
आयरलैंड के एक अस्पताल में भारतीय मूल की गर्भवती महिला क्लिक करें सविता हलप्पनवार की मौत के मुद्दे पर आयरलैंड सरकार पर दबाव बनाते हुए भारत सरकार ने कहा है कि वो इस मामले पर लगातार नज़र बनाए हुए है और घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
भारत इस मामले की आयरिश अधिकारियों द्वारा कराई जा रही दो जांचों के परिणामों का इंतज़ार कर रहा है.
इस बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने बताया कि आयरलैंड स्थित भारतीय राजदूत स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात करेंगे.
समाचार एजेंसी एएफपी ने सैयद अकबरुद्दीन के हवाले से कहा, ''हमें उम्मीद है कि आयरलैंड सरकार भारतीय राजदूत को आश्वस्त करेगी कि इस मामले में स्पष्ट, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाएगी.''
वो कहते हैं, ''भारतीय राजदूत आयरलैंड के अधिकारियों से अनुरोध करेंगे कि भारतीय पक्ष को इस मसले पर सूचित किया जाए और जांच के नतीजों से उन्हें तुरंत अवगत कराया जाए.''
आम लोग सड़कों पर
"हमें उम्मीद है कि आयरलैंड सरकार भारतीय राजदूत को आश्वस्त करेगी कि इस मामले में स्पष्ट, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाएगी. भारतीय राजदूत आयरलैंड से अधिकारियों से अनुरोध करेंगे कि भारतीय पक्ष को इस मसले पर सूचित किया जाता रहे और जांच के नतीजों के बारे में तुरंत अवगत कराया जाए."
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन
सैयद अकबरुद्दीन के मुताबिक भारतीय राजदूत आयरलैंड के अधिकारियों को इस बात की जानकारी भी देंगे कि भारतभर में इस मामले को लेकर आम लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं.
सविता हलप्पनवार की इस वर्ष 28 अक्तूबर को मौत हुई थी. परिवार वालों का कहना है कि सविता गर्भपात कराने की मांग कई बार कर चुकी थीं. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. उनके पति ने बीबीसी को बताया कि डॉक्टरों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था क्योंकि सविता का भ्रूण जीवित था.
31 साल की भारतीय मूल की सविता हलप्पनवार यहां डेंटिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं.
इस बीच, सविता की मौत पर भारतीय जनता पार्टी की कड़ी प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि इस तरह की त्रासदी पर बोलते शब्दों का सावधानीपूर्वक चयन किया जाना चाहिए. भाजपा की महिला मोर्चा प्रमुख स्मृति ईरानी ने कहा था कि आयरलैंड के डॉक्टरों ने धार्मिक पद्धति को अपने कर्तव्य से बढ़कर माना.
गर्भपात गैरकानूनी

भारतीय मूल की गर्भवती महिला सविता हल्लपनवार की मौत के बाद आयरलैंड के गर्भपात क़ानूनों में बदलाव की मांग की जा रही है.
आयरलैंड में गर्भपात अब तक गैरकानूनी है, हालांकि अपवादस्वरूप बच्चे की मां पर जीवन का ख़तरा आने पर इसे कराया जा सकता है.
सविता के पति प्रवीण के मुताबिक उनकी पत्नी को जब लगातार दर्द जारी था, तब वह गर्भपात कराने को कहती रहीं लेकिन अस्पताल वालों ने यह कह मना कर दिया कि कैथोलिक देश में उन्हें गर्भपात नहीं कराना चाहिए.
प्रवीण के मुताबिक सविता ने चिकित्सकों से कहा भी कि वह हिंदू है, कैथोलिक नहीं तो उन पर यह कानून क्यों थोपा जा रहा है. ऐसे में चिकित्सक ने माफ़ी मांगते हुए कहा- दुर्भाग्य से यह एक कैथोलिक देश है और यहां के कानून के मुताबिक हम जीवित भ्रूण का गर्भपात नहीं करेंगे.
इस बीच सविता की मौत ने आयरलैंड में गर्भपात कानूनों को लेकर फिर बहस छेड़ दी है. आयरिश प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने संसद में इस घटना के बारे में बयान दिया और सविता के पति तथा परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई. सरकार का कहना है कि वह देश में गर्भपात के नियमों को स्पष्ट बनाएगी.
भारत सहित आयरलैंड में भी सविता की मौत के खिलाफ़ सरकार के प्रति नाराज़गी ज़ाहिर करने के लिए बड़ी संख्या में लोग सकड़ों पर उतरे हैं. दोनों देशों में लोगों ने मोमबत्ती जलाकर सविता और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं.








