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पुतिन और पीटर द ग्रेटः 18वीं सदी के ज़ार से अपनी तुलना क्यों करते हैं रूस के नेता पुतिन
- Author, सारा रेन्सफ़र्ड
- पदनाम, पूर्वी यूरोप संवाददाता
18वीं सदी के ज़ार को लेकर व्लादिमीर पुतिन की प्रशंसा तो जगज़ाहिर है लेकिन अब पुतिन अपने आप को भी ऐसा ही महान मानने लगे हैं.
उन्होंने खुले तौर पर रूसी साम्राज्य के ज़ार रहे पीटर द ग्रेट से अपनी तुलना की है. पुतिन ने तीन सदी पहले पीटर के विस्तारवादी युद्धों की तुलना यूक्रेन पर रूस के हमले से की है. एक तरह से पुतिन ने अब तक के सबसे मज़बूत शब्दों में ये माना है कि उनका अपना युद्ध भी ज़मीन पर क़ब्ज़े के लिए ही है.
पुतिन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाएं ने यूक्रेन का नुकसान तो किया ही है, इससे इस्टोनिया जैसे पड़ोसी देश भी नाराज़ हो गए हैं. इस्टोनिया ने पुतिन कहा है कि पुतिन की टिप्पणी किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों से मुलाक़ात के दौरान ये टिप्पणी की है.
सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीकी जगत की उपलब्धियों पर बात करने से पहले उन्होंने राजनीति और सत्ता पर बात की. उन्होंने उन नए संघर्षों पर बात की जिन्हें वो वैश्विक प्रभाव के लिए होता हुआ देखते हैं. अपनी टिप्पणी में उन्होंने चुनिंदा लोगों के सामने बोलते हुए कहा कि पीटर द ग्रेट एक अनुसरणीय व्यक्ति हैं जिनके नक़्शे क़दम पर चला जाना चाहिए.
'पीटर ने किसी भी जगह पर क़ब्ज़ा नहीं किया'
पुतिन ने कहा, "आप ये सोच रहे हैं कि वो स्वीडन से लड़ रहे थे, उनकी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा कर रहे थे." पुतिन ने 18वीं सदी के नॉर्दन वॉर्स (उत्तरी इलाक़े में लड़े गए युद्धों) के संदर्भ में ये बात कही. 18वीं सदी की शुरुआत में जब पीटर द ग्रेट नए रूसी साम्राज्य की स्थापना कर रहे थे तब ये युद्ध हुए थे.
पुतिन ने तर्क देते हुए कहा कि "उन्होंने किसी भी जगह पर क़ब्ज़ा नहीं किया था, बल्कि उसे फिर से हासिल किया था." पुतिन ने तर्क दिया कि इन इलाक़ों में ग़ुलाम सदियों से रहते आ रहे थे.
पुतिन ने कहा, "ऐसा लगता है कि अब फिर से हासिल करने की ज़िम्मेदारी हम पर आ गई है." पुतिन की इस टिप्पणी के बाद कोई शक नहीं रह गया है कि वो यूक्रेन के संदर्भ में ये बात कह रहे थे और उन्होंने यूक्रेन को लेकर अपने इरादे भी ज़ाहिर कर दिए.
पुतिन ने कहा कि पीटर का शासन इस बात का स्वरूप है कि जब रूस का विस्तार हुआ तो वो और मज़बूत हुआ.
इतिहास की बातें कर रहे हैं पुतिन
पुतिन हाल के दिनों में रूस के इतिहास की बातें ख़ूब कर रहे हैं. वो बहुत सावधानी से ऐसी ही बातें कहते हैं जो उनके आज के उद्देश्यों को पूरा करती हों. यूक्रेन पर हमले से कई महीने पहले उन्होंने एक लंबा निबंध लिखा था जिसमें उन्होंने तर्क दिए थे कि यूक्रेन के अस्तित्व का कोई ऐतिहासिक अधिकार नहीं है.
रूस ने जब 24 फ़रवरी को अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर हमला किया तो पुतिन ने इस बारे में झूठ बोलते हुए इसे रूस की सेनाओं का एक विशेष अभियान बताया. उन्होंने कहा था कि रूस की सेना का ये अभियान डोनबास क्षेत्र तक सीमित रहेगा और इसका उद्देश्य इन इलाक़ों का नाज़ी-निरस्त्रीकरण करना है. उन्होंने कहा था कि इससे रूस के लिए ख़तरा कम होगा.
