कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि मंत्रिमंडल सामाजिक-आर्थिक एवं शिक्षा सर्वेक्षण (जातिगत जनगणना) रिपोर्ट पर 18 अक्टूबर को चर्चा करेगी.
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आने वाले कई सांसदों, विधायकों (इनमें एक बीजेपी नेता), कर्नाटक पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष सहित कई लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने सिद्धारमैया को रिपोर्ट को लागू करने को लेकर ज्ञापन सौंपा है.
वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के नेताओं की ओर से रिपोर्ट को लागू न करने को लेकर
दवाब के बीच ओबीसी वर्ग से आने वाले नेताओं ने सिद्धारमैया को ये ज्ञापन दिया है.
मंत्रिमंडल निर्णय लेगी कि इसे सार्वजनिक किया जाए या फिर विधानसभा में रखा जाए.
सामाजिक- आर्थिक एवं शिक्षा सर्वेक्षण करने का आदेश देश में पहली बार 2014 में अपने
पहले कार्यकाल के दौरान सिद्धारमैया ने दिया था. लेकिन बिहार में जातिवार सर्वे पहले शुरू किया गया.
सभी राजनीतिक दलों के वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय से आने वाले नेताओं के आपत्ति जताने को लेकर सिद्धारमैया ने कहा, "सर्वे में सिर्फ ओबीसी ही नहीं बल्कि सभी लोगों को शामिल किया गया है."
सर्वे में सामने आया है कि राज्य में अधिकतर लोग ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हैं. इसके बाद मुस्लिम, लिंगायत, वोक्कालिगा और ब्राह्मण हैं.
लोकसभा चुनाव से पहले सौंपी गई रिपोर्ट की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ नेता ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की.
उन्होंने कहा, "सर्वे के अनुसार ओबीसी वर्ग की आबादी 2.31 करोड़ है. वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.40 करोड़ है. इसके अलावा मुस्लिमों की 70 लाख, लिंगायत की 66 लाख, वोक्कालिगा की 62 लाख, ब्राह्मण की आबादी 14 लाख है."
जिस समय सर्वेक्षण किया गया, उस समय राज्य की जनसंख्या छह करोड़ के करीब थी.
सर्वे तीन साल में पूरा हुआ, लेकिन रिपोर्ट आने में देरी हुई. साल 2018 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन वाली सरकार में एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने.
सिद्धारमैया ने कहा, "एचडी कुमारस्वामी रिपोर्ट को स्वीकर नहीं करना चाहते थे."
रिपोर्ट कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जयप्रकाश हेगड़े के नेतृत्व में पूरी हुई और इसे मुख्यमंत्री को लोकसभा चुनाव से तुरंत पहले सौंपा गया.
रिपोर्ट को लेकर कई जातियों ने विरोध किया. ऐसे में चुनाव में इसका कोई नुकसान नहीं हो इसे ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया.