हनी ट्रैप को लेकर कर्नाटक के मंत्री केएन राजन्ना ने किया बड़ा दावा
कर्नाटक सरकार के एक मंत्री ने विधानसभा में एक सनसनीखेज खुलासा किया है कि सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि उनके अलावा राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अन्य 48 मंत्रियों को भी हनी ट्रैप की कोशिश की गई है.
हनी ट्रैप को लेकर कर्नाटक के मंत्री केएन राजन्ना ने किया बड़ा दावा, इमरान क़ुरैशी, बीबीसी संवाददाता, बेंगलुरु से
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कर्नाटक सरकार के एक मंत्री ने विधानसभा में एक सनसनीखेज खुलासा किया है कि सिर्फ उनका ही नहीं, बल्कि उनके अलावा राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अन्य 48 मंत्रियों को भी हनी ट्रैप की कोशिश की गई है.
कॉर्पोरेशन मंत्री केएन राजन्ना ने इस मुद्दे पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जब बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने इस मामले को उठाया और इसे "खराब संस्कृति" करार दिया.
कॉपेरेशन मंत्री केएन राजन्ना ने कहा कि वह शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार हैं और उन्होंने गृह मंत्री जी परमेश्वर से इस मामले की जांच कराने की अपील की है.
उन्होंने कहा, “यह मुद्दा सिर्फ हमारे राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है और इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं. यह सामने आना चाहिए कि इसके पीछे निर्माता और निर्देशक कौन हैं. जनता को सच्चाई पता चलनी चाहिए.”
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने सदन को बताया कि उन्होंने मंत्री को हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा, “अगर हमें सदन की गरिमा बनाए रखनी है, तो इस मामले का समाधान सही तरीके से करना होगा. अगर राजन्ना लिखित अपील देते हैं, तो मैं इस मामले में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दूंगा. सच्चाई सामने आनी चाहिए.”
लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने इससे पहले पत्रकारों से कहा था “यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में ऐसा हुआ है. यह पिछले 20 वर्षों से हो रहा है. कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस, हर पार्टी इसका शिकार हो चुकी है.”
जारकीहोली के बयान के जवाब में बीजेपी नेता सीटी रवि ने कहा “अगर उन्होंने ऐसा बयान दिया है, तो यह सच होना चाहिए.आखिर इस हनी ट्रैप का मास्टरमाइंड कौन है? जो आरोप लगा रहा है, वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार का वरिष्ठ नेता है.”
जब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से पूछा गया कि क्या इस मामले में कोई मंत्री शामिल है, तो उन्होंने कहा, "अगर यह सच है, तो उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए."
उत्तर प्रदेश : सीरियल रेप के आरोप में हाथरस के प्रोफ़ेसर गिरफ़्तार, सैयद मोज़िज़ इमाम, बीबीसी संवाददाता
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हाथरस पुलिस ने सीरियल रेप के आरोप में एक प्रोफ़ेसर को गिरफ़्तार किया है.
रजनीश कुमार हाथरस के एक डिग्री कॉलेज में भूगोल विभाग में प्रोफेसर थे.उनपर योन शोषण का आरोप है. पुलिस ने उन्हें 19 मार्च को प्रयागराज से गिरफ़्तार किया है.
पुलिस के मुताबिक़ प्रोफे़सर ने छात्राओं के साथ शारीरिक संबंध बनाकर उन्हें प्रताड़ित करने की बात स्वीकार की है.
पुलिस ने बताया कि कई वर्षों से प्रोफ़ेसर रजनीश कुमार छात्राओं और महिलाओं को ब्लैकमेल करता आ रहे थे.
उन पर हिडन कैमरे से छात्राओं के वीडियो बनाकर उनके यौन शोषण का आरोप है.
इस बात का पता तब चला कि राज्य महिला आयोग की एक गुमनाम चिट्ठी मिलने के बाद इस बात की जांच की गई.
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने मीडिया को बताया, '' कुछ दिन महिला आयोग के पास एक केस आया था. मैंने त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया था .अब पुलिस ने गिरफ़्तार किया है, ये संतोष की बात है.''
हाथरस के पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि 13 मार्च को एक पत्र सीडी के साथ मिला था,जिसके बाद इसकी जांच की गई थी.मामला सही पाया गया था.
