ब्रिटेनः लिज़ ट्रस ने भारतीय मूल की सांसद को बनाया गृह मंत्री, प्रीति पटेल की लेंगी जगह

    • Author, गगन सब्बरवाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन

ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने बिना समय गंवाए, अपने नए कैबिनेट की नियुक्ति कर दी है. उन्होंने इसमें भारतीय मूल की सुएला ब्रेवरमैन को शामिल किया है जो अब ब्रिटेन की गृह मंत्री बन गई हैं. इससे पहले बोरिस जॉनसन सरकार में भी गृह मंत्रालय भारतीय मूल की ही महिला सांसद प्रीति पटेल के पास था.

लिज़ ट्रस के क़रीबी दोस्त क्वाज़ी क्वारटेंग को चांसलर यानी वित्त मंत्री बनाया गया है. वो नदीन ज़हाली के बाद पद संभालेंगे. उन्हें बोरिस जॉनसन ने ऋषि सुनक के इस्तीफ़े के बाद नियुक्त किया था और वो बहुत दिनों तक इस पद पर काबिज़ नहीं थे. क्वाज़ी क्वारटेंग पहले व्यापार मंत्री के पद पर थे.

क्वारटेंग का जन्म 1975 में वॉल्थम फ़ॉरेस्ट, लंदन में हुआ था और वह अल्फ्रेड के. क्वार्टेंग और शार्लट बोएटे-क्वार्टेंग की एकमात्र संतान हैं, जो 1960 के दशक में घाना से यूके बतौर छात्र आए थे. उनकी मां एक बैरिस्टर हैं और उनके पिता एक अर्थशास्त्री.

क्वार्टेंग ने ब्रिटेन के प्रतिष्ठित स्कूल- ईटन कॉलेज से पढ़ाई की है. इसी कॉलेज से डेविड कैमरन और बोरिस जॉनसन सहित ब्रिटेन के 20 प्रधानमंत्रियों ने पढ़ाई की है.

इसके अलावा ट्रस ने अपने लंबे समय की सहयोगी, टेरेसा कैफ़ को देश का स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त किया है. वो पीएम द्वारा नियुक्त की गईं पहली शख़्स थीं और वो उप प्रधानमंत्री का पद भी संभालेंगी.

विदेश मंत्रालय की कमान जेम्स क्लेवर्ली के हाथों में दी गई है. इसी पद पर पहले खुद ट्रस थीं. 1971 में जन्मीं टेरेसा कैफ़ लिवरपूल में पली-बढ़ीं. उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से केमिस्ट्री में पीएचडी की और अंतरराष्ट्रीय कंपनी मार्स में काम किया.

चार्टर्ड मैनेजमेंट अकाउंटेंट बनने के बाद उन्होंने मार्स में कई पदों पर काम किया और मार्स ड्रिंक्स यूके की फ़ाइनैंस डायरेक्टर भी बनीं. उन्होंने बीबीसी में भी फ़ाइनैंस मैनेजर के पद पर काम किया.

इन नियुक्तियों को देखें तो ट्रस के कैबिनेट की विविधता साफ़ झलकती है, ब्रितानी राजनीति में ऐसा पहली बार हुआ है कि सबसे बड़े मंत्रालयों में एक भी श्वेत आदमी नहीं है.

ब्रिटेन में सबसे वरिष्ठ मंत्रालयों को ग्रेट ऑफ़िसेस ऑफ़ द स्टेट कहते हैं, इनमें पीएम का दफ्तर, वित्त मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय शामिल हैं. 2001 की तुलना में इस बार ये बिल्कुल अलग है. तब 91 प्रतिशित सांसद मर्द थे और सभी श्वेत थे.

भारतीय मूल की सुएला ब्रेवरमेन ने ग्रेट ऑफ़िसेस ऑफ स्टेट में से एक की कमान अपने हाथ में ली है. पहले वो कन्ज़रवेटिव पार्टी की नेता बनने की दौड़ में भी शामिल थीं.

कौन हैं सुएला ब्रेवरमेन?

42 साल की सुएला ब्रेवरमेन का पैदाइशी नाम सु-एलेन-कैसिआना ब्रेवरमैन था. उनके पिता केन्या के क्रिस्टी फ़र्नान्डिस मूल रूप से गोवा के हैं. मां मॉरीशस की उमा फ़र्नान्डिस मूल रूप से हिंदू तमिल हैं, उनकी मां मॉरीशस से ब्रिटेन पहुंची थीं और पिता 1960 में केन्या से.

