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इराक़ में कैसे तनाव गहरा रहा है और ईरान केंद्र में है?
इराक़ी प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी के आवास पर रविवार की सुबह एक ड्रोन के ज़रिए हमला किया गया. अल-कदीमी ने ट्वीट करके बताया था कि वो सुरक्षित हैं.
इस हमले के बाद एक बार फिर ड्रोन के ज़रिए हमले को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. प्रधानमंत्री का आवास ग्रीन ज़ोन के अति सुरक्षित इलाक़े में है जहां पर कई देशों के दूतावास और दफ़्तर भी हैं.
विस्फोटकों से भरा यह ड्रोन इमारत से टकराया था जिसमें छह सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं. इराक़ी अधिकारियों ने इसे साफ़तौर पर हत्या की कोशिश बताया है.
वहीं अल-कदीमी ने 'हर किसी से संयम और शांति बरतने' को कहा है.
चुनाव परिणाम के बाद विरोध प्रदर्शन
हालिया चुनाव परिणामों के बाद काफ़ी अशांति रही है जिसके बाद यह हमला हुआ है. इस हमले की अमेरिका और ईरान दोनों ने निंदा की है.
पूर्व ख़ुफ़िया प्रमुख अल-कदीमी ने पिछले साल मई में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी.
बीबीसी की मध्य पूर्व की संवाददाता एना फ़ोस्टर कहती हैं कि इराक़ में चुनाव हुए अभी एक महीना भी नहीं बीता है और अब वहां पर गठबंधन सरकार के लिए काफ़ी अजीब लंबी कोशिशें चल रही हैं.
"मतदान रिकॉर्ड स्तर पर सबसे कम 41% रहा था और इसमें कम भागीदारी दिखाती है कि कई इराक़ी असली बदलाव में विश्वास नहीं रखते हैं."
"ईरान समर्थित पार्टियों ने उम्मीद से भी बुरा प्रदर्शन किया और वो अधिकतर सीटें हार गईं. उनके समर्थक परिणाम आने के बाद से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. बग़दाद के सुरक्षित ग्रीन ज़ोन के बाहर प्रदर्शनकारी जुटते रहे हैं और वोटों की हाथों से दोबारा गिनती करने की मांग की है."
"शिया मुस्लिम इमाम मुक़्तदा अल-सद्र ने जीत का दावा किया है और उनकी पार्टी ने अधिकतर सीटें जीती हैं. वो विदेशी दख़ल से मुक्त एक सरकार बनाने की कोशिशें कर रहे हैं. इसका मतलब है कि वो चाहते हैं इसमें न ही पश्चिम और न ही ईरान का दख़ल हो. वो चाहते हैं कि इराक़ के घरेलू मामलों में ईरान का प्रभाव ख़त्म हो."
"इन राजनीतिक बारीकियों का मतलब है कि तनाव चरम पर है और प्रधानमंत्री अल-कदीमी पर जानलेवा हमले की कोशिश दिखाती है कि दूरगामी नतीजों के साथ अब यह ख़तरा और बढ़ गया है."
कैसे हुआ हमला
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि इस हमले में तीन ड्रोन इस्तेमाल किए गए थे जिन्हें तिगरिस (दजला) नदी के रिपब्लिक ब्रिज से छोड़े गए थे. इनमें से दो को गिरा दिया गया था. अभी तक किसी ने भी हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
इराक़ी मीडिया ने कुछ तस्वीरें प्रकाशित की हैं जिनमें घरों को नुक़सान पहुंचा है.
एक अज्ञात सुरक्षा कर्मचारी ने रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को बताया कि सुरक्षाबलों ने विस्फोटक वाले एक छोटे ड्रोन के अवशेषों को जमा किया है.
अधिकारी ने कहा, "हमला किसने किया यह कहना अभी बहुत जल्दबाज़ी होगी. हम अपनी ख़ुफ़िया रिपोर्ट चेक कर रहे हैं और साज़िशकर्ताओं पर उंगली उठाने से पहले शुरुआती जांच के परिणामों का इंतज़ार कर रहे हैं."
हमला करने के लिए विस्फोटकों से लदे ड्रोन का इस्तेमाल चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट ने उत्तरी इराक़ में किया था. 2017 में मोसुल की लड़ाई के दौरान इसका इस्तेमाल किया था.
ड्रोन हमले की चारों तरफ़ हो रही निंदा
- शिया मुस्लिम इमाम मुक़्तदा अल-सद्र जिनकी पार्टी इन चुनावों में जीती है. उन्होंने इस हमले को आतंकी घटना बताते हुए कहा है कि यह देश की स्थिरता के लिए ख़तरा है और इसका उद्देश्य 'इराक़ को एक अशांत देश की ओर लौटाना है जिसका नियंत्रण विदेशी सेनाओं के पास हो.'
- इराक़ के राष्ट्रपति बरहम सालेह ने कहा है कि यह इराक़ के ख़िलाफ़ एक जघन्य अपराध है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, "हम कभी नहीं स्वीकार कर सकते हैं कि इराक़ को अराजकता में घसीटा जाएगा और उसके संवैधानिक सिस्टम के ख़िलाफ़ विद्रोह होगा.
- ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली शमख़ानी ने एक अज्ञात 'विदेशी थिंक टैंक' पर आरोप लगाया कि वो इराक़ में 'आतंकी और सुरक्षाबलों को समर्थन दे रहा है और उन्हें पैदा कर रहा है' जो कि 'सिर्फ़ असुरक्षा, कलह और अस्थिरता ही लेकर आएंगे.'
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अल-कदीमी से फ़ोन पर बात की और हमले की निंदा की है.
- अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि हमले के साज़िशकर्ताओं को सज़ा दी जानी चाहिए और 'इराक को कमज़ोर करने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करने वालों की कड़े शब्दों में' निंदा की जानी चाहिए.
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने सभी इराक़ियों से अपील करते हुए कहा कि वे 'इराक़ को अस्थिर करने वाली सभी कोशिशों और हिंसा को ख़ारिज करें.
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