पुलिस ने बताया कि एएसपी की अगुआई में तीन टीम का गठन किया गया था. इन टीमों की मदद से रजनीश कुमार को गिरफ़्तार किया गया.
ज़िम्बाब्वे की कर्स्टी कोवेंट्री अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमिटी की पहली महिला अध्यक्ष बनीं
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ज़िम्बाब्वे की खेल मंत्री कर्स्टी कोवेंट्री अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी यानी आईओसी की नई अध्यक्ष चुनी गई हैं.
42 साल की पूर्व तैराक कोवेंट्री के नाम ओलंपिक में दो स्वर्ण पदक रहे हैं. वह जर्मनी के थॉमस बैक की जगह लेंगी जो साल 2013 से ये भूमिका अदा कर रहे थे.
कर्स्टी इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला, पहली अफ़्रीकी और सबसे कम उम्र की शख्सियत हैं.
कर्स्टी कोवेंट्री ने पहले ही राउंड की वोटिंग में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया था. वह पहले से आईओसी के कार्यकारी बोर्ड की सदस्य हैं. वह कम से कम अगले आठ सालों तक इस पद पर बनी रहेंगी.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने कर्नाटक हाई कोर्ट में भारत सरकार के ख़िलाफ़ मुकदमा किया, उमंग पोद्दार, बीबीसी संवाददाता
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एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत जारी किए गए ब्लॉकिंग आदेशों के खिलाफ़ कर्नाटक हाई कोर्ट में भारत सरकार पर मुकदमा दर्ज किया है.
यह याचिका 5 मार्च को दायर की गई थी. इसमें आईटी एक्ट के सेक्शन 79 के तहत ब्लॉकिंग आदेशों को चुनौती दी गई है.
यह सेक्शन एक्स, यूट्यूब और फेसबुक जैसे इंटरमीडियरी को यूजर्स की ओर से उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए कंटेट के लिए जिम्मेदार होने से बचाता है.
एक्स ने तर्क दिया है कि इस प्रावधान के तहत सरकार ने ब्लॉकिंग आदेश जारी किए हैं, जो कि कानून के खिलाफ हैं और कंटेट हटाने की कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करते हैं.
याचिका में कहा गया है कि कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने अलग-अलग विभागों और स्थानीय अधिकारियों को कंटेंट ब्लॉक करने का अधिकार दे दिया है.
इस याचिका में यह भी बताया गया है कि सरकार ने "सहयोग पोर्टल" नाम का एक सेंसरशिप पोर्टल बनाया है ताकि कंटेंट ब्लॉक करना आसान हो जाए. हालांकि एक्स ने इस पोर्टल से नहीं जुड़ने का फैसला किया है.
12 फरवरी को, रेल मंत्रालय ने एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कुछ पोस्ट हटाने का आदेश दिया था.
इसके जवाब में 14 फरवरी को एक्स ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कहा कि इस तरह से पोस्ट हटाने के आदेश अवैध हैं और वह सरकार को अदालत में चुनौती देगा.
21 फरवरी को रेल मंत्रालय ने एक्स को निर्देश दिया कि वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ से संबंधित कुछ पोस्ट हटा दे.
एक्स ने हाई कोर्ट से अपील की है कि सरकार इस सेक्शन के तहत कंटेंट ब्लॉक नहीं कर सकती और एक्स को सहयोग पोर्टल से न जुड़ने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए.
जुलाई 2022 में भी एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने कर्नाटक हाई कोर्ट में सरकार के 39 ब्लॉकिंग आदेशों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था.
अदालत ने एक्स के खिलाफ फैसला सुनाया था और इस फैसले के खिलाफ अपील अभी लंबित है.
एक्स की ओर से दायर नया मामला 27 मार्च को सुना जाएगा.
ग़ज़ा में इसराइली हवाई हमलों में 55 फ़लस्तीनियों की मौत, सहर असफ़, बीबीसी न्यूज़
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इमेज कैप्शन, इसराइल ने मंगलवार को ग़ज़ा पर फिर से बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए
हमास संचालित सिविल डिफेंस एजेंसी ने रातभर ग़ज़ा में इसराइल की ओर से हुए हवाई हमलों में 55 फ़लस्तीनियों की मौत की पुष्टि की है.
