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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस क्या महारानी के अंतिम संस्कार में जाएंगे?
- Author, लॉरेंस पीटर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सोमवार को ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होने की उम्मीद नहीं है.
ब्रितानी विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्र ने इस बारे में जानकारी दी है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक सूत्र के हवाले से बताया है कि ये बदलाव सऊदी सरकार की ओर से किया गया है.
पिछले कुछ दिनों से मानवाधिकार समूहों की ओर से मोहम्मद बिन सलमान को न्योता दिए जाने का विरोध किया जा रहा था.
पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियां मोहम्मद बिन सलमान पर साल 2018 में सऊदी अरब के पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या करवाने का आरोप लगाती हैं.
हालांकि, इससे पहले सऊदी अरब के दूतावास ने बताया था कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस हफ़्ते के अंत में लंदन पहुंचेंगे. लेकिन विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्र ने बताया है कि सऊदी अरब के एक अन्य वरिष्ठ नेता प्रिंस तुर्की अल-फ़ैसल लंदन पहुँच सकते हैं.
वीगर मुसलमानों के साथ चीन के ख़राब व्यवहार की वजह से चीन को निमंत्रण दिया जाना भी विवाद का विषय बना है. चीन ने पुष्टि की है कि उनके उपराष्ट्रपति वांग चिशान इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लंदन पहुंचेंगे.
बीबीसी रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का विश्लेषण
सीआईए की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि साल 2018 में तुर्की के इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्यिक दूतावास में सऊदी अरब के पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या कर दी गई थी और उनके शव को टुकड़ों में काट दिया गया था.
रिपोर्ट के अनुसार, ये हत्या सऊदी क्राउन प्रिंस के आदेश पर हुई थी.
सऊदी क्राउन प्रिंस और सऊदी अरब सरकार ने इन आरोपों को ख़ारिज किया था. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से पश्चिमी देशों में उन्हें एक ज़ालिम शासक के रूप में देखा गया और उसके बाद से अब तक उन्होंने ब्रिटेन का दौरा भी नहीं किया था.
जमाल ख़ाशोज्जी की मंगेतर हेतीज चंगेज़ ने कहा है कि ये निमंत्रण महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की याद पर एक धब्बे की तरह होगा. उन्होंने कहा कि जब सऊदी युवराज लंदन की ज़मीन पर उतरें तो उन्हें गिरफ़्तार किया जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें संशय है कि ऐसा कभी हो सकेगा.
वहीं, कैंपेन अगेन्स्ट द आर्म्स ट्रेड नाम के संगठन ने सऊदी क्राउन प्रिंस और खाड़ी देशों के दूसरे तानाशाह मुल्कों पर महारानी की अंत्येष्टि के कार्यक्रम का इस्तेमाल अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड्स को "ढँकने" के लिए करने का आरोप लगाया है.
इस संगठन का कहना है कि आठ साल पहले यमन में शुरू हुए तबाही के युद्ध से लेकर अब तक ब्रिटेन सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन को 23 अरब डॉलर के हथियार दे चुका है.
साल 2017 में मोहम्मद बिन सलमान क्राउन प्रिंस बने थे. तब से लेकर अब तक देश के नेताओं को थोड़ी-बहुत राजनीतिक स्वतंत्रता मिली हुई थी वो भी अब ख़त्म हो गई है. सरकार की आलोचना करने वालों यहाँ तक कि सोशल मीडिया पर इस तरह का पोस्ट डालने वालों को भी यहाँ जेल की सज़ा दी जाती है.
लेकिन विडंबना ये है कि ऐसे वक़्त में एक तरफ़ जहाँ लोगों की आज़ादी छीनने की ख़बरें मिल रही हैं. वहीं, क्राउन प्रिंस ने सामाजिक उदारीकरण की एक मुहिम शुरू की है.
देश में लंबे वक़्त से सिनेमा और सार्वजनिक स्थलों पर मनोरंजन की सुविधाओं पर लगी रोक को हटा दिया गया है.
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