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पुतिन ने शहबाज़ शरीफ़ से ऐसा क्या कहा कि इमरान ख़ान आए निशाने पर
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री को बधाई दी है. राष्ट्रपति पुतिन ने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच सहयोग आने वाले दिनों में और बढ़ेगा.
पाकिस्तान स्थित रूसी दूतावास ने राष्ट्रपति पुतिन का संदेश ट्वीट किया है. राष्ट्रपति पुतिन के हवाले से जारी संदेश में कहा गया है, ''राष्ट्रपति पुतिन ने पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ेगा. अफ़ग़ानिस्तान और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से लड़ने के मोर्चे पर भी दोनों देशों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है.''
इससे पहले शहबाज़ शरीफ़ को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी थी. पीएम मोदी ने कहा था कि वह नए नेतृत्व से सहयोग की उम्मीद करते हैं.
तुर्की के राष्ट्रपति ने बधाई देते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच गहरे संबंध हैं और आने दिनों में यह और मज़बूत होगा. अर्दोआन ने कहा, ''तमाम मुश्किलों के बावजूद पाकिस्तान ने ख़ुद को लोकतंत्र से दूर नहीं किया और क़ानून-व्यवस्था बनी रही. तुर्की पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मदद करने के लिए तैयार है.''
इमरान ख़ान जब प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने इसी साल 24 फ़रवरी को रूस का दौरा किया था. इमरान ख़ान जिस दिन रूस पहुँचे थे, उसी दिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन में विशेष सैन्य कार्रवाई की घोषणा की थी.
इमरान ख़ान की सरकार बहुमत के बिना गिरी तो उन्होंने अमेरिका पर साज़िश के तहत सरकार गिराने का आरोप लगाया था. इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के कई नेताओं ने सरकार गिरने को ख़ान के रूस दौरे से भी जोड़ा था.
अब जब रूसी राष्ट्रपति ने शहबाज़ शरीफ़ को बधाई दी है तो इमरान ख़ान के बयान पर पाकिस्तान के लोग तंज़ कस रहे हैं.
पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मीर ने रूसी दूतावास के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है, ''रूसी राष्ट्रपति ने उस व्यक्ति को बधाई दी जो अमेरिकी साज़िश के बल पर सत्ता में आया है.''
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक़्क़ानी ने भी रूसी दूतावास के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है, ''पुतिन ने उस व्यक्ति को बधाई दी है, जिसके बारे में इमरान ख़ान कह रहे थे कि अमेरिकी साज़िश से सत्ता में आए हैं. इमरान ख़ान अपने रूस दौरे को भी पीएम की कुर्सी जाने से जोड़ा था. साज़िश ज़्यादा गहरी नहीं हो गई?''
पाकिस्तानी लेखक यूसुफ़ नज़र ने भी पुतिन की बधाई पर लिखा है, ''चीन, रूस और तुर्की ने शहबाज़ शरीफ़ के पीएम बनने का गर्मजोशी से स्वागत किया है. लेकिन इमरान ख़ान को लगता है कि यह अमेरिकी साज़िश थी. अगर अमेरिकी साज़िश होती तो रूस और चीन इस तरह से स्वागत नहीं करते.''
पाकिस्तानी पत्रकार मुर्तज़ा अली शाह ने भी तंज़ कसते हुए लिखा है, ''पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के ख़िलाफ़ कथित अंतरराष्ट्रीय साज़िश में रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी शामिल हो गए हैं.''
पाकिस्तान के समा टीवी में इन्वेस्टिगेशन यूनिट के प्रमुख ज़ाहिद गिशकोरी ने पुतिन की बधाई पर लिखा है, रूस ने उम्मीद जताई है कि शहबाज़ शरीफ़ के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा. पाकिस्तान के कई लोग पुतिन की बधाई को काफ़ी अहम मान रहे हैं. पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर फरहातुल्लाह बाबर ने लिखा है कि पाकिस्तान को अपनी साझेदारी का विस्तार करना चाहिए.''
इमरान ख़ान का रूस दौरा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के रूस दौरे की चर्चा कई कारणों से हो रही थी. सबसे बड़ी वजह थी कि जिस दिन इमरान ख़ान मॉस्को पहुँचे थे, उसी दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था.
ऐसा भी नहीं है कि इमरान ख़ान को इसका अंदाज़ा नहीं रहा था क्योंकि एक दिन पहले ही पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन के दो इलाक़ों को स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में मान्यता दी थी.
इसके अलावा महीनों से यूक्रेन को लेकर तनाव चल रहा था. कई जानकार कह रहे थे कि इमरान ख़ान को दौरा स्थगित कर देना चाहिए था.
पाकिस्तान के जाने-माने स्तंभकार फ़ारुख़ सलीम ने ट्वीट कर कहा है, ''रूस ने यूक्रेन पर हमला किया. उसने अंतरराष्ट्रीय नियम को तोड़ा है. पूरी दुनिया की राय रूस के पक्ष में नहीं है. क्या इमरान ख़ान ऐसे वक़्त में रूस का दौरा कर यूक्रेन पर उसके हमले को सही ठहरा रहे हैं?''
फ़ारुख़ ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा था, ''पाकिस्तान और रूस का द्विपक्षीय व्यापार प्रति वर्ष महज़ 40 करोड़ डॉलर का है. रूस को जो चाहिए, वो पाकिस्तान के पास नहीं है. रूस को इलेक्ट्रिक और इंडस्ट्रियल मशीनरी चाहिए. रूस को पाकिस्तान के उत्पाद की ज़रूरत नहीं है. इमरान ख़ान के दौरे से पाकिस्तान को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है.''
फ़ारुख़ सलीम ने लिखा था, ''रूस की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है. वैश्विक जीडीपी में रूस का महज़ तीन फ़ीसदी हिस्सा है. पाकिस्तान के कुल निर्यात का महज़ एक प्रतिशत रूस को जाता है. आईएमएफ़ में महज़ 2.5 फ़ीसदी वोट रूस के नियंत्रण में है. एफ़एटीएफ़ में भी रूस की भूमिका ना के बराबर है. पाकिस्तान को रूस से क्या मिलेगा?''
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