यह हमला तब हुआ जब इसराइल ने इस हफ़्ते ग़ज़ा में फिर से बमबारी और जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में इन हमलों में 430 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.
हमास का कहना है कि इसराइल ने बुधवार को जो नया जमीनी अभियान शुरू किया, वह युद्ध विराम समझौते का गंभीर उल्लंघन है.
यह युद्ध विराम जनवरी में लागू किया गया था, लेकिन जब इसे बढ़ाने पर बातचीत नहीं बनी, तो इसराइल ने मंगलवार को फिर से हमले शुरू कर दिए.
इसराइल ने चेतावनी दी है कि जब तक हमास बचे हुए बंधकों को रिहा नहीं कर देता तब तक ग़ज़ा में हमले और तेज होंगे.
इसराइल का कहना है कि हमास ने अभी भी 59 बंधकों को बंधक बना कर रखा है जिनमें 24 लोगों के जिंदा होने की संभावना है.
इसराइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने गुरुवार को कहा है कि उन्होंने ग़ज़ा में उत्तर और दक्षिण के बीच एक सुरक्षा क्षेत्र बनाने के लिए जमीनी कार्रवाई शुरू की है. सेना इसे सीमित जमीनी अभियान बता रही है.
आईडीएफ के प्रवक्ता कर्नल अविखाय अद्रे ने कहा कि सैनिकों को ग़ज़ा के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र को अलग करने वाले नेटजारिम कॉरिडोर पर भेजा गया है.
ट्रंप प्रशासन ने ट्रांसजेंडर एथलीट्स को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया की फंडिंग रोकी, मैक्स मात्ज़ा,बीबीसी न्यूज़
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ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया की 175 मिलियन डॉलर की फेडरल फंडिंग पर रोक लगाने का फैसला लिया है. यह फैसला यूनिवर्सिटी की ट्रांसजेंडर एथलीट्स से जुड़ी नीति को लेकर किया गया है.
यह फैसला उस ट्रांसजेंडर महिला से जुड़ा हुआ है जिसने साल 2022 में अमेरिका की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कॉलेज तैराकी चैंपियनशिप जीती थी.
यह प्रतियोगिता आइवी लीग यूनिवर्सिटी के लिए खेलते हुए जीती गई थी, जो फिलाडेल्फिया में स्थित है.
बुधवार को यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया ने एक बयान जारी किया है. इस बयान में यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उसे मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए फंडिंग रोकने की जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ट्रांसजेंडर एथलीट्स के खेलों में भाग लेने पर कड़े नियम लागू करने और फेडरल खर्च में कटौती करने की कोशिश कर रहे हैं.
एक अज्ञात ट्रंप अधिकारी ने बुधवार को पत्रकारों को भेजे गए ईमेल में कहा, "यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया ने एक पुरुष को महिलाओं की तैराकी टीम में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी, जिससे महिलाओं की कड़ी मेहनत से बनाए गए कई रिकॉर्ड टूट गए और वह व्यक्ति महिला लॉकर रूम तक जा पहुंचा."
यह फंडिंग अमेरिका के रक्षा विभाग और स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग की ओर से दी जा रही थी.
यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में कहा कि उसने हमेशा एनसीएए (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) के बनाए गए नियमों का पालन किया है, जो यूनिवर्सिटी के स्तर की खेल प्रतियोगिताओं को नियंत्रित करता है.
पिछले महीने, एनसीएए ने अपनी नीति में बदलाव किया है, जिसके तहत अब केवल "वे छात्र-एथलीट जो जन्म से महिला हैं" ही कॉलेज स्तर की महिला प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगी.
यह बदलाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक एग्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर के बाद आया है, जिसमें ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोक दिया गया है.
दिनभर- पूरा दिन, पूरी ख़बर मानसी दाश और सुमिरन प्रीत कौर से...
