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चीन की चेतावनी के बावजूद अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी पहुंचीं ताइवान
चीन के कई बार विरोध जताने के बावजूद अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच गई हैं.
स्पीकर नैंसी पेलोसी और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने ताइवान पहुंचने पर एक बयान जारी कर कहा, "हमारे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की ताइवान यात्रा यहां के जीवंत लोकतंत्र का समर्थन करने के लिए अमेरिका की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है."
"ये हमारी इंडो-पैसेफ़िक यात्रा का हिस्सा है जिसमें सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान शामिल हैं. ये यात्रा सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और लोकतांत्रिक शासन के मुद्दों पर केंद्रित है."
बयान में कहा गया है कि ताइवानी नेतृत्व के साथ चर्चा खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के साथ साझा हितों को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी.
बयान में कहा गया, "ताइवान के 2 करोड़ 30 लाख लोगों के साथ अमेरिका की एकजुटता आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया को निरंकुशता और लोकतंत्र के बीच एक विकल्प का चुनना है और यात्रा अमेरिकी नीतियों के ख़िलाफ़ नहीं है और 1979 के ताइवान रिलेशन एक्ट और चीन के साथ हुए समझौते के अनुसार हैं"
"अमेरिका यथास्थिति को बदलने की एकतरफ़ा कोशिश का विरोध करता है."
ताइवान ने नैंसी पेलोसी की यात्रा का स्वागत किया है और इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल का शुक्रिया भी कहा है.
चीन का बयान
चीन ने इस यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वो ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास करेगा.
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक ट्वीट में लिखा, "चीनी सेना ताइवान के चारों ओर छह जगहों पर एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास करेगा जिसमें लाइव फ़ायर ड्रिल शामिल होगा."
चीन की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया है, "चीन के कड़े विरोध के बावजूद अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल और स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने चीन के ताइवान क्षेत्र का दौरा किया. यह वन चाइना पॉलिसी और चीन-अमेरिका के समझौतों का गंभीर उल्लंघन है."
"इसका चीन-अमेरिका के राजनीतिक संबंधों पर गहरा असर पड़ा है. ये चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है. यह ताइवान में शांति और स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर करता है, और "स्वतंत्र ताइवान" की बात करने वाले अलगाववादी ताकतों को गलत संकेत भेजता है."
"चीन इसका पुरजोर विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है, और अमेरिका के सामने कड़ा विरोध जताया है. दुनिया में एक चीन है. ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है और सिर्फ़ चीन की सरकार उसका प्रतिनिधित्व करती है."
चीन ने पहले भी दी थी चेतावनी
इसस पहले चीन के दूतावास ने कहा था कि अगर पेलोसी ताइवान जाती हैं, तो इसके परिणाम अमेरिका को भुगतने पड़ेंगे.
भारत में चीन के दूतावास के प्रवक्ता वैंग शियोज़ियान ने ट्विटर पर लिखा था, "वन-चाइना नीति चीन-अमेरिका संबंधों का राजनीतिक आधार है. चीन 'ताइवान स्वतंत्रता' की ओर अलगाववादी क़दमों और बाहरी ताक़तों के हस्तक्षेप का पूरी तरह से विरोध करता है और 'ताइवान की स्वतंत्रता' की बात करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है."
उन्होंने लिखा, "स्पीकर पेलोसी की ताइवान की यात्रा से चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप होगा, ताइवान में शांति और स्थिरता को ख़तरा पहुँचेगा, चीन-अमेरिका संबंध कमज़ोर होंगे और इसके परिणाम गंभीर होंगे."
इसके अलावा उन्होंने लिखा कि अमेरिका को परिणाम भुगतने होंगे. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, "लोगों की राय को दरकिनार नहीं किया जा सकता. आग से खेलने वालों को नतीजा भुगतना होगा. अगर अमेरिका वहां जाने पर अड़ा रहता है और चीन को चुनौती देता है तो उसे जवाब मिलेगा. इसके परिणाम अमेरिका को भुगतने पड़ेंगे."
अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद नैंसी पेलोसी अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर हैं.
वे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बाद अमेरिका की तीसरी सबसे ताक़तवर शख़्सियत हैं. अगर वे ताइवान की यात्रा करती हैं तो वे साल 1997 के बाद ऐसा करने वालीं अमेरिका की सबसे वरिष्ठ नेता होंगी.
चीन स्व-शासित ताइवान को एक अपने एक प्रांत के रूप में देखता है. चीन का मानना है कि उसे देश का हिस्सा होना चाहिए. ऐसा करने के लिए चीन सैन्य हस्तक्षेप भी कर सकता है. दूसरी ओर, ताइवान ख़ुद को एक आज़ाद मुल्क मानता है.
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