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सऊदी अरब में क्या भारत के लिए है ये बैठक, इसराइल को बुलावा नहीं
अमेरिका, यूएई और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) रविवार को सऊदी अरब पहुँचे हैं.
सऊदी अरब की समाचार एजेंसी एसपीए ने यूएई के एनएसए शेख़ ताहनौन बिन ज़ाएद अल नाह्यान, अमेरिका के जैक सुलिवन और भारत के अजीत डोभाल के पहुँचने की पुष्टि की है.
सऊदी अरब ने कहा है कि तीनों देशों के एनएसए इस इलाक़े में स्थिरता और सुरक्षा के लिए बात करेंगे.
अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों देशों के एनएसए खाड़ी और अरब को देशों को रेल प्रोजेक्ट से जोड़ने पर बात करेंगे.
रिपोर्ट में बताया गया है कि अरब और खाड़ी के देशों को भारत से शिपिंग और पोर्ट के ज़रिए जोड़ा जाएगा.
इसराइली मीडिया में भी सऊदी अरब में तीनों देशों के जुटने की चर्चा है.
टाइम्स ऑफ़ इसराइल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इसराइल के अहम सहयोगी बड़े इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर बातचीत के लिए सऊदी अरब पहुँचे हैं,
लेकिन इनमें इसराइल नहीं है.
टाइम्स ऑफ़ इसराइल की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सऊदी अरब से अरब के देशों को रेल और पोर्ट नेटवर्क से भारत को जोड़ने पर बात करेंगे.
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I2U2 का एजेंडा
कहा जा रहा है कि भारत को अरब के देशों से जोड़ने की बात I2U2 की बैठक में ही सामने आई थी.
I2U2 गुट में इसराइल, भारत के अलावा अमेरिका और यूएई हैं. लेकिन दिलचस्प है कि सऊदी अरब की इस बैठक में इसराइल के एनएसए शामिल नहीं हैं.
I2U2 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बनाया था. कहा जा रहा था कि आने वाले वक़्त में सऊदी अरब भी इसमें शामिल हो जाएगा, लेकिन दो साल के बाद भी ऐसा नहीं हो पाया है.
हुआ यह कि चीन ने सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनयिक रिश्ता बहाल करवा दिया. दूसरी ओर सऊदी अरब अब भी इसराइल को लेकर सहज नहीं हुआ है.
इसराइल के विदेश मंत्री एली कोहेन सोमवार को भारत पहुँच रहे हैं. इसराइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एली कोहेन की मुलाक़ात भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से होगी.
11 अप्रैल को अमेरिकी एनएसए सुलिवन की बातचीत सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से हुई थी.
सुलिवन की मुलाक़ात क्राउन प्रिंस से भी हो सकती है. इसराइली मीडिया में कहा जा रहा है कि सुलिवन क्राउन प्रिंस से सऊदी को इसराइल से रिश्ते सामान्य करने के लिए कह सकते हैं.
सुलिवन ने पिछले गुरुवार को वॉशिंगटन इंस्टिट्यूट फ़ॉर नीयर ईस्ट पॉलिसी के एक कार्यक्रम में संकेत दिया था कि खाड़ी के देशों और भारत के बीच सहयोग को मज़बूत किया जाएगा और अमेरिका भी इसमें मिलकर काम करेगा.
पिछले साल गर्मियों में राष्ट्रपति जो बाइडन ने सऊदी अरब का दौरा किया था. इसके बाद किसी भी वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के रूप में सुलिवन का यह पहला दौरा है.
चीन से चिंता
सुलिवन का सऊदी दौरा तब हो रहा है, जब कहा जा रहा है कि पश्चिम एशिया में चीन का प्रभाव तेज़ी से बढ़ रहा है.
सुलिवन के बाद जून में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन सऊदी अरब जाने वाले हैं.
चीन बेल्ट रोड इनिशिएटिव परियोजना के ज़रिए पश्चिम एशिया में कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है.
I2U2 अमेरिका की पहल थी और भारत को पश्चिम एशिया से रेल के साथ पोर्ट नेटवर्क से जोड़ने की योजना को भी I2U2 का ही हिस्सा बताया जा रहा है.
इसराइली मीडिया में इस बैठक को लेकर कहा जा रहा है कि चीनी प्रोजेक्ट भारत के लिए ख़तरे के रूप में उभरे हैं.
कहा जा रहा है कि चीन अफ़्रीका, मध्य-पूर्व, मध्य एशिया और यूरोप के सारे ट्रेड रूट को अपने नियंत्रण में करने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिका के अगुआई वाले I2U2 गुट में इसराइल एक स्वाभाविक साझेदार है.
यूएई और इसराइल के बीच रेल नेटवर्क से भारत को सीधा फ़ायदा होगा.
भारत इस नेटवर्क के ज़रिए अपना सामान सऊदी अरब और जॉर्डन पहुँचा सकता है.
भारत के चर्चित उद्योगपति अदानी ने इसराइल का हाफ़िया पोर्ट पहले ही ले लिया था.
हाफ़िया पोर्ट के बाद भारत अपना उत्पाद ग्रीस के पैरियस पोर्ट पहुँचा सकता है, जो यूरोप का सबसे बड़ा पोर्ट है.
अगर यह संभव होता है तो भारत को पूरे यूरोप में पहुँच मिल सकती है.
भारत और यूएई के बीच आर्थिक संबंध पहले से ही गहरे हैं. यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है.
पिछले साल इंडिया-यूएई फ़ूड कॉरिडोर के लिए यूएई की कंपनियों ने अरबों डॉलर का निवेश किया था.
यूएई खाद्य सुरक्षा को लेकर भारत के साथ मिलकर कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है.
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सऊदी को भी I2U2 में लाने की कोशिश
कहा जा रहा है कि भारत मध्य-पूर्व का ब्रेडबास्केट बनना चाहता है और इसराइल को भारत के इस लक्ष्य में अहम सहयोगी माना जा रहा है.
अमेरिकी वेबसाइट एक्सिओस ने लिखा है कि अमेरिका मध्य-पूर्व में चीन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है क्योंकि मध्य-पूर्व चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ड एंड रोड का अहम हिस्सा है.
इसराइल के एक सीनियर अधिकारी ने एक्सिओस से कहा कि कोई भी यह बात खुलकर नहीं कर रहा है, लेकिन चीन अहम चिंता है.
एक्सिओस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''पिछले साल I2U2 की बैठक में इसराइल ने इलाक़े को रेल नेटवर्क से जोड़ने का आइडिया दिया था. एक पूर्व इसराइली अधिकारी ने कहा कि इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में भारत की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा. बाइडन चाहते हैं कि I2U2 के आइडिया में सऊदी अरब को भी शामिल किया जाए.''
सुलिवन का कहना है कि दक्षिण एशिया को मध्य-पूर्व और अमेरिका से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है.
कॉपी - रजनीश कुमार
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