बड़ी संख्या में रिश्तेदार मौजूद हैं, जो अपनों की खबर पाने के लिए परेशान हैं. शोक और बेचैनी का माहौल है, हर कोई सिर्फ अच्छी खबर का इंतजार कर रहा है.
हालांकि, किसी को सही जानकारी नहीं मिल रही है. रेलवे अधिकारी यात्रियों की सूची भी नहीं दे रहे है.
दूसरे दिन अब्दुल रऊफ अपने पिता का नाम देखने के लिए रेलवे स्टेशन पर पहुंचे.
उन्होंने कहा कि अब उनकी जांच तेज हो गई है क्योंकि उनके पिता भी गंभीर रूप से बीमार हैं.
चिंता यह है कि इन परिस्थितियों में अब उनकी स्थिति क्या होगी?
अब्दुल रऊफ नाम के एक शख्स अपने बीमार पिता की खबर लेने स्टेशन पहुंचे है. उन्होंने बताया कि उनके पिता की हालत गंभीर है और इस हादसे के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई है.
क्वेटा आने-जाने वाली ट्रेनें दूसरे दिन भी रोक दी गई हैं. दोपहर 2 बजे के बाद, एक राहत रेलगाड़ी कई ताबूतों को लेकर रवाना हुई थी. लेकिन मृतकों की सही संख्या अब तक नहीं बताई गई है.