सुएला का जन्म लंदन के हैरो में हुआ था लेकिन वो पली बढ़ीं उत्तर-पश्चिम लंदन के वेम्ब्ली ले में. वो अपने माता पिता की इकलौती संतान हैं, जो अपनी बेटी को लेकर बहुत महत्वाकांक्षी थे.

क्रिस्टी कई सालों तक एक हाउसिंग एसोसिएशन में काम करते थे और उमा ने बतौर नर्स 45 सालों तक एनएचएस में काम किया. दोनों अस्सी के दशक में कन्ज़रवेटिव पार्टी से जुड़े और वेम्बली में स्थानीय समुदाय के बीच काम किया. उमा 16 सालों तक काउंसलर रहीं और क्रिस्टी एक कैम्पेनर की तरह काम करते थे.

पार्टी के नेता के चुनाव की प्रक्रिया के दौरान आईटीवी को दिए एक इंटरव्यू में ब्रेवरमैन ने कहा था, "मैं इस देश से बहुत प्यार करती हूं, मेरे माता-पिता यहां खाली हाथ आए थे और ब्रिटेन ने उन्हें उम्मीद दी, सुरक्षा दी और मौके दिए. इस देश ने मुझे कई मौके दिए हैं, शिक्षा में और करियर में. मैं इस देश की कर्ज़दार हूं और इस देश के पीएम बनाने मेरे लिए सम्मान की बात होगी."

ब्रेवरमैन ने एक स्कॉलरशिप मिलने के बाद एक सरकार स्कूल में पढ़ाई की और फिर लंदन के हीथफ़ील्ड स्कूल पहुंची. इसके बाद वो क़ानून की पढ़ाई करने केम्ब्रिज के क्वीन्स कॉलेज गईं और फिर पेरिस के एक कॉलेज से कानून में मास्टर्स डिग्री ली. इसके बाद वो न्यूयॉर्क में अटॉर्नी बनीं.

सुएला ब्रेवरमैन पब्लिक लॉ और जूडिशियल रिव्यू में विशेषज्ञ हैं और ब्रिटेन के गृह मंत्रालय की तरफ़ से इमिग्रेशन मामले में लड़ चुकी हैं. फ़रवरी 2018 में उन्होंने राएल ब्रैवरमेन से शादी की जो मर्सिडीज़ कंपनी में मैनेजर थे. उनके दो बच्चे हैं जिनका जन्म 2019 और 2021 में हुआ था.

सुएला ब्रेवरमैन मई 2015 में कन्ज़रवेटिव सांसद बनीं और टेरेसा मे ने उन्हें पहली बार मंत्री का पद दिया. उन्हें 2018 में ब्रेग्ज़िट मंत्री बनाया गया था. लेकिन वो बहुत दिनों तक पद पर नहीं रही, नवंबर 2018 में उन्होंने इस्तीफ़ा दिया.

लेकिन फ़रवरी 2022 में बोरिस जॉनसन उन्हें वापस लेकर आए, उन्हें क्वीन्स काउंसिल बनाया गया. क्वीन्स काउंसिल का पद एक तरह से बेहतरीन काम के लिए सम्मान है और एक सॉलिसिटर को दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान.

ब्रैवरमेन कैबिनेट मंत्री रहते हुए मैटरनिटी लीव लेने वालीं पहली महिला भी थी, जब कानून में संशोधन किया गया ताकि कैबिनट मंत्री को पद पर रहते हुए मैटरनिटी लीव की पगार मिले, पहले ऐसी स्थिति में मंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ता था.

ब्रैवरमेन की अलग-अलग मुद्दों पर क्या राय है?

ब्रैवरमेन ब्रेक्सिट के पूरी तरह से समर्थन में हैं और हाल ही में उन्होंने कहा था कि उन्हें "यूरोपीय कोर्ट के मानवाधिकारों के साथ अपने रिश्तें को लेकर आश्वत नहीं है."

ये बात उन्होंने उन्होंने तब कही थी जब यूरोपीय कोर्ट ने फ़ैसला लिया था कि शरण चाहने वाले लोगों को ब्रिटेन से बाहर जाने वाली फ़्लाइट को रोकने का आदेश दिया गया था.