लेकिन जिस समय पुतिन ये बातें कह रहे थें, उनकी सेनाएं यूक्रेन की राजधानी कीएव की घेराबंदी कर रही थीं और देश के पश्चिमी इलाक़ों की तरफ़ आगे बढ़ रही थीं. युद्ध शूरू होने के सौ से अधिक दिन बाद यूक्रेन की बीस प्रतिशत हिस्सा रूस के नियंत्रण में है. यहां रूस ने कठपुतली प्रशासन बिठाया है जो रूस के साथ विलय के लिए रेफ़रेंडम का वादा करता है.
अब पुतिन यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को लेकर इतना मुखर हो गए हैं कि वो ये कहने लगे हैं कि उनका वो सैन्य अभियान असल में सैन्य क़ब्ज़ा है.
वो ये भी मानते हैं कि अंततः पश्चिमी देश उस सच्चाई को मान लेंगे जिसे ज़मीन पर स्थापित करने के लिए रूस के सैनिक लड़ाई लड़ रहे हैं.
पुतिन ने कहा, "उस समय किसी भी यूरोपीय देश ने उस ज़मीन पर रूस का अधिकार स्वीकार नहीं किया था जहां पीट ने रूस की नई राजधानी सैंट पीटर्सबर्ग बनाई थी. अब वो इसे स्वीकार करते हैं."
पुतिन की टिप्पणी ने बाल्टिक देशों को भी हिला दिया है. इस्टोनिया के विदेश मंत्रालय ने रूस के राजदूत को तलब किया और रूस के पीटर द ग्रेट के नार्वा पर हमले के इस संदर्भ की आलोचना कि की रूस अपने इलाक़ों को वापस ले रहा है और मज़बूत कर रहा है. नार्वा अब इस्टोनिया का हिस्सा है.
हालांकि पुतिन इतिहास का इस्तेमाल अपनी सहूलियत के हिसाब से कर रहे हैं.
पीटर ने ज्ञान की तलाश में यूरोप की यात्रा की
पीटर द ग्रेट, भले ही एक निरंकुश तानाशाह थे, लेकिन वो पश्चिमी विचारों, विज्ञान और संस्कृति के बड़े प्रसंशक थे. उन्होंने सैंट पीटर्सबर्ग को 'यूरोप के लिए एक खिड़की' की तरह स्थापित किया था. पीटर ने ज्ञान की तलाश में यूरोप की यात्रा की थी ताकि वो रूस को आधुनिकता की तरफ़ ला सकें.
पुतिन के लगातार दमनकारी हो रहे शासन ने यूरोप की तरफ़ खुलने वाली उस खिड़की को धीरे-धीरे बंद किया. यूक्रेन युद्ध ने इस खिड़की को एक झटके में ही बंद कर दिया है. उस ज़माने में ज़ार पीटर महान ने ज्ञान और प्रेरणा के लिए हॉलैंड और ग्रीनिच की यात्रा की थी. आज के दौर में पुतिन का यहां की इस तरह यात्रा करना असंभव सा लगता है.
पुतिन जब नव-विज्ञानियों और युवा उद्यमियों को 18वीं सदी के ज़ार के बारे में ज्ञान दे रहे थे तब उनके पीछे तीन शब्द मोटे-मोटे चमक रहे थे- भविष्य, आत्मविश्वास और विजय.
यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों ने रूस की तीखी आलोचना की है और सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं. रूस इन्हें ख़ारिज करता रहा है. पुतिन स्वयं निश्चित रूप से परेशान होने के बजाए निश्चिंत और आराम से दिखाई दिए.
लेकिन शायद इतिहास की किताबों में उनके लिए एक और सबक भी है.
पीटर द ग्रेट ने अंततः बाल्टिक से लेकर काले सागर तक की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया था. लेकिन रूस को उत्तरी इलाक़े में हुआ वो द ग्रेट नॉर्दन वॉर 21 सालों तक लड़ना पड़ा था.
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