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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भारतीय मीडिया के किस दावे को बताया 'झूठ'
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन के सलाहकार आमिर मीर (बाएं) और मुख्य वित्तीय अधिकारी जावेद मुर्तज़ा
भारतीय मीडिया के पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के 85 फीसदी घाटे के दावे पर गुरुवार को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन के सलाहकार आमिर मीर और मुख्य वित्तीय अधिकारी जावेद मुर्तज़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
आमिर मीर ने कहा, "भारतीय मीडिया ने झूठ की एक दुकान सजाई है, जिसे आज हम उजाड़ कर जाएंगे. अफसोस की बात है कि जो भी भारतीय मीडिया पर चल रहा था, उसे पाकिस्तानी मीडिया में भी चलाया गया. लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है. हकीकत ये है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को चैंपियंस क्रिकेट ट्रॉफी से तीन अरब रुपये का मुनाफा हुआ है, जबकि हमने दो अरब तक के मुनाफे का अनुमान लगाया था."
उन्होंने आगे कहा, "दूसरी हकीकत यह है कि चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के खजाने से कोई रकम खर्च नहीं की गई. बुनियादी तौर पर ये आईसीसी का टूर्नामेंट था तो आईसीसी का टूर्नामेंट जिस भी मुल्क में होता है उस टूर्नामेंट के तमाम खर्चे आईसीसी उठाता है. इस टूर्नामेंट के लिए आईसीसी का बजट 70 मिलियन डॉलर का था"
कुछ दिनों पहले भारतीय मीडिया में चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन कराने को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के घाटे में जाने की ख़बरें आई थीं.
इन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करके पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को 869 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है.
असम यूनिवर्सिटी ने सिलचर कैंपस में इफ़्तार पार्टी की अनुमति देने से इनकार किया, बिस्वा कल्याण पुरकायस्थ, असम से बीबीसी के लिए
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इमेज कैप्शन, असम यूनिवर्सिटी ने इस फैसले के पीछे का कारण भारत की धर्मनिरपेक्षता को बताया है
असम यूनिवर्सिटी ने अपने सिलचर कैंपस में छात्रों को इफ़्तार दावत आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. यूनिवर्सिटी का कहना है कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखता है.
वहीं यूनिवर्सिटी के छात्रों ने इस फैसले को पक्षपाती बताया और इसे एक धर्म के साथ अन्याय करार दिया है.
ग्रेजुएशन, पोस्ट- ग्रेजुएशन और रिसर्च स्कॉलर्स ने रमज़ान के मौके पर "दावत-ए-इफ़्तार 2025" आयोजित करने की योजना बनाई थी.
यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे पोस्ट- ग्रेजुएशन के छात्र रेज़ाउल करीम आज़ाद चौधरी ने बताया कि पिछले दो सालों से इस तरह के आयोजन हो रहे थे, जिनमें यूनिवर्सिटी के अधिकारी, यहां तक कि रजिस्ट्रार भी शामिल होते थे.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा, “इस साल भी हमने यह आयोजन किया और 10 मार्च को प्रशासन से अनुमति मांगी. प्रशासन ने बताया कि कुलपति (वीसी) और रजिस्ट्रार दोनों मौजूद नहीं हैं, इसलिए प्रक्रिया में देरी हो रही है.”
“19 मार्च को रजिस्ट्रार ने अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि हमें वीसी के लौटने तक इंतजार करना होगा.”
चौधरी ने बताया कि इफ़्तार दावत के लिए छात्र अपने पैसे जुटाते हैं, लेकिन देर से अनुमति मिलने के कारण इस साल इसे रद्द करना पड़ा.
उन्होंने कहा, “वीसी अगले हफ्ते लौटेंगे, लेकिन तब तक हमारे पास आयोजन के लिए फंड इकट्ठा करने और तैयारी करने का समय नहीं रहेगा. इसलिए हमें इसे रद्द करना पड़ा. यह अन्याय है क्योंकि इसी यूनिवर्सिटी में अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की अनुमति दी जाती है.”
आयोजकों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में ये कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे हैं और इसमें सभी धर्मों के छात्र शामिल हुए थे.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, असम यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रदोष किरण नाथ ने कहा, "हम धार्मिक मामलों में सीधे शामिल नहीं होते, इसलिए हम आधिकारिक रूप से किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दे सकते.”
उन्होंने बीबीसी हिंदी को बताया कि छात्रों को आयोजन करने से मना नहीं किया गया है, बल्कि केवल आधिकारिक अनुमति देने से इनकार किया गया है, ताकि नियमों का पालन किया जा सके.
उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि वे अपने जोखिम पर इसे आयोजित कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी. उन्होंने आधिकारिक अनुमति मांगी थी, जो हम नहीं दे सकते क्योंकि भारत का संविधान हमें किसी धार्मिक आयोजन को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं देता.”
छात्रों ने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की, जिससे बहस छिड़ गई. ज्यादातर लोगों ने यूनिवर्सिटी के फैसले की आलोचना की, जबकि कुछ ने इसका समर्थन किया.
क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और धनश्री का तलाक मंज़ूर, फैमिली कोर्ट ने सुनाया फ़ैसला
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इमेज कैप्शन, क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और धनश्री की शादी दिसंबर 2020 में हुई थी
मुंबई की एक फैमली कोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और धनश्री के तलाक को मंजूरी दे दी.
क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के वकील नितिन कुमार गुप्ता ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात की.
उन्होंने बताया, "कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने दोनों पक्षों की संयुक्त याचिका को स्वीकार करते हुए ये फ़ैसला दिया. अब वो दोनों पति-पत्नी नहीं रहे."
बार एंड बेंच के मुताबिक, तलाक के समझौते के अनुसार, चहल को धनश्री को 4.75 करोड़ रुपये की एलिमनी देनी होगी. यह रकम दो किश्तों में देनी होगी.
क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और धनश्री की शादी दिसंबर 2020 में हुई थी, लेकिन जून 2022 में दोनों अलग हो गए थे.
युजवेंद्र चहल और धनश्री ने 5 फरवरी को आपसी सहमति से तलाक के लिए अदालत में याचिका दायर की थी और कूलिंग-ऑफ पीरियड हटाने की मांग भी की थी.
किसान नेताओं को हिरासत में लेने पर बोले संजय सिंह- ' हालात बिगाड़ने का ज़िम्मेदार केंद्र'
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इमेज कैप्शन, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाने का ज़िम्मेदार केंद्र को ठहराया है
पंजाब में कई किसान नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने केंद्र को ज़िम्मेदार ठहराया है.
संजय सिंह न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से कहा, “सारी स्थिति बिगाड़ने के लिए केंद्र सरकार ज़िम्मेदार है. पूरा देश जानता है कि जब काला क़ानून आया था तब हम लोग किसानों के साथ खड़े हुए थे.”
“उनका मुद्दा (किसान) एमएसपी है और इसकी गारंटी देने का अधिकार केंद्र सरकार को है.”
उन्होंने कहा, “केंद्र एक घंटे के अंदर फ़ैसला ले सकता है. लेकिन उसके कारण से पंजाब के लोगों का महीनों तक रास्ता रोक के रखा जाए तो हमारे किसान भाई ये तय कर लें कि ये कहां तक सही है.”
आप सांसद ने कहा, “आपकी मांग केंद्र सरकार से है और आप पंजाब के लोगों का रास्ता रोक के रखिए ये कहीं से भी उचित नहीं है.”
छत्तीसगढ़: मुठभेड़ में 30 संदिग्ध माओवादियों को मारने का दावा, एक जवान की भी मौत, आलोक पुतुल, रायपुर से बीबीसी हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, छत्तीसगढ़ में माओवादियों की जवानों के साथ मुठभेड़ (सांकेतिक तस्वीर)
भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने अपने एक्स अकाउंट से छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में सुरक्षा बलों की माओवादियों के साथ चली मुठभेड़ में 22 संदिग्ध माओवादियों के मारे जाने की पुष्टि की है.
उन्होंने लिखा, "नक्सलमुक्त भारत अभियान की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है. छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग अभियानों में 22 नक्सली मारे गए."
उन्होंने ये भी लिखा कि मोदी सरकार आत्मसमर्पण ना करने वाले नक्सलियों के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है.
गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सलमुक्त हो जाएगा.
पुलिस ने बताया है कि इस मुठभेड़ में डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड के एक जवान की भी मौत हुई है.
बस्तर के आईजी पुलिस सुंदरराज पी के अनुसार अभी तक 18
माओवादियों के शव बरामद किए जा चुके हैं.