ब्रेवरमैन ने पहले कहा था कि स्कूलों को ट्रांसजेंडर बच्चों के आवेदनों को मानने की ज़रूरत नहीं है, अगर वो अपना नाम, सर्वनाम या फिर ड्रेस को बदलने की मांग करते हैं. उन्होंने कहा था कि स्कूलों को उन्हें उसी जेंडर का मानना चाहिए जिसमें वो पैदा हुए हैं और बदलाव सिर्फ एक "स्वतंत्र मेडिकल प्रैक्टिशनर के कहने पर" करना चाहिए.

इस साल की शुरुआत में उनकी यह कहने के लिए भारी आलोचना की गई थी कि वह विचार कर रही थीं कि क्या उन चार लोगों के मामले को अदालत के समक्ष रखा जाए या नहीं जिन्होंने एडवर्ड कॉल्सटन की मूर्ति को तोड़ा था.

ब्रेवरमैन की इस साल के शुरुआत में तब भी आलोचना हुई थी उन्होंने गृह मंत्रालय को सबसे कठिन विभाग माना जाता है और सुएला ब्रेवरमैन से सामने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और दूसरे तरह की समस्याएं होंगी.

रवांडा

राजनीतिक तोर पर केंट तट पर पहुंचने वाले प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या सबसे बड़ी चुनौती है.ब्रेवरमैन के पहले प्रीति पटेल थीं, उनकी रवांडा भेजे जाने की धमकी देने का मामला फिलहाल हाईकोर्ट में हैं. मुमकिन है कि ये साबित हो जाए कि क्या इससे लोगों का आना कम होगा.

शरणार्थी

संरचनात्मक मुद्दों में एक शरणार्थी सिस्टम है जिसमें कई गड़बड़ियां हैं. इसमें ख़र्चा हर साल 2 बिलियन पाउंड से ज़्यादा है. दो दशकों में सबसे ज़्यादा मामले लंबित हैं और इनमें रिकॉर्ड देरी हो चुकी है.

इसके अलावा, ब्रिटेन में शरण चाहने वाले हजारों लोग सरकारी समर्थन वाले होटलों में फंसे हैं, जिनके हर दिन का ख़र्च 40 लाख पाउंड से ज़्यादा है. इनमें से 10 लाख पाउंड अफ़ग़ान शरणार्थियों पर खर्च किए जा रहे हैं, जो तालिबान के कब्ज़े के बाद वहां से भागे थे और लंबे समय के लिए यहां रहने वाले हैं.

अपराध

धोखाधड़ी, बलात्कार और हिंसक हमलों सहित अपराध के दूसरे मामलों में तेजी से बढ़े हैं, वेल्स और इंग्लैंड की पुलिस ने पिछले 20 वर्षों में सबसे अधिक अपराध दर्ज किए हैं, ख़ासकर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ी हैं, यौन अपराध, हिंसक हमले और गोलीबारी, बंदूक और चाकू अपराध पर नकेल कसने का दबाव है. जबकि अपराध ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर है, लेकिन कॉस्ट ऑफ़ लिविंग के बढ़ने से आशंका जताई जा रही है कि अपराध बढ़ सकते हैं.

पुलिसिंग

मार्च 2023 तक 20,000 नए पुलिस अधिकारियों को नियुक्त करने के वादे को पूरा करने का दबाव उनपर होगा. हाल ही में सांसदों की एक रिपोर्ट ने कहा गया कि गृह मंत्रालय को लक्ष्य तक पहुंचने में "महत्वपूर्ण चुनौतियों" का सामना करना पड़ेगा क्योंकि मार्केट में बहुत प्रतिस्पर्धा है और पुलिस पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है. जून के अंत तक 13,790 पुलिसकर्मी नियुक्त किए गए थे.

पासपोर्ट

पासपोर्ट आवेदनों के निपटारे में निरंतर देरी हो रही है. आशंका है कि साल के अंत तक इसमें सुधार नहीं होगा. ब्रेवरमैन के लिए ये एक बड़ी चुनौती है. पासपोर्ट कार्यालय के निदेशकों के अनुसार, 550,000 से अधिक पासपोर्ट जून के अंत तक लंबित हैं. इसलिए, अगले कुछ दिन, सप्ताह और महीने देश के नए गृह मंत्री के लिए बहुत व्यस्त और चुनौतीपूर्ण समय होंगे.

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