अमेरिका में कनाडा और मेक्सिको से आयात किए गए सामान पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लागू हो गया है. इसके अलावा चीन के ख़िलाफ़ भी नया 10 फ़ीसदी लेवी (एक तरह का टैक्स) शुरू हो गया है.
ट्रंप ने कहा है कि अब कनाडा और मेक्सिको के पास बातचीत का कोई मौक़ा नहीं है.
इसके बदले में कनाडा ने भी अमेरिका से अपने देश में आयात होने वाले कई सामानों जैसे घरेलू सामान, ऑरेंज जूस, वाइन, स्प्रिट्स, बियर और कॉफ़ी पर 25 परसेंट टैरिफ़ लगाने की घोषणा की थी.
वहीं मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा है कि इस टैरिफ़ को लागू करने की अमेरिका के पास कोई दलील नहीं है.
इसके ख़िलाफ़ मेक्सिको ने भी अमेरिकी सामान पर टैरिफ़ लगाने की बात की है, जिसकी घोषणा रविवार को की जाएगी.
इस बीच, चीन ने भी 10 मार्च से अमेरिका से आयात होने वाले कई सामान पर 10 से 15% टैक्स लगाने की बात कही है. चीन कई अमेरिकी उत्पादों के बड़े आयातकों में से एक है.
ट्रंप के इस टैरिफ़ की चर्चा के बीच मंगलवार को अमेरिका का शेयर बाज़ार गिरावट के साथ खुला है और अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में क़रीब 1 फ़ीसदी की गिरावट देखी गई है.
माना जा रहा है कि इस तरह के टैक्स वॉर से अमेरिका में कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिनमें स्मार्टफ़ोन भी शामिल है.
टैरिफ़ दूसरे देशों के आयात किए जाने वाले सामान पर टैक्स के तौर पर लगाया जाता है.
जो कंपनियां किसी अन्य देश से विदेशी सामान आयात करती हैं, उन्हें यह टैक्स सरकार को देना होता है. यह आमतौर पर सामान की कीमत में जुड़ जाता है.
मसलन अमेरिका अगर कोई सामान 100 डॉलर में आयात कर रहा है और इस पर 25% टैरिफ़ लगाया जाता है तो इसकी कीमत 125 डॉलर हो जाएगी.
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में टैरिफ़ का इस्तेमाल चीन पर दबाव बनाने के लिए किया था और कुछ अन्य देशों पर भी व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए इसका इस्तेमाल किया था.