जनवरी से अब तक बस्तर में 72 माओवादी मारे गए हैं. पुलिस ने कहा है
कि मारे जाने वाले माओवादियों की संख्या अभी और बढ़ सकती है.
बस्तर पुलिस ने एक बयान में कहा है कि बीजापुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर थाना गंगालूर इलाके़ में सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम निकली थी, जहां सुबह माओवादियों के साथ मुठभेड़ शुरू हुई.
पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद के साथ दो माओवादियों के शव भी बरामद किए गए हैं.
उधर, एक अन्य घटना में नारायणपुर-दंतेवाड़ा की सीमा पर थुलथुली इलाके
में आईडी ब्लास्ट की चपेट में आने से दो जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
दोपहर के दो बज चुके हैं. अभी तक बीबीसी संवाददाता इफ़्तेख़ार अली आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे.
अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता कीर्ति रावत आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगी.
बीबीसी हिंदी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें नीचे दिए लिंक्स पर क्लिक करके आप पढ़ सकते हैं.
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के दो भांजों के बीच गोलीबारी, एक की मौत, सीटू तिवारी, बीबीसी संवाददाता
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इमेज कैप्शन, नवगछिया एसपी प्रेरणा कुमार
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय के दो भांजों के बीच हुई गोलीबारी में एक की मौत हो गई.
घटना बिहार के नवगछिया के जगतपुर गांव की है जहां नित्यानंद राय के दो भांजों में पानी को लेकर विवाद हुआ था.
बताया जा रहा है कि नित्यानंद राय की चचेरी बहन हिना यादव के दो बेटे विश्वजीत उर्फ़ बिक्कल यादव और जयजीत यादव के बीच पानी को लेकर विवाद हुआ.
ये विवाद इतना बढ़ा कि इसमें गोलीबारी हुई. घटना में गोली लगने से विश्वजीत यादव की मौत हो गई वहीं जख्मी जयजीत यादव का इलाज चल रहा है.
इस विवाद में बीच बचाव करने आईं नित्यानंद राय की चचेरी बहन हिना यादव के हाथ में भी गोली लगने की ख़बर है. हिना यादव और जयजीत यादव का इलाज भागलपुर के एक निजी नर्सिंग होम में चल रहा है.
मुखिया प्रदीप यादव ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा, "गोली चली, कैसे चली ये जानकारी नहीं है. लेकिन पानी को लेकर विवाद हुआ था. जिसमें भाई-भाई में गोली चली है."
नवगछिया एसपी प्रेरणा कुमार ने बताया, “पुलिस को सुबह आठ बजे इस घटना की सूचना मिली थी. जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी."
"गोलीबारी घटना में मृत व्यक्ति का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है. प्रथम दृष्टया नल को लेकर विवाद सामने आ रहा है. हम लोग बयान दर्ज कर रहे हैं, जिसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी. एफएसएल भी घटना पर मौजूद है जिसमें एक गोली और एक खोखा बरामद हुआ है."
प्रदर्शन कर रहे कई किसान हिरासत में लिए गए, क्या हैं अभी हालात? देखिए शंभू बॉर्डर से लाइव
बुधवार की रात पंजाब पुलिस ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की क़ानूनी गारंटी समेत कई अन्य मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंढेर को हिरासत में ले लिया है.
शंभू बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों को पुलिस ने हटाया है, प्रदर्शन कर रहे कई किसान हिरासत में लिए गए हैं. शंभू बॉर्डर से देखिए लाइव.
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चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतने पर भारतीय टीम के लिए बीसीसीआई ने की इनाम की घोषणा
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इमेज कैप्शन, भारतीय क्रिकेट टीम के लिए बीसीसीआई ने नक़द इनाम का एलान किया है.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतने वाली भारतीय टीम के लिए नक़द इनाम की घोषणा की है.
बीसीसीआई की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक़ भारतीय टीम को 58 करोड़ रुपये नकद पुरस्कार बीसीसीआई की तरफ़ से दिया जाएगा.
बयान के कहा गया कि यह वित्तीय पुरस्कार खिलाड़ियों, कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ़ और मेंस सेलेक्शन कमेटी के सदस्यों को सम्मानित करता है.
आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराकर ख़िताब अपने नाम किया था.
बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने कहा, "लगातार दो बार आईसीसी ख़िताब जितना ख़ास बात है और यह पुरस्कार वैश्विक मंच पर टीम इंडिया के समर्पण और उत्कृष्टता को मान्यता देता है."
"नकद पुरस्कार उस कड़ी मेहनत की मान्यता है जो हर कोई मैदान के बाहर रहकर करता है."
हिंसा के बाद नागपुर में कैसे हैं हालात? कलेक्टर ने क्या बताया
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नागपुर में हिंसा के बाद क़ानून व्यवस्था की स्थिति और वहां के ताज़ा हालात पर कलेक्टर डॉक्टर विपिन इटनकर ने जानकारी दी है.
कलेक्टर ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "हिंसा के बाद सामान्य स्थिति बहाल हो गई है, लेकिन कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगा हुआ है. हम इस मामले में पुलिस के संपर्क में हैं. "
उन्होंने बताया कि शुरुआती आकलन के मुताबिक़, 50-60 दोपहिया वाहन, 10-15 चार पहिया वाहन, क्रेन और 5-10 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि आंकड़े बढ़ सकते हैं लेकिन हमारी एक ही कोशिश है कि जिन्हें भी नुक़सान हुआ है उनमें से एक भी लोगों को पंचनामा से छोड़ा नहीं जाए.
नागपुर के महाल इलाके में सोमवार, 17 मार्च की रात दो गुटों के बीच झड़प और पत्थरबाजी की घटना हुई थी.
ग़ज़ा पर हमलों के बीच हूती विद्रोहियों ने इसराइल पर दागी मिसाइल
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इमेज कैप्शन, बैलिस्टिक मिसाइल को तेल अवीव के नज़दीक बेन गुरियन हवाई अड्डे की ओर दागा गया है
यमन के हूती समूह ने इसराइल पर दागी गई मिसाइल की ज़िम्मेदारी ली है, जिसे इसराइल ने रोक दिया है.
इस समूह के सैन्य प्रवक्ता ने टेलीविजन पर दिए गए बयान में कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल तेल अवीव के नज़दीक बेन गुरियन एयरपोर्ट की ओर दागी गई है.
इसराइली सुरक्षा बल ने कहा कि इसराइल के कुछ इलाक़ों में सायरन बजने लगे. इसमें किसी के भी घायल होने की ख़बर नहीं है.
इस बीच, ग़ज़ा की हमास संचालित नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि गुरुवार सुबह इसराइली हमलों में कम से कम 10 लोग मारे गए हैं.
इसराइल ने हवाई हमलों के बाद ग़ज़ा में ज़मीनी अभियान तेज़ कर दिया है.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दो दिनों में इसराइली हमलों में 430 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
कनाडा के 4 नागरिकों को चीन ने दी मौत की सज़ा, कनाडा की विदेश मंत्री ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, अधिकारियों का कहना है कि चारों कनाडाई नागरिक दोहरी नागरिकता वाले थे
चीन ने इस साल के शुरुआत में मादक पदार्थ से संबंधित आरोपों में चार कनाडाई नागरिकों को मृत्यु दंड दिया है.
कनाडा के अधिकारियों ने इस ख़बर की पुष्टि की है.
कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि उन सभी के पास दो देशों की नागरिकता थी और उनके परिवारों के अनुरोध पर उनकी पहचान गुप्त रखी गई है.
विदेश मंत्री ने निंदा करते हुए कहा कि ये मौलिक मानवीय गरिमा के विपरीत है, साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने 'व्यक्तिगत रूप से दया की अपील की थी.'
रिपोर्टों के मुताबिक़, कनाडा स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि कनाडाई नागरिकों के अपराधों के सबूत 'ठोस और काफ़ी' थे और उन्होंने कनाडा से 'गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां करना बंद करने' का आग्रह किया.
चीनी दूतावास ने यह भी कहा कि बीजिंग ने "संबंधित कनाडाई नागरिकों के अधिकारों और हितों की पूरी गारंटी दी है."
चीनी प्रवक्ता ने साथ ही कनाडा सरकार से 'चीन की न्यायिक संप्रभुता' का सम्मान करने का आग्रह किया है.