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तुर्की: भूकंप से बचे पर खुले आसमान के नीचे ठंड में कैसे रहेंगे लोग
- Author, टॉम बेटमैन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, तुर्की
सूरज निकलने से पहले हड्डियां जमाने वाली ठंड के बीच हम तुर्की के अडाना शहर में भूकंप से गिरी दस मंज़िला इमारत की ओर निकले.
वहाँ मुझे मलबे का ढेर बन चुकी इमारत की ओर जाती दो महिलाएं मिलीं.
उम्मू बेराकटर और नज़ीफ़े बैतमाज़ शहर की एक मस्जिद में रह रही हैं. ये मस्जिद इस शहर में भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य का केंद्र बनी हुई है.
मस्जिद के पास ही उनका ज़मींदोज़ हुआ घर है. चलते-चलते हम उन दोनों से बात कर रहे हैं. उम्मू अपने एक कज़न को खोजने उसके घर जा रही हैं.
हमारे साथ चल रहा एक व्यक्ति हमें आगाह करता है कि आधी गिरी हुई इमारतें के क़रीब से न गुज़रें. वो शख़्स कहता है, "ये इमारतें कभी भी भरभरा कर गिर सकती हैं."
आँखों से आंसू बहे जा रहे हैं...
पास की इमारत में दो लोग मलबे को हटाने की कोशिश करते दिख रहे हैं. छह लोग मलबा उठाकर किनारे कर रहे हैं.
हम एक गली में दाखिल होते हैं जहां भूकंप के बचे लोगों का एक समूह कंबल लपेटे प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठ हुआ है. साथ ही अलाव जल रहा है.
वहां हमें नुर्तन मिलीं. वो भयानक ठंड में एक कंबल में लिपटी हैं. नुर्तन ख़ामोश बैठी हैं और उनकी आँखों से आंसू बहे जा रहे हैं.
नुर्तन की बेटी सेनाई इमारत की दूसरी मंज़िल पर थीं. नुर्तन दिन-रात अपनी बेटी के मिलने का इंतज़ार करती रहती हैं. लेकिन अब तक उन्हें अपनी बेटी की कोई खोज ख़बर नहीं मिली है.
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नुर्तन रोते हुए कहती हैं, "जब मेरी बिटिया कहीं ठंड में मलबे के नीचे पड़ी तो मैं कैसे यहां गर्म कंबल में बैठी रह सकती हूँ. या अल्लाह मेरी बेटी को ठंड से सख़्त नफ़रत थी. अब वो इमारत के नीचे दबी पड़ी है. मेरा दिल जल रहा है."
पास ही ड्रिलिंग और खुदाई की आवाज़ें आ रही हैं. नुर्तन के दोस्त उन्हें दिलासा दे रहे हैं.
नुर्तन की बेटी की ख़ुद की दो बेटियां हैं. वे दोनों विदेश में पढ़ रही हैं. अब वो दोनों वापस तुर्की आने का प्रयास कर रही हैं.
नुर्तन कहती हैं, "मैं उन बेटियों को क्या बताऊंगी? वो आज पहुँच जाएंगी. मैं उनसे क्या कहूँगी? उन दोनों ने अपनी माँ मेरे हवाले छोड़ा था."
बचे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के साथ-साथ यहां अपना सबकुछ लुट जाने का अहसास भी ज़बरदस्त तरीके से सामने आ रहा है.
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मां-बाप मलबे के नीचे पर बचाने वाला कोई नहीं
तुर्की के दक्षिण में, सीरिया की सरहद के करीब हटाय शहर में तबाही की और कई ख़बरें आ रही हैं. ये इलाक़ा भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है.
वहां से आए वीडियो फ़ुटेज में स्थानीय लोग मलबे में अपनों को खोजते दिख रहे हैं. एक व्यक्ति को लग रहा है कि मलबे के नीचे कोई ज़िंदा इंसान है.
वो शख़्स कहता है, "ज़ोर से आवाज़ लगाओ." वो आगे कहता है, "जैसाकि आप देख सकते हैं. यहां एक शव है. इसे किसी ने यहां से हटाया नहीं है. और नीचे से एक महिला की आवाज़ सुनाई दे रही है."
अभी ये व्यक्ति बोल ही रहा था कि एक बार फिर मलबे के नीचे दबी महिला ने ज़ोर से आवाज़ लगाई. इसके बाद उसके रोने की आवाज़ आने लगी.
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महिला बचाव कर्मियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए ज़ोर-ज़ोर मेटल पर चोट करने लगती है. सारा का सारा घर ज़मींदोज़ है और इसका मलबा हटाने के लिए हेवी मशीनरी चाहिए होगी.
ये कहानी मलबे के नीचे दबे लोगों की अनुत्तरित आवाज़ों की है और ये क़िस्सा पूरे इलाक़े में बार-बार दोहराया जा रहा है.
हटाय शहर के एक नागरिक डेनिज़ एक गिरी हुई इमारत की ओर इशारा करते हुए बताया कि वहां नीचे के मां-बाप फंसे हुए हैं.
वे पूछते हैं, "मलबे के नीचे से उनकी आवाज़ें आ रही हैं लेकिन उन्हें बचाने कोई नहीं आ रहा है. हम तबाह हो हो गए हैं. उनकी आवाज़ें थम नहीं रही है. वे कह रहे हैं कि हमें बचा लो. लेकिन हम उन्हें बचा नहीं पा रहे हैं. हम उन्हें कैसे बचा पाएंगें?"
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भूकंप के केंद्र के करीब कहरामनमरास शहर में अलाव जल रहा है. वहां हज़ारों इमारतें भूकंप की ताक़त से भरभरा कर गिर चुकी हैं. इस शहर में बेघरबार लोगों की तादाद भी बहुत है.
वहां एक जगह एक परिवार बैठा है. उनकी हिम्मत नहीं कि वो अपने गिरे हुए घर के क़रीब जाएं. ये अलाव ही उनके लिए अब एक सुरक्षा का कवच है. आग की लपटें उनके हाथों को कुछ को गर्माहट दे रही हैं.
नेसेत गुलेर कहते हैं, "हम बड़ी मुश्किल से बचे हैं. हम अंतिम समय में अपने चार बच्चों के साथ, जैसे-तैसे बाहर निकले. ये एक बड़ी तबाही है. अब हम बिना पानी और भोजन के यहां बैठे हैं और राहत का इंतज़ार कर रहे हैं."
यहाँ सबको राहत का इंतज़ार है लेकिन जितनी तबाही हुई है इस मात्रा में राहत दे पाना असंभव है.
और इस बीच कई अधगिरी इमारतें कभी भी गिर सकती हैं. तब तक अलाव का गर्माहट ही ठंड से बचने का एकमात्र सहारा है.
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